नीट पेपर लीक से मचा बवाल, चीन की परीक्षा सुरक्षा जानकर रह जाएंगे हैरान; AI-Drone और पुलिस एस्कॉर्ट तक कड़ा इंतजाम


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  • परीक्षा केंद्रों पर मोशन सेंसर, AI कैमरे और ड्रोन से नकल रोकने के इंतजाम.

देश भर में इस वक्त नीट यूजी के पेपर लीक का मामला गर्माया हुआ है. ये कोई पहली बार नहीं जब देश में किसी एग्जाम का पेपर लीक हुआ हो. पिछले कुछ सालों में ये एक ट्रेंड सा बनता जा रहा है. जब कोई एग्जाम होता है छात्रों और अभिभावकों के मन में एक ही सवाल होता है क्या इस बार परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित होगी? इससे पहले 2024 में सामने आए पेपर लीक के मामले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए थे. लेकिन इस बार फिर नीट पेपर लीक के मामलों ने देश भर के युवाओं में आक्रोश पैदा कर दिया. लेकिन क्या आपको पता है चीन में एक ऐसा एग्जाम है जिसकी रखवाली सेना स्तर की होती है?

ऐसे में जब भारत में 22 से 23 लाख कैंडिडेट्स की तरफ से दिए जाने वाला पेपर लीक हो गया तो चीन के एग्जाम की बात करना जरूरी है. वहां के गाओकाओ एग्जाम में हर साल 1 करोड़ से ऊपर स्टूडेंट्स शामिल होते हैं. लेकिन जितनी बड़ी यह परीक्षा है, उससे कहीं ज्यादा मजबूत इसकी सुरक्षा व्यवस्था है. चीन में गाओकाओ केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी मानी जाती है. परीक्षा के पेपर तैयार करने से लेकर परीक्षा खत्म होने तक हर कदम पर सेना स्तर की सुरक्षा रहती है.

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कहां तैयार होते हैं पेपर?

सबसे पहले बात पेपर की सुरक्षा की करते हैं. गाओकाओ के प्रश्न पत्र आम दफ्तरों में नहीं बनते. इन्हें बेहद गुप्त और अलग-थलग जगहों पर तैयार किया जाता है. कई बार इन जगहों में सरकारी सुरक्षित परिसर या जेल जैसी जगहें शामिल होती हैं. वहां काम करने वाले लोग परीक्षा खत्म होने तक बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे रहते हैं. उनके फोन, इंटरनेट और किसी भी तरह के संपर्क के साधन बंद कर दिए जाते हैं.

जब प्रश्न पत्र तैयार हो जाते हैं, तो उनकी ढुलाई भी आम तरीके से नहीं होती. पेपर ले जाने वाले वाहनों के साथ हथियारबंद सुरक्षा बल चलते हैं. गाड़ियों में जीपीएस लगा होता है और हर मूवमेंट पर नजर रखी जाती है. लाइव कैमरों के जरिए कंट्रोल रूम से इन गाड़ियों की निगरानी होती रहती है. इसे किसी सरकारी गुप्त दस्तावेज की तरह संभाला जाता है.

मोशन सेंसर और अलार्म से रखवाली
परीक्षा केंद्रों पर भी सुरक्षा कम नहीं होती. प्रश्न पत्रों को स्टील से बने मजबूत कमरों में रखा जाता है. इन कमरों में मोशन सेंसर और अलार्म लगे होते हैं. एक तय टीम इन कमरों के अंदर ही रहती है. वे वहीं खाते-पीते और सोते हैं, ताकि पेपर पर हर पल नजर रहे और किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे.

नकल रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम
अब बात नकल रोकने की. परीक्षा केंद्र के गेट पर ही सख्त जांच शुरू हो जाती है. छात्र विशेष सुरक्षा गेट से होकर गुजरते हैं, जो बहुत छोटे धातु के टुकड़े तक पकड़ लेते हैं. मोबाइल, स्मार्ट वॉच, ईयरपीस या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक चीज अंदर ले जाना लगभग असंभव है.

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ड्रोन की भी ली जाती है मदद
परीक्षा के दौरान सिग्नल जैमर लगाए जाते हैं, जिससे किसी भी तरह का फोन या रेडियो सिग्नल काम न कर सके. कुछ जगहों पर ड्रोन तक उड़ाए जाते हैं, जो आसपास किसी संदिग्ध सिग्नल को पकड़ लेते हैं. यानी जमीन से लेकर आसमान तक निगरानी रहती है.

AI कैमरे करते हैं ये काम
कमरों के अंदर एआई कैमरे लगे होते हैं. ये कैमरे छात्रों की हर हरकत पर नजर रखते हैं. अगर कोई छात्र बार-बार इधर-उधर देखता है या उसकी बॉडी लैंग्वेज अजीब लगती है, तो तुरंत निगरानी करने वालों को अलर्ट मिल जाता है. इससे नकल की कोशिश तुरंत पकड़ में आ जाती है.

पुलिस करती है स्टूडेंट्स को एस्कॉर्ट
परीक्षा के दिनों में शहरों का माहौल भी बदल जाता है. परीक्षा केंद्रों के आसपास ट्रैफिक कंट्रोल किया जाता है. अगर कोई छात्र ट्रैफिक में फंस जाए, तो पुलिस उसे एस्कॉर्ट करके समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाती है. शोर-शराबा रोकने के लिए निर्माण कार्य तक बंद कर दिए जाते हैं.

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