विदेश में पढ़ाई का क्रेज घटा? कैंब्रिज छात्रों का भारत में UG करने का रुझान बढ़ा
कैंब्रिज इंटरनेशनल एजुकेशन की ओर से जारी सर्वे में 49 देशों के 404 स्कूलों को शामिल किया गया और करीब 24,637 छात्रों तक पहुंच बनाई गई. भारत के 112 स्कूलों ने सर्वे में हिस्सा लिया. रिपोर्ट के अनुसार भारत में छात्रों के उच्च शिक्षा के लिए देश में रुकने का बढ़ता रुझान महज किसी एक साल की परिस्थितियों का नतीजा नहीं है, बल्कि इससे एक स्ट्रक्चरल शिफ्ट के तौर पर भी देखा जा रहा है.

कैंब्रिज इंटरनेशनल एजुकेशन के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर रॉड स्मिथ के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में वैल्यू को देखने का तरीका बदल रहा है. अब छात्र केवल डिग्री की कीमत को देखकर फैसला नहीं कर रहे, बल्कि शिक्षा से लेकर रोजगार और लंबे समय में मिलने वाले अवसरों तक पूरे रास्ते को ध्यान में रख रहे हैं.

इसी वजह से कई भारतीय परिवार विदेश में पढ़ाई का ऑप्शन पूरी तरह छोड़ नहीं रहे, बल्कि उसे आगे के लिए टाल रहे हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि छात्रों के लिए भारत से ग्रेजुएशन करने के बाद विदेश से मास्टर्स करना एक पसंदीदा रास्ता बनता जा रहा है. यानी पहले जो स्कूल के बाद सीधे विदेश से बैचलर डिग्री लेने का चलन था, वहीं अब छात्र पहले भारत की यूनिवर्सिटी में पढ़ाई और उसके बाद विदेश से मास्टर्स करने का ऑप्शन तलाश रहे हैं.

रिपोर्ट में भारत को लेकर एक अहम बात कही गई है कि देश अपना ही सबसे बड़ा कंपिटीटर बन रहा है. भारतीय यूनिवर्सिटी अब केवल उन छात्रों का ऑप्शन नहीं है, जो विदेश की पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते या वहां एडमिशन नहीं ले सकते. कई छात्र इन्हें अपनी पहली पसंद के तौर पर भी चुन रहे हैं.

सर्वे में शामिल स्कूलों ने इसके पीछे भारतीय हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में हो रहे बदलाव को प्रमुख कारणों में गिनाया. बेहतर क्वालिटी वाले प्राइवेट और इंटरडिसिप्लिनरी इंस्टीट्यूट भारत में विदेशी यूनिवर्सिटी के ब्रांच कैंपस और अंतरराष्ट्रीय प्रोग्राम की पढ़ाई बढ़ती स्वीकार्यता ने छात्रों के लिए देश में रहकर पढ़ाई करना आसान बना दिया है.

कैंब्रिज के प्रोग्राम में छात्रों को अलग-अलग विषयों को एक साथ पढ़ने की सुविधा मिलती है. उदाहरण के तौर पर गणित के साथ अर्थशास्त्र, कंप्यूटर साइंस के साथ फिजिक्स जैसे सब्जेक्ट शामिल किए जाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार भारतीय यूनिवर्सिटी में भी अब डेटा साइंस, बिजनेस एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्र में इस तरह के मल्टी डिसीप्लिनरी ऑप्शन बढ़ रहे हैं. ऐसे में छात्रों को कई ऐसे अकेडमिक ऑप्शन देश में ही मिलने लगे हैं, जिनके लिए पहले उन्हें विदेश जाना पड़ता था.

भारत में अंडर ग्रेजुएट पढ़ाई का रोजगार बढ़ने के बावजूद छात्रों की विदेश में पढ़ाई करने की इच्छा खत्म नहीं हुई है. रॉड स्मिथ के अनुसार भारतीय छात्रों ने अपनी विदेश में पढ़ाई की इच्छा नहीं छोड़ी है. भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश का काउंसलर ने भी सर्वे में बताया कि छात्र स्थानीय स्तर पर ग्रेजुएशन को विदेश में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए एक कदम के तौर पर देख रहे हैं.
Published at : 01 Sep 2026 08:51 AM (IST)