DU में हिंदी को प्राथमिकता, अब दो भाषाओं में तैयार होंगे जरूरी डॉक्यूमेंट्स; जानिए इसके फायदे और नुकसान 


DU Hindi Policy: डीयू ने यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े कॉलेजों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. यूनिवर्सिटी के कुलसचिव की ओर से सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, कॉलेज प्राचार्य, निदेशकों और अधिकारियों को विस्तृत सर्कुलर जारी किया गया है. इसमें भारत सरकार के राजभाषा अधिनियम 1963 और राजभाषा नियम 1976 के प्रभावी पालन के निर्देश दिए गए हैं. नए निर्देशों के तहत यूनिवर्सिटी के सभी प्रमुख डॉक्यूमेंट अब हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार किए जाएंगे, जिनमें हिंदी को प्राथमिक स्थान दिया जाएगा. इसके साथ ही कार्यालय कामकाज, वेबसाइट और पत्राचार में भी हिंदी के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया है. 

डॉक्यूमेंट में होगा बदलाव

सर्कुलर के अनुसार यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े सभी संस्थानों में नोटिस बोर्ड सूचना बुलेटिन, फाइल कवर, रबर स्टैंप, पहचान पत्र, प्रोस्पेक्टस, लाइब्रेरी कार्ड, बैनर, होर्डिंग, निमंत्रण पत्र और लिफाफे पर लिखे एड्रेस सभी प्रमुख दस्तावेज हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार किए जाएंगे. इनमें हिंदी पहले और अंग्रेजी बाद में समान फॉन्ट साइज में लिखी जाएगी. इसके अलावा राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के तहत जारी होने वाले आदेश, अधिसूचनाएं, ज्ञापन, नियम, निविदाएं, अनुबंध, प्रशासनिक रिपोर्ट और प्रेस विज्ञप्तियां भी दोनों भाषाओं में जारी की जाएगी. 

हिंदी में ही होगा ज्यादा कार्यालयी काम 

यूनिवर्सिटी ने निर्देश दिए हैं कि हिंदी में प्राप्त होने वाले पत्रों का उत्तर अनिवार्य रूप से हिंदी में दिया जाएगा. क और ख क्षेत्र से आने वाले पत्रों के साथ-साथ केंद्र सरकार के कार्यालय से अंग्रेजी में प्राप्त पत्रों के उत्तर भी हिंदी में देने पर जोर दिया गया है. कार्यालय में यूनिकोड के माध्यम से हिंदी टंकण को बढ़ावा देने, सेवा पुस्तिकाओं और अभिलेखों में हिंदी में प्रविष्टियां करने और सभी रजिस्टरों के शीर्षक दोनों भाषाओं में रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा सर्कुलर के अनुसार डीयू की वेबसाइट डिफॉल्ट रूप से हिंदी में खुलेगी, हालांकि अन्य भाषाओं का भी ऑप्शन रहेगा. वहीं जर्नल और मानक संदर्भ पुस्तकों को छोड़कर पुस्तकालय अनुदान का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा हिंदी पुस्तकों, अनुवाद संबंधी साहित्य की खरीद और हिंदी डिजिटल सामग्री पर खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं.

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नियमों के पालन नहीं करने पर देनी होगी जवाबदेही 

यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है की राजभाषा से जुड़े निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी. अगर इन नियमों की अनदेखी की होती है तो संबंधित अधिकारी स्वयं इसके लिए जवाबदेह होंगे. वहीं अरविंदो कॉलेज के हिंदी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर हंसराज सुमन ने इस पहल का स्वागत किया है. उनका कहना है कि हर कॉलेज में हिंदी सप्ताह और हिंदी पखवाड़ा आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़े. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि हिंदी पत्रकारिता, रंगमंच, फिल्म, रेडियो जॉकी, ब्लॉग लेखन, सोशल मीडिया और हिंदी शिक्षण जैसे विषयों पर इंटर कॉलेज प्रतियोगिताएं आयोजित की जाए, जिससे हिंदी को रोजगार के अवसरों से भी जोड़ा जा सके. 

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डीयू में हिंदी को प्राथमिकता के फायदें 

  • एक्सपर्ट्स के अनुसार डीयू में हिंदी को प्राथमिकता देने से छात्रों और कर्मचारियों को हिंदी में डॉक्यूमेंट उपलब्ध होंगे.
  • हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाएं ज्यादा आसान हो सकती है.
  • सरकारी राजभाषा नीति का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा.
  • कार्यालय में हिंदी के प्रयोग और डिजिटल हिंदी को बढ़ावा मिलेगा.
  • हिंदी को बढ़ावा मिलने से छात्रों की दूसरे हिंदी आधारित क्षेत्रों में रुचि बढ़ेगी. 

क्या हो सकते हैं इसके नुकसान

  • डीयू में हिंदी को बढ़ावा देने से सभी डॉक्यूमेंट्स को दो भाषाओं में तैयार करने से प्रशासन का काम बढ़ सकता है.
  • डॉक्यूमेंट के नियमित अपडेट में ज्यादा समय और संसाधनों की आवश्यकता पड़ सकती है.
  • अगर अनुवाद की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो दोनों भाषाओं के संस्करण में अंतर हो सकता है. 
  • वेबसाइट, रिकॉर्ड और दूसरी डिजिटल सामग्री को दोनों भाषा में रखने से भी प्रशासनिक काम बढ़ेंगे.
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