RTE के नियमों पर मौसम और त्योहारों की मार, स्कूलों के सामने आई नई चुनौती
देश भर के स्कूलों के सामने अब एकेडमिक दिनों को पूरा करने की चुनौती बढ़ती जा रही है. एक तरफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत स्कूलों के लिए न्यूनतम कार्य दिवस तय है, वहीं दूसरी ओर मौसम की मार, सर्दी-गर्मी की छुट्टियां, भारी बारिश और अलग-अलग राज्यों में होने वाले त्योहार स्कूलों के शैक्षणिक कैलेंडर को प्रभावित कर रहे हैं. ऐसे में स्कूलों को निर्धारित कार्य दिवस पूरे करने और छात्रों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है.
आरटीई के लिए तहत कितने कार्य दिवस जरूरी
आरटीई एक्ट के अनुसार प्राथमिक कक्षाओं यानी कक्षा 1 से 5 तक के लिए शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 200 कार्य दिवस जरूरी है. वहीं कक्षा 6 से 8 तक के लिए 220 कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं. हालांकि पूरे साल इन दिनों को बनाए रखना स्कूलों के लिए आसान नहीं है. मौसमी छुट्टियां, खराब मौसम, सार्वजनिक अवकाश और स्थानीय त्योहारों के कारण कई बार स्कूलों को तय समय से अलग छुट्टी घोषित करनी पड़ती है. इसका सीधा असर स्कूल के एकेडमी कैलेंडर पर पड़ता है.
बारिश ने बढ़ाई स्कूलों की परेशानी
हाल के दिनों में लगातार बारिश के कारण कई जगह पर स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया है. गाजियाबाद में लगातार बारिश के चलते स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया गया है. वहीं गुरुग्राम के कुछ स्कूलों ने भी बारिश और जलभराव की आशंका को देखते हुए एक दिन के लिए ऑनलाइन कक्षा चलाने का फैसला किया. बारिश और खराब मौसम के कारण छात्रों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो सकता है, ऐसे में कई राज्यों और जिलों में स्थानीय प्रशासन और परिस्थितियों के अनुसार स्कूल बंद करने का फैसला लेना पड़ता है.
आईएमडी के अलर्ट से बढ़ी चुनौती
मौसम से थोड़ी परेशानियां सिर्फ बारिश तक सीमित नहीं है. गर्मी की लहर, बाढ़ और खराब वायु गुणवत्ता के कारण भी अलग-अलग समय पर स्कूलों को अप्रत्याशित छुट्टियां देनी पड़ती है. इस दौरान दिल्ली-एनसीआर, केरल, मध्य प्रदेश, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों के लिए मौसमी संबंधी अलर्ट जारी किए गए हैं. भारी बारिश की स्थिति में छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए शैक्षणिक संस्थाओं के लिए छुट्टी घोषित करना जरूरी हो सकता है. ऐसी परिस्थितियों में स्कूलों के सामने तय किए गए शिक्षण कार्य दिवस को पूरा करने की चुनौती रहती है. छुट्टियों के कारण कम हुए दिनों की भरपाई के लिए स्कूलों को अपना शेड्यूल बदलना, काम के घंटे बढ़ाना या एकेडमिक प्लान में संशोधन करना पड़ सकता है.
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गर्मी और सर्दी की छुट्टियां भी बड़ा कारण
देश के कई हिस्सों में गर्मियों की छुट्टियां स्कूल कैलेंडर का जरूरी हिस्सा है. खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहां तापमान काफी बढ़ जाता है. छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए गर्मी की छुट्टियां बढ़ानी पड़ सकती है. इस तरह उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान कड़ाके की ठंड, कोहरे और खराब मौसम के कारण विंटर वेकेशन को आगे बढ़ाने की स्थिति बनती है. ऐसे फैसलों से भी स्कूलों के पास उपलब्ध शिक्षण दिवस कम हो सकते हैं.
त्योहारों के कारण भी बदलता है एकेडमिक कैलेंडर
भारत में अलग-अलग राज्य और क्षेत्र में मनाए जाने वाले त्योहार भी स्कूलों के कैलेंडर को प्रभावित करते हैं. स्थानीय परंपराओं और त्योहारों को देखते हुए कई जगह स्कूलों में छुट्टियां घोषित की जाती हैं. उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कांवड़ यात्रा के चलते स्कूलों को 12 अगस्त तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं तेलंगाना में बोनालु और नाग पंचमी के कारण इस महीने करीब 10 दिन तक स्कूल बंद रखने की संभावना बताई गई है. इन छुट्टियों का उद्देश्य छात्रों और परिवारों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सुविधा देना है, लेकिन इसका असर स्कूलों की उपलब्ध एकेडमिक दिनों पर भी पड़ता है.
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