Explained: 15 हजार करोड़ रुपए का कारोबार और 6 हजार से ज्यादा कोचिंग सेंटर्स! कैसे नया ‘कोटा’ बनता जा रहा बिहार?


2 जून 2026 की रात को पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में अफरा-तफरी मच गई. इस जगह को बिहार का सबसे बड़ा एजुकेशनल हब कहा जाता है. यहीं पर स्थित है मशहूर एजुकेटर फैजल खान यानी ‘खान सर’ का कोचिंग सेंटर ‘खान ग्लोबल स्टडीज’. खान सर ने दावा किया कि उनके सेंटर के बाहर फायरिंग हुई, सुरक्षा गार्ड को बुरी तरह पीटा गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. उन्होंने यहां तक कहा कि 8-10 राउंड फायरिंग हुई. हालांकि, अगले दिन ही पुलिस ने इस दावे से इनकार कर दिया. पुलिस ने ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया. इस घटना ने ‘कोचिंग माफिया’ और संस्थानों के बीच ‘वर्चस्व की लड़ाई’ जैसे मुद्दों को फिर से हवा दे दी है…

अब जानिए, बिहार की कोचिंग मंडी कितनी बड़ी है?

खान सर की कोचिंग पर हुआ यह हमला सिर्फ एक अलग घटना नहीं है. यह उस विशाल कोचिंग उद्योग की सिर्फ एक झलक है, जो बिहार की अर्थव्यवस्था और समाज की रीढ़ बन चुका है. आइए, नंबरों के जरिए समझते हैं इसकी असली तस्वीर:

  • स्मार्ट स्क्रैपर्स के अप्रैल 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में कोचिंग सेंटरों की संख्या 6,383 है. यह आंकड़ा 2023 के मुकाबले 1.64% बढ़ा है.
  • पटना सबसे बड़ा हब है, जहां 1,256 कोचिंग सेंटर हैं. उसके बाद मुजफ्फरपुर (578) और गया (428) का नंबर आता है.
  • इनमें से 92.98% यानी 5,935 कोचिंग सेंटर एकल-मालिकाना (single-owner) हैं, जबकि बाकी बड़े ब्रांड्स का हिस्सा हैं.
  • अकेले भागलपुर और बांका में 496 कोचिंग सेंटर हैं, जहां 58,000 से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं.
  • राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो भारत का कोचिंग इंडस्ट्री 7.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 60,000 करोड़ रुपये) का है और 2034 तक इसके 17.8 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
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बिहार की कोचिंग मंडी का कितने करोड़ का कारोबार?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में करीब 3,000 प्राइवेट कोचिंग संस्थान हैं और इसका सालाना टर्नओवर 250 करोड़ रुपये से ज्यादा है. इनसाइडर्स तो मानते हैं कि यह आंकड़ा जल्द ही 1,000 करोड़ रुपये को पार कर जाएगा.

बिहार में प्राइवेट कोचिंग का अनुमानित सालाना बाजार करीब 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये का है. यह आंकड़ा राज्य के कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे प्रति छात्र सालाना सवा लाख रुपये के खर्च पर आधारित है.

कितना बड़ा रोजगार पैदा करता है यह उद्योग?

कोचिंग इंडस्ट्री बिहार में लाखों लोगों को रोजगार देती है. बिहार में एक एकेडमिक कोच का औसत वार्षिक वेतन लगभग 4.72 लाख रुपये है, जो कम अनुभव में 2.16 लाख से लेकर अधिक अनुभव में 7.5 लाख रुपये तक हो सकता है. यह अनुमान लगाया गया है कि पूरे देश में कोचिंग उद्योग हजारों शिक्षकों, काउंसलरों और प्रशासनिक कर्मचारियों को रोजगार दे रहा है.

पूरे देश के मामले में बिहार का कितना बड़ा योगदान?

पूर्वी भारत कोचिंग बूम का केंद्र है. त्रिपुरा में लगभग 79%, पश्चिम बंगाल में 75%, ओडिशा में 57% और बिहार में 52.5% स्टूडेंट्स प्राइवेट कोचिंग ले रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत महज 27% है. यही कारण है कि पटना (मुसल्लहपुर हाट) को कोटा के बाद कोचिंग का दूसरा सबसे बड़ा हब माना जाने लगा है. मुसल्लहपुर हाट में प्रति छात्र करीब 1,000 रुपये मासिक फीस वाले कोचिंग सेंटर खूब पनप रहे हैं.

सरकार कैसे लगाम लगाने की कोशिश कर रही है?

बिहार इस मामले में देश का सबसे आगे का राज्य है. बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 को लागू करने वाला यह देश का पहला राज्य है. अब सरकार इसे और सख्त करने जा रही है:

  • अनिवार्य पंजीकरण: 25 से ज्यादा स्टूडेंट वाले हर कोचिंग सेंटर के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन. इसके लिए 15,000 रुपये फीस देनी होगी और यह रजिस्ट्रेशन 3 साल के लिए वैध होगा.
  • भारी जुर्माना: बिना रजिस्ट्रेशन कोचिंग चलाने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना होगा. अन्य नियमों के उल्लंघन पर 50,000 से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना और रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है.
  • पुलिस निगरानी: अब सभी कोचिंग सेंटरों का पूरा ब्योरा थाना स्तर पर रखा जाएगा. शिक्षकों और कर्मियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा.
  • स्टूडेंट्स के हित में सख्त नियम: प्रति छात्र कम से कम 2 वर्ग फीट जगह अनिवार्य. शिक्षकों के लिए ग्रेजुएशन डिग्री जरूरी. टॉपर्स की फोटो लगाकर प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध और फीस वापसी नियम स्पष्ट होगा.
  • खान सर मामले के बाद सरकार और सख्त: इस घटना के बाद बिहार सरकार ने अगले तीन महीने में एक व्यापक कोचिंग पॉलिसी बनाने की घोषणा की है.
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