UP First DGP: यूपी का पहला DGP कौन था, रिटायरमेंट के समय कितनी मिलती थी सैलरी?


UP First DGP: उत्तर प्रदेश पुलिस में डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस यानी डीजीपी का पद सबसे ऊंचा माना जाता है. यह अधिकारी पूरे राज्य की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालता है और पुलिस फोर्स का नेतृत्व करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस अहम पद पर सबसे पहले कौन नियुक्त हुआ था और इस पद से जुड़े अधिकारियों को कितने सैलरी मिलती है. नहीं तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि यूपी का पहला डीजीपी कौन था और रिटायरमेंट के समय कितनी सैलरी मिलती थी.

कौन था यूपी का पहले डीजीपी?

जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में डीजीपी पद की शुरुआत साल 1982 में हुई थी. इस पद पर सबसे पहले नरेश कुमार को नियुक्त किया गया था. उन्होंने 5 मार्च 1982 से 24 जुलाई 1982 तक राज्य के पहले पुलिस महानिदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी. उनके कार्यकाल को इस पद की स्थापना के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान राज्य में पुलिस प्रमुख के रूप में डीजीपी की भूमिका को व्यवस्थित रूप दिया गया था. नरेश कुमार का जन्म 1 जनवरी 1960 को उत्तर प्रदेश के हापुड़ में हुआ था.

क्या होता है डीजीपी का काम?

डीजीपी राज्य का सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी होता है, जो पूरे पुलिस विभाग की कमान संभालता है. कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराध रोकने की रणनीति बनाना, पुलिस बल का संचालन और निगरानी, आपात स्थितियों में निर्णय लेना और सरकार को सुरक्षा से जुड़े मामलों में सलाह देना डीजीपी का काम होता है. इसके अलावा डीजीपी पुलिस और जनता के बीच भरोसा बनाए रखता है.  संसाधनों के प्रबंधन और अलग-अलग एजेंसियों के साथ समन्वय का काम भी डीजीपी  करता है.

See also  MPESB Group 5 Paramedical answer key 2026 released at esb.mp.gov.in: Direct link to download here

कैसे होती है डीजीपी की नियुक्ति?

डीजीपी आमतौर पर भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों में से चुना जाता है. इसके लिए लंबा अनुभव, वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड को ध्यान में रखा जाता है. डीजीपी की चयन प्रक्रिया में राज्य सरकार और संबंधित समितियों की भूमिका होती है. वहीं डीजीपी पद पर तैनात अधिकारी को सरकार की ओर से उच्च वेतन मिलता है. जानकारी के अनुसार, इस पद पर लगभग 2,25,000 प्रति माह तक सैलरी तय होती है. हालांकि, 1982 में यह सैलरी आज की तुलना में बेहद कम करीब 3000 से 3500 रुपये प्रतिमाह लगभग होती थी, लेकिन उस दौर के लिए यह एक हैंडसम अमाउंट था.  

ये भी पढ़ें-इजरायल और ईरान की करेंसी में कितना अंतर, दोनों देशों में 10000 से क्या-क्या खरीद सकते हैं?

 

क्यों अहम है डीजीपी का पद?

डीजीपी का पद प्रशासनिक ही नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. राज्य में सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और आपात स्थितियों में लिए गए फैसलों का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है. इसलिए डीजीपी का पद बहुत अहम माना जाता है.

 

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

See also  Bharat Gite, Founder of Taural India, conferred with the ‘Global Inspiration of the Year 2026’ at the British Parliament

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required