Government Exams: एक एग्जाम कैंसिल करने पर सरकार को कितना होता है नुकसान? जानें डिटेल्स


Cost Of Conducting Government Exams: हर साल देश में लाखों छात्र सरकारी नौकरियों और बड़े एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी में दिन-रात एक कर देते हैं. हाल के वर्षों में पेपर लीक या प्रशासनिक कमियों के कारण जब भी कोई बड़ी परीक्षा रद्द होती है, तो जनता का ध्यान छात्रों की परेशानी पर जाता है. लेकिन पर्दे के पीछे, इस पूरी प्रक्रिया को दोबारा आयोजित करने में सरकार को करोड़ों रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. आइए समझते हैं कि एक एग्जाम रद्द होने से सरकार को कितना नुकसान उठाना पड़ता है. 

एग्जाम कराने में ही खर्च होते हैं करोड़ों रुपये

किसी भी बड़े लेवल के एग्जाम को कराने में शुरुआत से ही भारी खर्च आता है. परीक्षा केंद्र बुक करना, पेपर छपवाना और सुरक्षित तरीके से हर सेंटर तक पहुंचाना, इनविजिलेटर और स्टाफ की सैलरी, सीसीटीवी और सुरक्षा इंतजाम, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, ट्रांसपोर्ट और ऑनलाइन सर्वर जैसी चीजों पर एजेंसी को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं. जब यही एग्जाम पेपर लीक या धांधली की वजह से कैंसिल हो जाता है, तो यह पूरा खर्च बेकार चला जाता है. 

NTA ने 2018 से अब तक परीक्षाओं पर कुल 3,064 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. हालांकि, NEET जैसे एग्जाम के लिए  NTA महंगा आवेदन शुल्क वसूलती है. इससे उसे 1,000 करोड़ रुपये तक कमाई हो जाती है. लेकिन खर्च भी उतना ही भारी होता है. उसे प्रिंटिंग और परिवहन के इंतजाम करवाने में ही करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ जाते हैं.

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दोबारा एग्जाम कराने का डबल खर्च

इन सब इंतजामों के बाद अगर एग्जाम कैंसल हो जाती है तो फिर सबसे बड़ी दिक्कत उसे दोबारा कराने की होती है, यानी वही पूरी प्रक्रिया, वही खर्च दोबारा. नए सिरे से सेंटर बुक करना, स्टाफ की सैलरी, सुरक्षा व्यवस्था और पेपर सेट करना, यह सब दोबारा करना पड़ता है. कई बार दोबारा एग्जाम सिर्फ कुछ हजार छात्रों के लिए ही सीमित सेंटरों पर होता है, फिर भी उस पर अलग से बड़ी रकम खर्च होती है.

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सरकार को कितना होता है नुकसान?

अगर एक अनुमानित आंकड़े की बात करें, तो राष्ट्रीय स्तर की किसी बड़ी परीक्षा जैसे NEET, NET, या रेलवे-एसएससी, जिसमें 10 लाख से 25 लाख तक छात्र बैठते हैं, उसे कराने का शुरुआती खर्च 50 करोड़ से लेकर 150 करोड़ रुपये तक आ सकता है. यदि यह परीक्षा कैंसिल होती है, तो यह पूरी राशि पानी में मिल जाती है. दोबारा परीक्षा कराने के लिए सरकार को बजट से फिर से उतनी ही बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है. इससे सरकार को 250 से 300 करोड़ तक तक का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.  

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