First RBI Governor: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया RBI के पहले गवर्नर कौन थे, उन्हें कितनी मिलती थी सैलरी?


First RBI Governor: जब भी भारत की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम की बात होती है, तो Reserve Bank of India यानी RBI का नाम सबसे पहले आता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि RBI का पहला गवर्नर न तो भारतीय था और न ही ब्रिटिश? यह बात काफी लोगों के लिए चौंकाने वाली हो सकती है. आज जब भारतीय रिजर्व बैंक देश की अर्थव्यवस्था का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, वही बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि इसके पहले गवर्नर एक ऑस्ट्रेलिया के बैंकर थे. उन्होंने उस समय यह जिम्मेदारी संभाली, जब भारत में बैंकिंग सिस्टम धीरे-धीरे विकसित हो रहा था. 

RBI के पहले गवर्नर कौन थे?

RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई थी. उस समय इसके पहले गवर्नर के रूप में सर ओसबोर्न स्मिथ को नियुक्त किया गया था. सर स्मिथ का जन्म 26 दिसंबर 1876 को ऑस्ट्रेलिया में हुआ था. वे शुरू से ही बैंकिंग के काम से जुड़े थे. उन्होंने करीब 20 साल तक बैंक ऑफ न्यू साउथ वेल्स में काम किया और फिर 10 साल तक कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया में अपनी सेवाएं दीं. साल 1926 में वे भारत आए थे. यहां उन्हें इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का मैनेजिंग गवर्नर बनाया गया, उस समय इंपीरियल बैंक देश की सबसे बड़ी बैंकिंग संस्था में से एक मानी जाती थी. उनके काम की सराहना केवल भारत में ही नहीं, बल्कि ब्रिटिश शासन में भी हुई. मार्च 1929 में उन्हें ‘नाइट’ की उपाधि दी गई. हालांकि उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं रहा. उन्होंने 1935 से 1937 तक RBI के गवर्नर के रूप में काम किया. बताया जाता है कि कुछ नीतिगत मतभेदों के कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

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कितनी मिलती थी सैलरी?

अगर सैलरी की बात करें तो उस समय RBI के गवर्नर को करीब 20,000 रुपये प्रति माह वेतन मिलता था. आज के समय के हिसाब से यह रकम उस समय काफी बड़ी मानी जाती थी. उस दौर में इतनी सैलरी बहुत ही कम लोगों को मिलती थी. यह दिखाता है कि उस समय भी RBI गवर्नर का पद कितना महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरा हुआ करता था. सैलरी के अलावा उन्हें अन्य सुविधाएं भी दी जाती थीं, जैसे रहने की व्यवस्था, आधिकारिक गाड़ी, स्टाफ और अन्य जरूरी सुविधाएं शामिल थीं, जो इस पद की गरिमा को दर्शाती थीं.

कार्यकाल और उससे जुड़े अहम पहलू

सर ओसबोर्न स्मिथ का कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं रहा, लेकिन जितने समय तक वे RBI के गवर्नर रहे, उन्होंने कई महत्वपूर्ण काम किए. उस समय भारत में बैंकिंग व्यवस्था नई थी, इसलिए उसे सही दिशा देना बहुत जरूरी था. स्मिथ ने बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया, ताकि लोग बैंकों पर भरोसा कर सकें और आर्थिक व्यवस्था ठीक से चल सके. इसके साथ ही उन्होंने देश की मुद्रा यानी पैसे की व्यवस्था को स्थिर रखने की कोशिश की. उस दौर में आर्थिक हालात आसान नहीं थे, इसलिए सही फैसले लेना बहुत जरूरी था. उन्होंने ऐसे कदम उठाए, जिनसे बैंकिंग और वित्तीय सिस्टम को सही तरीके से खडा किया जा सके. 
हालांकि ब्रिटिश सरकार के साथ कुछ मुद्दों पर असहमति होने के कारण उन्होंने पद छोड दिया. उनके बाद जेम्स ब्रैड टेलर को RBI का अगला गवर्नर बनाया गया.

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RBI का महत्व और आज की स्थिति

आज RBI भारत की अर्थव्यवस्था का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. इसे देश की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ भी कहा जाता है, क्योंकि यह पैसे से जुडे बड़े फैसले लेता है. RBI ही तय करता है कि देश में ब्याज दर क्या होगी, महंगाई को कैसे कंट्रोल किया जाएगा और बाजार में पैसे का प्रवाह कितना होना चाहिए. इसके साथ ही RBI देश के सभी बैंकों पर नजर रखता है और उन्हें नियमों के अनुसार चलने के लिए निर्देश देता है. अगर कोई बैंक नियमों का पालन नहीं करता, तो RBI उसके खिलाफ कार्रवाई भी कर सकता है. इसके अलावा RBI आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है. जब देश में आर्थिक उतार चढ़ाव आता है, तब RBI अपनी नीतियों के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश करता है.

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