NITI Aayog की रिपोर्ट में खुलासा, सिर्फ 8.25% ग्रेजुएट्स को ही पढ़ाई से जुड़ी नौकरी


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  • नीति आयोग: केवल 8.25% स्नातकों को योग्यतानुसार नौकरी मिलती है।
  • शिक्षा और रोजगार के बीच गहरा अंतर बड़ी चुनौती है।
  • अधिकांश छात्रों में व्यावहारिक अनुभव और कौशल की कमी है।
  • सरकारी नौकरियों में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा; विविध विकल्पों की आवश्यकता।

भारत में हर साल बड़ी संख्या में युवा ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करके नौकरी की तलाश में निकलते हैं, लेकिन अब उनकी डिग्री और नौकरी के बीच बड़ा अंतर सामने आया है. दरअसल नीति आयोग की और से जारी Reimagining Skilling For Viksit Bharat@2047 रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में सिर्फ 8.25 प्रतिशत साड़ी ग्रेजुएट्स ही अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार समस्या सिर्फ बेरोजगारी तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्किल और रोजगार के बीच तालमेल की कमी भी बड़ी समस्या बनकर सामने आई है. 

पढ़ाई और नौकरी के बीच बड़ा गैप 

नीति आयोग ने देश की हायर और तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा और रोजगार बाजार के बीच एक बुनियादी अंतर की ओर इशारा किया है. रिपोर्ट के अनुसार कई संस्थानों में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम बदलती इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार अपडेट नहीं है. ऐसे में डिग्री डिप्लोमा और सर्टिफिकेट हासिल करने के बावजूद युवाओं के लिए नौकरी हासिल करना आसान नहीं होता है. देश में बड़ी संख्या में छात्र सामान्य ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन लेते हैं. करीब 3.4 करोड़ छात्र अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम में पढ़ रहे हैं, जिनमें लगभग 1.3 करोड़ छात्र बीए कर रहे हैं. बीए, बीएससी और बीकॉम में पढ़ने वाले छात्रों की संयुक्त संख्या 2 करोड़ से ज्यादा है. रिपोर्ट के अनुसार इन सामान्य डिग्री कोर्स का रोजगार से सीधा जुड़ाव कमजोर है और कई छात्र इन्हें सरकारी नौकरी के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता पूरी करने के उद्देश्य से भी करते हैं. 

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80% छात्रों को प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस की कमी 

रिपोर्ट में छात्रों की ओर से बताई गई कमियों को भी सामने रखा गया है. करीब 80 फीसदी लर्नर्स ने प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस और इंडस्ट्री एक्सपोजर की कमी को अपनी पढ़ाई में बड़ी समस्या बताया है. वहीं 34 फीसदी छात्रों ने स्किल्स की कमी और 18 फीसदी ने इंटरव्यू की तैयारी की कमी को प्रमुख परेशानी बताया. रिपोर्ट में डिजिटल और कम्युनिकेशन स्किल्स की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया गया है. यानी कई छात्र डिग्री तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन नौकरी के लिए जरूरी व्यावहारिक क्षमता और ऑफिस से जुड़ी स्किल उनके लिए पर्याप्त नहीं होती. 

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BA, BCom और BSC के बाद नहीं मिलता करियर का रास्ता 

नीति आयोग के अनुसार बीए, बीकॉम और बीएससी जैसी सामान्य डिग्री अपने आप में बेकार नहीं है, लेकिन कई बार यह डिग्रियां यह स्पष्ट नहीं करती कि छात्र के पास नौकरी के लिए कौन सी व्यावहारिक क्षमता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन डिग्रियों से सीधे रोजगार हासिल करना मुश्किल हो सकता है और एंट्री लेवल की नौकरियों के लिए भी टेली या ऑफिस एप्लीकेशन जैसी अतिरिक्त वर्कप्लेस स्किल की जरूरत पड़ सकती है. यही वजह है की डिग्री पूरी करने के बाद भी कई युवाओं को अतिरिक्त ट्रेनिंग, स्किल्स डेवलपमेंट या एक्सपीरियंस हासिल करना पड़ता है. 

सरकारी नौकरी की तरफ बढ़ता युवाओं का रुझान

रिपोर्ट में सरकारी नौकरियों के लिए युवाओं के बीच बढ़ते कंपटीशन का भी जिक्र किया गया है. नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच करीब 55,000 पदों के लिए 1.86 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए. यह आंकड़ा सरकारी नौकरी की मांग और उपलब्ध पदों के बीच बड़ा अंतर दिखता है. रिपोर्ट के अनुसार इसका समाधान केवल सरकारी नौकरियों की संख्या बढ़ाना नहीं है बल्कि शिक्षा व्यवस्था को युवाओं को रोजगार, उद्यमिता, स्वरोजगार और पारिवारिक कारोबार अलग-अलग करियर ऑप्शन के लिए भी तैयार करना होगा.

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