Dainik Bhaskar series Antim Artificial intelligence Career


नई दिल्ली15 मिनट पहले

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, AI शॉर्ट-टर्म कोर्स जॉब के लिए काफी नहीं हैं।

देश में आने वाली कुल जॉब वैकेंसी में करीब 14% में सीधे तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI स्किल की मांग की जा रही है और यह रफ्तार लगातार बढ़ रही है।

यही वजह है कि AI से जुड़े कोर्स की बाढ़ आ गई है। मगर नैसकॉम और इंडीड की संयुक्त रीस्किलिंग व टेक हायरिंग रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट में चल रहे करीब 70% कोर्स सिर्फ ‘धोखा’ दे रहे हैं।

दरअसल, कंपनियों के पास 4 साल की डिग्री का इंतजार करने का समय नहीं है, इसलिए वे उन्हें तुरंत हायर कर रही हैं जो 3-6 महीने के फास्टट्रैक कोर्स के जरिए इन विशिष्ट भूमिकाओं के लिए तैयार होकर आ रहे हैं।

हालांकि, रिपोर्ट्स यह चेतावनी भी देती हैं कि सिर्फ सर्टिफिकेट बेचने वाले फर्जी बूटकैंप्स से बचें। बाजार केवल उसी फास्ट-ट्रैक कोर्स को तवज्जो दे रहा है, जिसके अंत में छात्र के पास 3 से 4 लाइव, डिप्लॉयड पब्लिक प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो मौजूद हो।

सवाल: AI इतनी तेज सीख रहा, ये कोर्स ‘बेकार’ नहीं हो जाएंगे

इसे दो हिस्सों में समझें-

पहला: टूल-बेस्ड स्किल्स (अल्पकालिक): ‘चैटजीपीटी’ सिखाने वाले कोर्स की प्रासंगिकता 6 महीने भी नहीं रहेगी। AI खुद ये काम आसान बना देगा।

दूसरा: कोर प्रिंसिपल्स (दीर्घकालिक): डेटा लिटरेसी, एथिकल AI, प्रॉब्लम फ्रेमिंग और AI सिस्टम डायरेक्शन जैसे बुनियादी सिद्धांत सिखाने वाले कोर्स लंबे समय (3-5 साल+) तक प्रासंगिक रहेंगे।

दैनिक भास्कर ने ‘100% जॉब गारंटी’ के दावों में छिपी शर्तें को लेकर इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन (ISF) की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुचिता दत्ता से बात की। उनसे कुछ सवाल किए, जिनके जवाब उन्होंने दिए

  1. शॉर्ट-टर्म कोर्स जॉब के लिए काफी हैं?बिल्कुल नहीं। बाजार उन्हें पुरस्कृत करता है, जिसके पास पारंपरिक डिग्री के बुनियादी आधार के साथ-साथ व्यावहारिक AI की समझ और लाइव प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो हो।
  2. ‘100% जॉब गारंटी’ के दावे सही हैं?ऐसे दावों में न्यूनतम वेतन (अक्सर 3-4 लाख रु. सालाना), अनिवार्य उपस्थिति और रीलोकेशन जैसी कड़ी शर्तें छिपी होती हैं। कई कोर्सेज में पुराना पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है।
  3. क्या AI स्किल्स जानने वालों को वेतन में कोई विशेष लाभ मिल रहा है?हां, बाजार में AI स्किल्स की भारी डिमांड है। डेटा के अनुसार, जिन नौकरियों में AI कौशल की मांग की जाती है, वहां मिलने वाला औसत वेतन प्रीमियम पिछले वर्ष के 25% से बढ़कर अब सीधे 56% हो चुका है।
  4. जेनेरेटिव AI, एलएलएम इंजीनियरिंग और MLOps में सैलरी का क्या ट्रेंड है?इन आधुनिक क्षेत्रों में असली प्रीमियम स्किल्स और लाइव प्रोजेक्ट को मिलता है। बाजार में जेनेरेटिव AI, एलएलएम इंजीनियरिंग और MLOps की भूमिकाएं मिड-लेवल पर लगभग 18-35 लाख सालाना पैकेज दे रहीं।
  5. कौन-सी जॉब ज्यादा प्रभावित हो रहीं?अनुमानों के मुताबिक, AI शुरुआती स्तर की भूमिकाओं को 20 से 25% तक कम कर रहा है। एंट्री लेवल की नियुक्तियों में महीने-दर-महीने 23% और साल-दर-साल 44% की गिरावट दर्ज की गई है। इसमें सबसे ज्यादा असर रूटीन सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, बेसिक कस्टमर सपोर्ट और जूनियर-कोडिंग जैसे कामों पर पड़ रहा है। आईएमएफ के अनुसार, भारत के 26% कार्यबल पर जनरेटिव AI का प्रभाव पड़ रहा है, जिसमें से 12% पर सीधे नौकरी जाने का खतरा है। जून 2026 में भारत की टेक हायरिंग 28 महीने के निचले स्तर पर आ गई।
  6. इंटरव्यू का तरीका कैसे बदल गया?अब कोडिंग टेस्ट नहीं होते हैं। समस्या को समझने, निर्णय लेने की क्षमता व सही प्रॉम्प्ट देने की योग्यता देखते हैं।
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AI सीखने-समझने की शुरुआत AI for Everyone से करें

किसी महंगे या भारी-भरकम कोडिंग कोर्स में सीधे पैसा और समय लगाने की जल्दबाजी न करें। पहले ‘AI साक्षरता’ और ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग’ को मजबूत करें। सबसे पहला कोर्स जो आपको अभी से शुरू करना चाहिए-

कोर्स का नाम : ‘AI for Everyone’ (एंड्रयू एनजी)

कहां उपलब्ध : Coursera (फ्री है, अगर सर्टिफिकेट चाहिए तो ही पैसे लगते हैं। इसमें सर्टिफिकेट लेना ज्यादा जरूरी नहीं है)

समय: मात्र 6 से 10 घंटे।

क्यों जरूरी है: AI की दुनिया के सबसे बड़े गुरु एंड्रयू एनजी का यह कोर्स आपको बिना किसी कोडिंग के यह सिखाएगा कि AI वास्तव में काम कैसे करता है? न्यूरल नेटवर्क क्या हैं? और आप अपने दैनिक काम या बिजनेस में AI के अवसरों को कैसे पहचान सकते हैं? यह आपकी नींव (फाउंडेशन) तैयार कर देगा।

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देश में आईटी, कानून, कॉमर्स,ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर शुरू हो चुका है। AI के टूल्स ने उन कामों को या तो खत्म कर दिया है या बेहद सिकोड़ दिया है, जिनके लिए लाखों छात्र हर साल डिग्रियां लेते हैं। एचआर कंपनी टीमलीज का कहना है कि 40% कंपनियां ‘हाइब्रिड स्किल’ यानी डिग्री के साथ AI टूल्स की जानकारी को अनिवार्य मानती हैं। नैस्कॉम की 2024 की रिपोर्ट कहती है कि देश में 82% बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…

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