12वीं के बाद Merchant Navy में शानदार करियर, लाखों की सैलरी और विदेश घूमने का मौका- जानें कैसे बने अधिकारी


वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री में करीब 19 लाख सीफेयरर काम करते हैं, जबकि दुनिया के 80 से 90 प्रतिशत व्यापार का परिवहन समुद्री जहाज के जरिए होता है. ऐसे में प्रशिक्षित भारतीय अधिकारियों की मांग लगातार बनी हुई है. अगर आप भी इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो चलिए आज हम आपको योग्यता, कोर्स, प्रवेश प्रक्रिया, सैलरी और नौकरी के अवसरों से जुड़ी बातें बताते हैं

मर्चेंट नेवी भारतीय नौसेना की तरह सैन्य सेवा नहीं बल्कि एक कमर्शियल क्षेत्र है. इसके अधिकारी माल वाहक जहाज का संचालन, नेविगेशन, इंजन सिस्टम, इलेक्ट्रिकल उपकरणों और जहाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं. यह जहाज तेल, कंटेनर, वाहन, खाद्यान्न, रसायन और दूसरे सामान एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाते हैं.

मर्चेंट नेवी भारतीय नौसेना की तरह सैन्य सेवा नहीं बल्कि एक कमर्शियल क्षेत्र है. इसके अधिकारी माल वाहक जहाज का संचालन, नेविगेशन, इंजन सिस्टम, इलेक्ट्रिकल उपकरणों और जहाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं. यह जहाज तेल, कंटेनर, वाहन, खाद्यान्न, रसायन और दूसरे सामान एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाते हैं.

मर्चेंट नेवी में मुख्य रूप से तीन तरह के अधिकारी बनाए जाते हैं. इसमें पहला डेक ऑफिसर होता है, जो जहाज के नेविगेशन रूट प्लानिंग, कार्गो ऑपरेशन और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है. दूसरा मरीन इंजीनियर होता है जो इंजन मशीनरी, जनरेटर और प्रोपल्शन सिस्टम की देखरेख करते हैं. तीसरे इलेक्ट्रो टेक्निकल ऑफिसर होते हैं, जो जहाज के इलेक्ट्रिकल सिस्टम, ऑटोमेशन और कम्युनिकेशन डिवीजन का संचालन करते हैं.

मर्चेंट नेवी में मुख्य रूप से तीन तरह के अधिकारी बनाए जाते हैं. इसमें पहला डेक ऑफिसर होता है, जो जहाज के नेविगेशन रूट प्लानिंग, कार्गो ऑपरेशन और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है. दूसरा मरीन इंजीनियर होता है जो इंजन मशीनरी, जनरेटर और प्रोपल्शन सिस्टम की देखरेख करते हैं. तीसरे इलेक्ट्रो टेक्निकल ऑफिसर होते हैं, जो जहाज के इलेक्ट्रिकल सिस्टम, ऑटोमेशन और कम्युनिकेशन डिवीजन का संचालन करते हैं.

ऑफिसर ट्रेनिंग एंट्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए उम्मीदवार किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथमेटिक्स और अंग्रेजी विषयों के साथ 12वीं पास होना जरूरी है. इसके अलावा संस्थान की ओर से निर्धारित और न्यूनतम अंक, आयु सीमा और मेडिकल फिटनेस की शर्तें भी पूरी करनी होती है.

ऑफिसर ट्रेनिंग एंट्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए उम्मीदवार किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथमेटिक्स और अंग्रेजी विषयों के साथ 12वीं पास होना जरूरी है. इसके अलावा संस्थान की ओर से निर्धारित और न्यूनतम अंक, आयु सीमा और मेडिकल फिटनेस की शर्तें भी पूरी करनी होती है.

मेडिकल जांच में अच्छी नजर, कलर विजन, सुनने की क्षमता और फिजिकल फिटनेस की जांच की जाती है. कॉमर्स और ह्यूमैनिटीज के छात्रों के लिए सीधे ऑफिसर एंट्री प्रोग्राम उपलब्ध नहीं होते हैं.

मेडिकल जांच में अच्छी नजर, कलर विजन, सुनने की क्षमता और फिजिकल फिटनेस की जांच की जाती है. कॉमर्स और ह्यूमैनिटीज के छात्रों के लिए सीधे ऑफिसर एंट्री प्रोग्राम उपलब्ध नहीं होते हैं.

