DU Advisory Controversy | Professors Demand Removal Of Post On X
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2 मिनट पहले
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डीयू अकादमिक परिषद की बैठक में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर जारी एडवाइजरी पर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की बैठक में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर यूनिवर्सिटी की ओर से जारी एडवाइजरी का मुद्दा उठा। जीरो आवर के दौरान कई प्रोफेसरों ने इस एडवाइजरी का विरोध किया।
शिक्षकों ने बताया हद से आगे बढ़ने वाला बयान
शिक्षकों ने कहा कि डीयू की ओर से जारी बयान हद से आगे बढ़ने वाला है और इसे तुरंत एक्स से हटाया जाना चाहिए। शिक्षकों के मुताबिक एडवाइजरी में यह मान लिया गया है कि छात्र आसानी से बहकाए जा सकते हैं।
शिक्षकों ने कहा कि छात्रों की दुनिया को सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं किया जा सकता। कुछ शिक्षकों ने यह भी सवाल उठाया कि यूनिवर्सिटी को छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को निहित स्वार्थों का नतीजा बताकर किसी एक पक्ष की भूमिका में नहीं आना चाहिए।
शिक्षकों के अनुसार, इस तरह की एडवाइजरी से यूनिवर्सिटी की छवि खराब होती है। वहीं, यूनिवर्सिटी ने अपने फैसले का बचाव किया। यूनिवर्सिटी का कहना है कि छात्रों को गुमराह किया जा रहा है।

यूनिवर्सिटी ने कहा एडवाइजरी में नहीं होगा बदलाव
यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी की गई एडवाइजरी में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
Dear students and faculty, your safety matters to us. Please note that any unlawful assemblies or demonstrations at Jantar Mantar, New Delhi, which are strictly regulated as per the directives of the Hon’ble Supreme Court of India, may invite legal action. Such activities can…— University of Delhi (@UnivofDelhi) July 23, 2026

विरोध प्रदर्शन पर डीयू ने जारी की एडवाइजरी
राजधानी दिल्ली में NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने छात्रों और टीचर्स के लिए एडवाइजरी जारी की है। विश्वविद्यालय ने जंतर-मंतर पर होने वाले धरना-प्रदर्शनों से दूर रहने की अपील करते हुए कहा है कि ऐसे आयोजनों में शामिल होने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
डीयू का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल छात्रों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि उनके एजुकेशनल रिकॉर्ड और भविष्य के करियर पर भी असर डाल सकती हैं। साथ ही छात्रों को सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक और फर्जी खबरों से भी सतर्क रहने की सलाह दी।

इस आंदोलन में सक्रिय छात्र संगठनों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF), कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न DU कॉलेजों के स्वतंत्र छात्र समूह शामिल हैं।
AdvisoryAll stakeholders of JNU’s epistemic community are advised to act responsibly and prioritize their personal safety. In accordance with the Hon’ble Supreme Court of India’s directions on public demonstrations, you are requested to refrain from participating in or visiting…— Jawaharlal Nehru University (JNU) (@JNU_official_50) July 24, 2026

JNU की एडवाइजरी : व्यक्तिगत सुरक्षा को प्राथमिकता दें
जेएनयू की ओर से ट्विटर पर कहा गया कि सभी सदस्यों को सलाह दी जाती है कि वे जिम्मेदारी से काम लें और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को प्राथमिकता दें। सार्वजनिक प्रदर्शनों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, आपसे अनुरोध है कि आप नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर या उसके आस-पास होने वाली सभाओं में शामिल होने या वहा जाने से बचें।
साथ ही सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से व्यवहार करें और शैक्षणिक जिम्मेदारी और जिम्मेदार नागरिकता के मूल्यों को बनाए रखें।

राहुल गांधी ने की एडवाइजरी की आलोचना
लोकसभा में राहुल गांधी ने उस एडवाइजरी की कड़ी आलोचना की जिसमें छात्रों से जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों से दूर रहने को कहा गया। कांग्रेस नेता ने यूनिवर्सिटी पर आरोप लगाया कि वह छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए धमका रही है।
How dare you threaten students for exercising their democratic rights?Please note, you are the ones that will be held accountable when the time comes. https://t.co/Mx6D19SP5h— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 24, 2026

DU की एडवाइजरी पर प्रतिक्रिया देते हुए गांधी ने ट्विटर पर लिखा, छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए धमकाने की हिम्मत कैसे हुई? ध्यान रहे, जब समय आएगा तो आप ही जवाबदेह होंगे।
This is utterly appalling. Even in the days of the JP Movement leading up to the Emergency, there was no bar by the @UnivofDelhi on students joining any of his protests, and a couple of members of my Union Cabinet at St Stephen’s, including the late Chandan Mitra, openly did so.… https://t.co/tIz94j0KPx— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) July 24, 2026

शशि थरूर ने जताई नाराजगी
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने एडवाइजारी जारी करने पर डीयू की आलोचना की है। डीयू की तरफ से जारी इस एडवाइजरी पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि यह बहुत ही चौंकाने वाली बात है। इमरजेंसी से पहले जेपी आंदोलन के दिनों में भी, दिल्ली यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स को किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से नहीं रोका था। उस दौरान सेंट स्टीफंस में उनकी यूनियन कैबिनेट के कुछ सदस्यों ने, जिनमें स्वर्गीय चंदन मित्रा भी शामिल थे, खुलेआम प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
थरूर ने कहा है कि अगर भारत की प्रमुख सरकारी यूनिवर्सिटी से एक को अपने स्टूडेंट्स और फैकल्टी को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर गंभीर नतीजों की धमकी देने की इजाज़त दी जाती है, तो इसका लोकतांत्रिक बातचीत और अभिव्यक्ति की आजादी पर बुरा असर पड़ता है।
थरूर ने कहा है कि DU के अधिकांश छात्र इतने साधन-संपन्न नहीं होते कि वे ऐसी सख्त चेतावनी को इग्नोर कर सकें। उन्हें डर रहता है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से उनके एकेडमिक या प्रोफेशनल भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
थरूर ने कहा है कि यूनिवर्सिटी का मकसद मुद्दों पर आलोचनात्मक सोच और स्वतंत्र मूल्यांकन सिखाना होता है, न कि इन गुणों को दबाना।
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