RPSC APO Recruitment SC Order


सुप्रीम कोर्ट ने सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) भर्ती-2024 मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की अपील को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती के लिए आवेदन की लास्ट डेट तक अभ्यर्थी के पास लॉ की डिग्री होना जरूरी है। अगर कोई कैंडिडेट बिन

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इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें फाइनल ईयर के छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी।

दरअसल, RPSC ने 7 मार्च 2024 को APO के 181 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें लॉ ग्रेजुएट की डिग्री अनिवार्य योग्यता रखी गई थी। हालांकि, कई ऐसे अभ्यर्थियों ने भी आवेदन कर दिया था, जिनकी डिग्री आवेदन की अंतिम तिथि तक पूरी नहीं हुई थी।

बाद में आयोग ने स्पष्ट किया था कि जिन अभ्यर्थियों के पास आवेदन की लास्ट डेट तक आवश्यक योग्यता नहीं है, वे अपने आवेदन वापस ले लें। इस निर्णय को अभ्यर्थियों ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की एकल और खंडपीठ ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला देते हुए कहा था कि यदि परीक्षा की तिथि तक डिग्री प्राप्त हो जाती है, तो उन्हें पात्र माना जा सकता है।

मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 15 जनवरी 2025 को फैसला दिया जबकि डबल बैंच ने 12 अगस्त 25 को फैसला सुनाया। इस फैसले के खिलाफ RPSC ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) भर्ती-2024 एग्जाम के दौरान पहुंचे अभ्यर्थी।

​सुप्रीम कोर्ट ने ये की टिप्पणी

  • न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि राजस्थान अभियोजन अधीनस्थ सेवा नियम, 1978 के नियम 12 से वह प्रावधान अक्टूबर 2002 में ही हटा दिया गया था, जो अंतिम वर्ष के छात्रों को आवेदन की छूट देता था।
  • अदालत ने माना कि विज्ञापन की भाषा बिल्कुल स्पष्ट थी, जिसके अनुसार योग्यता का आंकलन आवेदन के समय उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही किया जाता है। न्यायालय ने कहा कि यदि इंटरव्यू तक योग्यता हासिल करने की छूट दी गई, तो इससे चयन प्रक्रिया में अनिश्चितता आएगी और आयोग पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ पड़ेगा।
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अपात्र कैंडिडेट्स नहीं हो सकेंगे एग्जाम में शामिल आयोग सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि ​इस फैसले के बाद अब केवल वही अभ्यर्थी सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती में सम्मिलित रहेंगे, जिनके पास आवेदन की अंतिम तिथि तक विधि स्नातक की डिग्री उपलब्ध थी। न्यायालय ने उच्च न्यायालय के एकल एवं खंडपीठ के उन आदेशों को निरस्त कर दिया है, जिसने अपात्र अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी थी।

बतादें, 181 पदों के लिए आयोग को 52 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। इसका प्री एग्जाम 19 जनवरी 2025 को हुआ और मुख्य एग्जाम 1 जून 2025 को हुआ था। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई को यह फैसला सुनाया, RPSC की ओर से आज सुबह यह जानकारी पोर्टल पर सर्कुलेट की गई है।

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