Schools will teach parents to recognize changing behavior in children


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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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स्कूलों में बच्चों के व्यवहार में बदलाव, एंग्जायटी को पहचानने के लिए पैरेंट्स को ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही सोशल मीडिया के जोखिम, गेमिंग एडिक्शन व स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट पर गाइडेंस दी जाएगी।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शिक्षा की पारंपरिक परिभाषा को बदलते हुए क्रांतिकारी कदम उठाया है। सत्र 2026-27 के लिए बोर्ड ने अपना नया ‘पैरेंटिंग कैलेंडर’ लॉन्च किया है, जिसका मकसद अभिभावकों को पीटीएम (पैरेंट-टीचर मीटिंग) के महज औपचारिक दर्शक से बदलकर बच्चे के विकास में एक ‘सक्रिय भागीदार’ बनाना है। यह पहल नई शिक्षा नीति के उस विजन का हिस्सा है, जहां पढ़ाई का मतलब सिर्फ रटना और बेहतर अंक लाना नहीं, बल्कि बच्चे का मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास भी है। जानिए महत्वपूर्ण पहलू…

सपोर्ट ग्रुप बनाएंगे ताकि पैरेंट्स एक-दूसरे से सीख सकें, बच्चों के लिए इवेंट्स भी

कैलेंडर में पहली बार उन मुद्दों को स्कूल सिस्टम का हिस्सा बनाया गया है, जिन्हें अब तक ‘घर का मुद्दा’ माना जाता था। बच्चों के व्यवहार में बदलाव, एंग्जायटी को पहचानने के लिए पैरेंट्स को ट्रेनिंग दी जाएगी। एनसीबी के साथ नशे के खिलाफ जागरूकता के लिए अध्याय जोड़ा गया है। सोशल मीडिया के जोखिम, गेमिंग एडिक्शन व स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट पर गाइडेंस दी जाएगी।

नर्सरी से 12वीं तक हर उम्र के लिए अलग नुस्खा

’सीबीएसई ने इस कैलेंडर को बच्चों की उम्र के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है।

बाल वाटिका(नर्सरी से छोटी क्लास) – यहां फोकस बच्चे की आदतों, भावनात्मक विकास और स्क्रीन टाइम पर होगा।

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मिडिल क्लास – दोस्ती के प्रति रुझान, डिजिटल व्यवहार पर चर्चा होगी।

सीनियर क्लास – 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए कॅरिअर की चिंता, बोर्ड परीक्षा का तनाव और लाइफ स्किल्स को प्राथमिकता दी गई है।

पैरेंट्स से व्यवस्थित संवाद – ​स्कूलों में सिर्फ पीटीएम नहीं बल्कि व्यवस्थित संवाद होगा। नियमित वर्कशॉप में पैरेंट्स बच्चों का व्यवहार व मानसिक स्थिति समझना सीखेंगे। अनुभव साझा करने के लिए सपोर्ट ग्रुप बनेंगे। प्रोजेक्ट्स, ओपन हाउस जैसे इवेंट्स से पैरेंट्स व बच्यों के बीच ‘ऑफलाइन जुड़ाव’ बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

समस्या सुलझाने पर जोर – बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया स्क्रीन एडिक्शन व कॅरिअर का दबाव बच्चों को अकेला कर रहा है। ऐसे में स्कूल, टीचर और पैरेंट्स के बीच तालमेल जरूरी है। कैलेंडर से यह संदेश देने की कोशिश है कि जरूरत पड़ने पर तुरंत पैरेंट्स टोचर मीटिंग बुलाई जाए, ताकि समस्या को गंभीर होने से पहले सुलझाया जा सके।

‘4 आर’ का सिद्धांत – नया कैलेंडर ‘4आर’ के सिद्धांत पर बनाया गया है, जो माता-पिता व बच्चों के रिश्ते को नई गहराई देगा।

रिफ्लेक्शन – परवरिश के तरीकों पर विचार करना ।

रीइंफोर्समेंट – सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देना ।

रिलेशनशिप – पैरेंट्स व बच्चे के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत करना।

रिजॉइसिंग – बच्चे की छोटी-छोटी उपलब्धियों और साथ बिताए पलों का जश्न मनाना।



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