UPTET में इस बार लागू होगा नॉर्मलाइजेशन, जानें रिजल्ट पर क्या होगा असर?


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  • इस प्रक्रिया से अभ्यर्थियों के अंक घट-बढ़ सकते हैं.

इस बार यूपी TET2026 की परीक्षा देने जा रहें है तो ये खबर आपके लिए जरुरी हो सकती है. पहली बार UPTET के रिजल्ट में नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला लागू करने जा रहा है. ऐसे में कई अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ सकते हैं, तो कुछ के नंबर कम भी हो सकते हैं. इसका नियम का मकसद सभी अभ्यर्थियों का बराबर का मौका देना है.

2 जुलाई से 4 जुलाई के बीच होगी परीक्षा 

UPTET 2026 का आयोजन 2, 3 और 4 जुलाई को पूरे उत्तर प्रदेश में किया जाएगा.इस बार उम्मीदवारों की संख्या काफी ज्यादा है. इसी वजह से परीक्षा तीन दिन में और हर दिन दो-दो शिफ्ट में कराई जाएगी. यानी कुल 6 शिफ्ट में परीक्षा होगी.जब कोई परीक्षा कई शिफ्ट में आयोजित होती है, तो हर शिफ्ट का प्रश्नपत्र बिल्कुल एक जैसा नहीं हो सकता है. किसी शिफ्ट का पेपर थोड़ा आसान हो सकता है, जबकि किसी का कठिन है. इसी अंतर को खत्म करने के लिए नॉर्मलाइजेशन का इस्तेमाल किया जाता है.

क्या होता है नॉर्मलाइजेशन

नॉर्मलाइजेशन एक गणितीय प्रक्रिया  है. इस प्रक्रिया का इस्तेमाल उन परीक्षाओं में किया जाता है.जो कई शिफ्ट में आयोजित होती हैं. इस बार UPTET में पहली बार नॉर्मलाइजेशन लागू किया जा रहा है.इस प्रक्रिया को लागू करने की बजह  परीक्षा का  अलग-अलग शिफ्टों में होना है.

UPESSC का मानना है कि जब परीक्षा कई पालियों में आयोजित होगी,और सभी उम्मीदवारों को सामान अवसर मिले. इसी कारण सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और अन्य बड़ी भर्ती परीक्षाओं में अपनाई जा रही व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है.

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क्या रिजल्ट आने पर नंबर बदल सकते हैं?

इस प्रक्रिया में कुछ उम्मीदवारों के नंबर पहले से कम हो सकते हैं. कुछ उम्मीदवारों के नंबर बढ़ भी सकते हैं.अंतिम रिजल्ट नॉर्मलाइजेशन के बाद तैयार किया जाएगा. इसलिए केवल आंसर-की के आधार पर अपनी रैंक या चयन का अनुमान लगाना सही नहीं होगा.

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किन उम्मीदवारों को  मिलेगा मौका?

अगर किसी उम्मीदवार का पेपर वाकी शिफ्ट की तुलना में कठिन था तो उनको  इस नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का फायदा मिल सकता है. ऐसे उम्मीदवारों के अंक बढ़ सकते हैं ताकि कठिन पेपर का नुकसान उन्हें न उठाना पड़े.

किन उम्मीदवारों के नंबर घट सकते हैं?

अगर किसी शिफ्ट का प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान था और उसमें बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने अच्छे अंक हासिल किए हैं, तो नॉर्मलाइजेशन के बाद ऐसे उम्मीदवारों के अंक कुछ कम हो सकते हैं. हालांकि यह कटौती मनमाने तरीके से नहीं होती. इसके लिए तय नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है. इस प्रक्रिया के दौरान कई उम्मीदवारों के अंक पहले जैसे ही रह सकते हैं. वहीं कुछ के नंबर थोड़ा बढ़ या घट सकते हैं.

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