NEET UG Result 2026: नीट टॉपर आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल दोनों को मिले 715 नंबर, फिर क्यों मिली AIR-1 और AIR-2?


NEET UG Re Exam 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद इस बार सबसे ज्यादा चर्चा पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल को लेकर हो रही है. दोनों अभ्यर्थियों ने परीक्षा में 720 में से 715 हासिल किए हैं, जो इस साल का हाईएस्ट स्कोर रहा. इसके बावजूद दोनों की रैंक अलग-अलग है. एनटीए की मेरिट लिस्ट में आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 मिला.

ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि जब दोनों के अंक समान हैं तो रैंक अलग-अलग कैसे हो गई? तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि नीट टॉपर आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल के 715-715 अंक आए फिर दोनों रैंक-1 और रंक-2 कैसे मिली और इसे लेकर एनटीए के ट्राई ब्रेकिंग नियम क्या बने हैं. 

क्या है एनटीए का ट्राई ब्रेकिंग नियम?

अगर दो छात्रों के कुल अंक बराबर होते तो सबसे पहले बायोलॉजी यानी बॉटनी और जूलॉजी के अंक देखे जाते हैं. जिन उम्मीदवारों के बायोलॉजी में अधिक अंक होते हैं, उसे बेहतर रैंक दी जाती है. मेडिकल प्रवेश परीक्षा होने के कारण इस विषय को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है. अगर बायोलॉजी के अंक भी समान हो तो अगला चरण केमिस्ट्री के अंकों का होता है, इसमें भी बराबरी रहने पर फिजिक्स के अंक देखे जाते हैं. अगर तीनों विषयों में भी अंक समान निकले तो फिर यह देखा जाता है कि दोनों उम्मीदवारों ने सही और गलत उत्तरों का अनुपात कैसा रखा है, जिस उम्मीदवार ने कम गलत उत्तर दिए होते हैं या जिसका गलत उत्तरों का अनुपात कम होता है, उसे ऊपर की रैंक मिलती है. अगर इन सभी चरणों के बाद भी बराबरी बनी रहती है, तो एक स्वतंत्र एक्सपर्ट समिति की निगरानी में रैंडम प्रक्रिया के जरिए अंतिम रैंक तय की जाती है.

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आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल के मामले में क्या हुआ? 

दोनों उम्मीदवारों ने कुल 715 अंक प्राप्त किए, लेकिन उनकी विषयवार परफॉर्मेंस पूरी तरह सामान नहीं थी. एनटीए के टाई ब्रेकिंग नियम के अनुसार जिस उम्मीदवार का प्रदर्शन पहले तुलना वाले चरण में बेहतर पाया गया, उसे मेरिट लिस्ट में ऊपर स्थान मिला. इस प्रक्रिया के तहत आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 दिया गया. हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में दोनों को संयुक्त टॉपर बताया गया था, क्योंकि दोनों के अंक समान थे लेकिन आधिकारिक मेरिट लिस्ट में रैंक एनटीए के तय नियमों के अनुसार जारी की गई. 

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काउंसलिंग में क्यों अहम है एक रैंक का अंतर?

नीट में टॉप रैंक पर एक या दो स्थान का अंतर भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. एम्स दिल्ली, एमएएमसी और दूसरे प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में सीटें सीमित होती है. ऐसे में काउंसलिंग के दौरान केवल अंक नहीं, बल्कि ऑल इंडिया रैंक के आधार पर सीटें आवंटित की जाती है. इसलिए समान अंक होने के बावजूद बेहतर रैंक वाले उम्मीदवार को पहले सीट चुनने का अवसर मिलता है. 

पहले उम्र से टूटता था टाई, अब नियम बदल चुके हैं 

पहले नीट में टाई की स्थिति बनने पर ज्यादा उम्र वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाती थी. बाद में इस नियम को लेकर विवाद हुआ और इसे हटा दिया गया. इसके बाद आवेदन संख्या जैसे मानदंड भी समाप्त कर दिए गए, अब एनटीए केवल विषयवार अंकों और सही गलत उत्तरों के अनुपात के आधार पर ही टाई का समाधान करता है.

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