DUSU की छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे ये नेता, देखें पूरी लिस्ट
डीयू में चुनाव के दौरान छात्र संगठन फीस, पढ़ाई, हॉस्टल, सुरक्षा और कैंपस से जुड़ी सुविधाओं जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं. इसी प्रक्रिया में कई युवाओं को संगठन चलाने और छात्रों के बीच काम करने और सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी बात रखने का शुरुआती अनुभव दिया. यही वजह है कि डूसू के पुराने चुनाव और उनसे जुड़े नेताओं की चर्चा आज भी होती है.

डीयू की छात्रा राजनीति से राष्ट्रीय राजनीतिक पहचान बनाने वाले नेताओं में सबसे चर्चित नाम अरुण जेटली कर रहा है. एसआरसीसी में पढ़ाई के दौरान वह छात्र राजनीति में सक्रिय हुए और 1974 में एबीवीपी के टिकट पर डीयू अध्यक्ष चुने गए. आपातकाल के दौरान छात्र आंदोलन में भी उनकी भूमिका रही. बाद में उन्होंने केंद्र सरकार में वित्त और रक्षा मंत्री सहित कई अहम जिम्मेदारियां संभाली.

वहीं कांग्रेस नेता अजय माकन ने भी छात्र राजनीति से शुरुआत की. 1985 में एनएसयूआई के उम्मीदवार के तौर पर वह डूसू अध्यक्ष बने. इसके बाद उन्होंने दिल्ली की राजनीति में काम किया और दिल्ली सरकार में मंत्री रहे. केंद्र में यूपीए सरकार के दौरान खेल एवं युवा मामले तथा आवास एवं शहरी गरीब उन्मूलन मंत्रालय के जिम्मेदारी भी उनके पास रही.

विजय गोयल का नाम भी इस कड़ी में आता है. 1977-78 में एबीवीपी की ओर से डूसू अध्यक्ष रहे गोयल ने आपातकाल के दौरान छात्र आंदोलन में हिस्सा लिया. आगे चलकर वह लोकसभा पहुंचे और केंद्र सरकार में मंत्री तथा राज्य मंत्री रहे.

इन नेताओं के अलावा दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का शुरुआती राजनीतिक अनुभव भी डीयू से जुड़ा है. दौलत राम कॉलेज की छात्रा रहते हुए वह 1996-97 में एबीवीपी की ओर से डूसू अध्यक्ष बनी थी. छात्र राजनीति के बाद उन्होंने भाजपा संगठन और दिल्ली की स्थानीय राजनीति में काम किया और बाद में मुख्यमंत्री बनी.

डूसू ने और कई महिला नेताओं को भी राजनीतिक मंच दिया है. 1995 में एनएसयूआई की ओर से अध्यक्ष चुनी गई अलका लांबा बाद में दिल्ली की चांदनी चौक विधानसभा सीट से विधायक बनी. वहीं वह वर्तमान में ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. वहीं रागिनी नायक और अमृता धवन भी डूसू अध्यक्ष रह चुकी है. रागिनी नायक 2005-06 में और अमृता धवन 2006-07 में एनएसयूआई की ओर से अध्यक्ष चुनी गई थी. दोनों ने आगे कांग्रेस की राजनीति में जिम्मेदारियां संभाल ली. अमृता बहारी भी 2007-08 अध्यक्ष रही हैं.

डीयू की छात्र राजनीति से आगे बढ़ाने वाले वालों में विजेंद्र गुप्ता का नाम भी शामिल है. वह डीयू के उपाध्यक्ष रहे और दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हुए वह दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं. वहीं आशीष सूद 1988-89 में एबीवीपी की ओर से डूसू अध्यक्ष रहे. आगे चलकर वह भाजपा की राजनीति में सक्रिय हुए.

इसके अलावा राजीव गोस्वामी, अनिल झा विजय जौली सुधांशु मित्तल और नूपुर शर्मा भी डूसू से जुड़े प्रमुख नाम है. राजीव गोस्वामी 1991 में निर्दलीय अध्यक्ष रहे, जबकि अनिल झा 1997-98 और विजय जोली 1980-81 में अध्यक्ष रहे. सुधांशु मित्तल 1981-82 में डूसू अध्यक्ष रहे और नूपुर शर्मा 2008-09 में एबीवीपी की ओर सह सचिव चुनी गई थी

डूसू का इतिहास 1954 के में पहले चुनाव से शुरू हुआ यूनिवर्सिटी की और के रिकॉर्ड के अनुसार 1947 में ही छात्रों के लिए यूनिवर्सिटी स्तर पर एक प्रतिनिधि संगठन बनाने पर विचार सामने आया इसके बाद 9 अप्रैल 1949 को दूसरों का औपचारिक उद्घाटन हुआ

हालांकि संगठन बनने के कुछ साल बाद जाकर चुनाव हुए. 1954 में पहली बार डूसू चुनाव कराया गया और गजराज बहादुर नागर पहले अध्यक्ष चुने गए. बाद में वह हरियाणा विधानसभा के सदस्य बने और राज्य सरकार में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री की जिम्मेदारी संभाली.
Published at : 19 Sep 2026 09:58 AM (IST)