हरियाणा के स्कूलों में 41 हजार टीचर्स कम, इस नेता ने किया बड़ा खुलासा


इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के राष्ट्रीय संरक्षक और हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि भाजपा सरकार जानबूझकर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है. उन्होनें प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार को घेरते हुए कुछ आंकड़े पेश किए जिसमें सरकारी शिक्षकों की भर्ती को नियुक्ति को लेकर सवाल किए गए है. उनके बयान के मुताबिक शिक्षा व्यवस्था ठप होने की वजह से ग्रामीण परिवार के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. वहीं शिक्षकों से भी पढ़ाने की बजाय बीएलओ जैसे काम कराए जा रहे हैं. जिससे स्कूलों में पढ़ाई का स्तर तेजी से गिर रहा है.

34 प्रतिशत शिक्षक पद पड़े हैं खाली

सिंह के बयान के मुताबिक, सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में 1.22 लाख से अधिक पदों में से 34 प्रतिशत यानि की 40,971 पद खाली पड़े हैं. वहीं साल 2014 से प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों की भर्ती ठप पड़ी है. उन्होंने आरोप लगाए है कि सरकार जानबूझकर बार-बार नियमों में बदलाव कर के इन भर्तियों को रोकने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि एएमओ (AMO) भर्ती का परिणाम हाई कोर्ट के निर्देश पर चौथी बार बदला गया.

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स्कूलों के साथ-साथ कॉलेज भी संकट में

सम्पत सिंह के अनुसार स्कूलों के साथ-साथ प्रदेश की उच्च शिक्षा भी संकट में है. प्रदेश के 186 सरकारी कॉलेजों में 60 प्रतिशत अस्सिटेंट प्रोफेसर के पद खाली पड़े हैं. वहीं कई कॉलेज धर्मशाला, टिन शेड व जर्जर भवनों में चल रहे हैं और सरकारी छात्रों का नांमकन घटकर केवल 29 प्रतिशत ही रह गया है. 53 कॉलेजों में केवल 50 से कम छात्र ही रह गए हैं. वहीं कुछ कॉलेज में तो छात्रों की संख्या केवल एक अंक ही रह गई है.

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सरकार के लिए काम कर रही है भर्ती रोको गैंग

सिंह ने यह भी कहा कि सरकार हमेशा भर्ती रोको गैंग का बहाना दे कर विपक्ष को जिम्मेदार ठहराती है. बल्कि असल में यह गैंग सरकार के लिए ही काम करती है. वहीं पिछले 12 सालों में 5000 से ज्यादा प्राइमरी स्कूलों को या तो बंद कर दिया गया है या तो उन्हें दूसरे स्कूलों के साथ जोड़ दिया गया है. लगभग 6000 प्री-प्राइमरी स्कूलों को चौपालों व वृद्धाआश्रमों में चलाए जा रहे हैं.

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