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मर्चेंट नेवी में ऑफिसर बनने के लिए उम्मीदवार को बीएससी नॉटिकल साइंस, डिप्लोमा इन नॉटिकल साइंस, बीई-बीटेक मरीन इंजीनियरिंग, ग्रेजुएट मरीन इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रो टेक्निकल ऑफिसर कोर्स करने होते हैं. यह कोर्स भारतीय समुद्री यूनिवर्सिटी और डीजी शिपिंग से मान्यता प्राप्त संस्थानों में संचालित किए जाते हैं.

मर्चेंट नेवी में ऑफिसर बनने के लिए उम्मीदवार को बीएससी नॉटिकल साइंस, डिप्लोमा इन नॉटिकल साइंस, बीई-बीटेक मरीन इंजीनियरिंग, ग्रेजुएट मरीन इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रो टेक्निकल ऑफिसर कोर्स करने होते हैं. यह कोर्स भारतीय समुद्री यूनिवर्सिटी और डीजी शिपिंग से मान्यता प्राप्त संस्थानों में संचालित किए जाते हैं.

वहीं मर्चेंट नेवी में एडमिशन के लिए ज्यादातर संस्थानों में आईएमयू सीईटी प्रमुख प्रवेश परीक्षा होती है, हालांकि सभी इंस्टीट्यूट में यह अनिवार्य नहीं है. कुछ डीजी शिपिंग से मान्यता प्राप्त प्राइवेट इंस्टीट्यूट अपनी अलग चयन प्रक्रिया या कंपनी स्पॉन्सरशिप टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर भी एडमिशन देते हैं.

वहीं मर्चेंट नेवी में एडमिशन के लिए ज्यादातर संस्थानों में आईएमयू सीईटी प्रमुख प्रवेश परीक्षा होती है, हालांकि सभी इंस्टीट्यूट में यह अनिवार्य नहीं है. कुछ डीजी शिपिंग से मान्यता प्राप्त प्राइवेट इंस्टीट्यूट अपनी अलग चयन प्रक्रिया या कंपनी स्पॉन्सरशिप टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर भी एडमिशन देते हैं.

इसके अलावा एक्सपर्ट्स के अनुसार मर्चेंट नेवी कोर्स में एडमिशन से पहले शिपिंग कंपनी की स्पॉन्सरशिप मिलना काफी जरूरी माना जाता है. स्पॉन्सरशिप के तहत कंपनी लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट के बाद छात्रों का चयन करती है और कोर्स पूरा होने के बाद अनिवार्य ऑन बोर्ड सी ट्रेनिंग का अवसर देती है.

इसके अलावा एक्सपर्ट्स के अनुसार मर्चेंट नेवी कोर्स में एडमिशन से पहले शिपिंग कंपनी की स्पॉन्सरशिप मिलना काफी जरूरी माना जाता है. स्पॉन्सरशिप के तहत कंपनी लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट के बाद छात्रों का चयन करती है और कोर्स पूरा होने के बाद अनिवार्य ऑन बोर्ड सी ट्रेनिंग का अवसर देती है.

मर्चेंट नेवी में शुरुआती स्तर से ही अच्छी सैलरी भी मिलती है, कंपनी, जहाज और एक्सपीरियंस के आधार पर अलग-अलग सैलरी मिलती  है. जैसे डेक कैडेट को लगभग 30 से 80 हजार रुपये स्टाइपेंड मिलता है. वहीं थर्ड ऑफिसर को एक से तीन लाख रुपये प्रतिमाह सैलरी मिलती है. ऐसे ही सेकंड ऑफिसर को दो से चार लाख, चीफ ऑफिसर को चार से आठ लाख रुपये और कैप्टन को 6 से 10 लाख रुपये या इससे ज्यादा प्रति माह सैलरी मिलती है.

मर्चेंट नेवी में शुरुआती स्तर से ही अच्छी सैलरी भी मिलती है, कंपनी, जहाज और एक्सपीरियंस के आधार पर अलग-अलग सैलरी मिलती  है. जैसे डेक कैडेट को लगभग 30 से 80 हजार रुपये स्टाइपेंड मिलता है. वहीं थर्ड ऑफिसर को एक से तीन लाख रुपये प्रतिमाह सैलरी मिलती है. ऐसे ही सेकंड ऑफिसर को दो से चार लाख, चीफ ऑफिसर को चार से आठ लाख रुपये और कैप्टन को 6 से 10 लाख रुपये या इससे ज्यादा प्रति माह सैलरी मिलती है.

Published at : 22 Jul 2026 09:58 PM (IST)

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