Physics की आंसर शीट मांगी तो पहला पन्ना छोड़कर मिली दूसरे की कॉपी, CBSE में कॉपी कांड?


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  • छात्र को फिजिक्स में कम अंक, री-इवैल्यूएशन में दूसरी कॉपी मिली.
  • पहली कॉपी छात्र की, बाकी पन्नों की लिखावट अलग निकली.
  • परिवार ने अन्य विषयों की कॉपियों में समान लिखावट पाई.
  • सीबीएसई ने शिकायत की जांच का आश्वासन दिया है.

CBSE बोर्ड परीक्षा के नतीजे आने के बाद एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने छात्रों और अभिभावकों दोनों को हैरान कर दिया है. एक छात्र ने जब री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत अपनी फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी मंगवाई, तो उसे देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. छात्र का दावा है कि जो कॉपी उसे भेजी गई है, वह उसकी है ही नहीं.

यह पूरा मामला अब सोशल मीडिया से लेकर शिक्षा जगत तक चर्चा का विषय बन चुका है. छात्र और उसका परिवार इसे गंभीर गड़बड़ी बता रहा है, जबकि CBSE ने शिकायत की जांच का भरोसा दिया है.

आखिर क्या है पूरा मामला?

कक्षा 12 के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने के बाद अपने अंकों को लेकर सवाल उठाया. छात्र के अनुसार उसे फिजिक्स में उम्मीद से काफी कम अंक मिले थे. इसके बाद परिवार ने CBSE की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत आंसर कॉपी की स्कैन कॉपी मांगी. कुछ दिन बाद जब कॉपियां ऑनलाइन उपलब्ध कराई गईं, तब परिवार ने उन्हें ध्यान से देखना शुरू किया. लेकिन फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका देखते ही सभी हैरान रह गए.

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परिवार का दावा है कि उत्तर पुस्तिका का पहला पन्ना, जिस पर रोल नंबर और अन्य जानकारी दर्ज है, छात्र का दिखाई देता है. लेकिन उसके बाद के पन्नों की लिखावट पूरी तरह अलग है. छात्र का आरोप है कि बाकी उत्तर किसी और छात्र द्वारा लिखे गए हैं.

परिवार ने दिखाए कई सवाल

ABP News से बातचीत में छात्र, उसके पिता और बड़े भाई ने अपनी चिंता जाहिर की. परिवार का कहना है कि उन्होंने सिर्फ फिजिक्स ही नहीं, बल्कि मैथ्स, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की उत्तर पुस्तिकाएं भी मंगवाई थीं.

दिलचस्प बात यह है कि बाकी सभी विषयों की कॉपियों में लिखावट एक जैसी दिखाई देती है, लेकिन फिजिक्स की कॉपी में लिखावट पूरी तरह अलग नजर आती है. इसी वजह से परिवार को संदेह हुआ कि कहीं कोई बड़ी गड़बड़ी तो नहीं हुई. छात्र के पिता का कहना है कि अगर कॉपी ही उनके बेटे की नहीं है तो सिर्फ री-चेकिंग कराने का कोई फायदा नहीं होगा. उनका आरोप है कि मामला सामान्य गलती से कहीं ज्यादा गंभीर लगता है.

बाकी विषयों में अच्छे नंबर, फिजिक्स में झटका?

केमिस्ट्री – 91 अंक
कंप्यूटर साइंस – 91 अंक
फिजिकल एजुकेशन – 91 अंक
इंग्लिश – 86 अंक
फिजिक्स – 65 अंक

क्या कहते हैं परिवार के लोग

परिवार का कहना है कि फिजिक्स में मिले अंकों ने छात्र का कुल प्रतिशत प्रभावित किया. छात्र के बड़े भाई का दावा है कि कम प्रतिशत के कारण वेदांत कुछ महत्वपूर्ण अवसरों से भी वंचित रह गया. उनके अनुसार, बेहतर अंक होने पर छात्र JEE और Army Technical Entry Scheme जैसी प्रक्रियाओं में बेहतर स्थिति में हो सकता था.

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सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी

वेदांत श्रीवास्तव ने अपनी परेशानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा की. उन्होंने लिखा कि कम अंक मिलने के बाद उन्होंने उत्तर पुस्तिका की कॉपी मंगवाई थी, लेकिन जो फिजिक्स की कॉपी उन्हें मिली, वह उनकी नहीं निकली. पोस्ट सामने आने के बाद लोगों ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी. कई छात्रों और अभिभावकों ने भी बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए.

क्या है नया सिस्टम?

CBSE की परीक्षाओं में OSM (ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम) एक आधुनिक डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था है. इस प्रक्रिया में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को पहले स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में बदला जाता है. इसके बाद परीक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर उत्तर पुस्तिकाओं को देखकर जांच करते हैं और सीधे ऑनलाइन सिस्टम में अंक दर्ज करते हैं. इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जाती है.

अब CBSE ने क्या कहा?

मामले के सामने आने के बाद CBSE अधिकारियों ने छात्र को सलाह दी है कि वह री-इवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा खुलने का इंतजार करे और उसी पोर्टल के माध्यम से औपचारिक शिकायत दर्ज करे. बोर्ड अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया है कि छात्र की शिकायत की पूरी जांच की जाएगी. फिलहाल CBSE की ओर से यह नहीं कहा गया है कि उत्तर पुस्तिका में कोई गलती हुई है, लेकिन शिकायत मिलने के बाद जांच का भरोसा जरूर दिया गया है.

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