NCERT Emergency 1975-77 । Class 9th Social Science Book syllabus NEP 2020


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नई दिल्ली21 मिनट पहले

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तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 मई 1975 को देश में इमरजेंसी की घोषणा की थी।

NCERT यानी नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में 1975-77 की इमरजेंसी को शामिल किया है।

नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में इमरजेंसी को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, NCERT के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि कक्षा 9 की किताब में पहली बार इमरजेंसी पर अलग सेक्शन जोड़ा गया है।

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब देश ने हाल ही में इमरजेंसी लागू होने के 50 साल पूरे होने को याद किया है।

किताब में लिखा- इंदिरा सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ी

किताब में लिखा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी। बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई।

किताब के अनुसार, इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुस्तक में कहा गया है कि इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और लोगों की स्वतंत्रता सीमित हो गई।

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जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र

25 जून 1975 को नई दिल्ली में रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते जयप्रकाश नारायण।

25 जून 1975 को नई दिल्ली में रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते जयप्रकाश नारायण।

किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया और बिहार तथा गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए।

पुस्तक के मुताबिक, 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद आम चुनाव कराए गए। जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय दी और सत्तारूढ़ सरकार चुनाव हार गई। किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है।

लोकतंत्र के सामने दूसरी चुनौतियां भी शामिल

इमरजेंसी के अलावा किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद दूसरी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। इनमें फेक न्यूज, गलत सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता शामिल हैं।

NCERT ने पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का नया सेक्शन भी जोड़ा है। इसका मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका समझाना है।

लोकतांत्रिक परंपराओं और मीडिया पर जोर

  • किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी खास फोकस किया गया है। इसमें बताया गया है कि भारत में लोकतांत्रिक सोच और भागीदारी की परंपरा काफी पुरानी है।
  • मीडिया की भूमिका पर भी एक अलग सेक्शन दिया गया है। किताब में मीडिया को लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ बताया गया है और कहा गया है कि यह जनता की आवाज उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है।
  • भारतीय लोकतंत्र के आकार को समझाने के लिए किताब में चुनावी आंकड़े भी दिए गए हैं। इसके अनुसार, 2024 में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर्स थे। साथ ही देशभर में फैले मतदान केंद्रों के नेटवर्क का भी जिक्र किया गया है।
  • किताब में स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र के उदाहरण भी शामिल किए गए हैं। इसमें गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिला-अनुकूल पंचायत का जिक्र है। महिलाओं के मतदान अधिकार और स्थानीय निकायों में आरक्षण पर भी अलग सेक्शन दिया गया है।
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