CBSE Three-Language Policy New Guidelines


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नई दिल्ली9 घंटे पहले

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CBSE ने सोमवार को थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर नई गाइडलाइन जारी की। इसके मुताबिक, इस साल 10वीं में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी।

7वीं, 8वीं और 9वीं के वे छात्र, जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी वही भाषाएं जारी रख सकेंगे। हालांकि, उन्हें इसके साथ एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी। इन छात्रों को 10वीं में आने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। CBSE के इस फैसले से 50 लाख छात्र-छात्राओं को राहत मिली है।

पहले थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के बारे में जानें

CBSE की नई गाइडलाइन का सब कुछ जो आपका जानना जरूरी-

  • वर्तमान कक्षा 10: सत्र 2026-27 के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। छात्र पहले की तरह केवल दो भाषाओं के साथ ही बोर्ड परीक्षा देंगे। तीसरी भाषा न पढ़नी होगी और न ही उसकी बोर्ड परीक्षा देनी होगी।
  • वर्तमान कक्षा 9 : इस बैच के छात्रों को 3 भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम 2 भारतीय भाषाएं जरूरी होंगी। हालांकि, जब ये छात्र अगले साल क्लास 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा।
  • वर्तमान कक्षा 7 और 8: इन छात्रों के लिए भी यही व्यवस्था रहेगी। तीसरी भाषा पढ़नी होगी, लेकिन 10वीं बोर्ड में उसकी परीक्षा नहीं होगी। मूल्यांकन स्कूल करेगा।
  • वर्तमान कक्षा 6: यही पहला बैच होगा, जिस पर थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पूरी तरह लागू होगी। इन छात्रों को कक्षा छह से 3 भाषाएं पढ़नी होंगी और जब ये कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी।
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इन छात्रों को मिलेगी छूट

  • दिव्यांग छात्रों को कानून के अनुसार तीसरी भाषा की अनिवार्यता से छूट मिलेगी।
  • विदेशों में स्थित CBSE स्कूलों और विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को भी भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा।
  • यदि किसी छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में तबादला हो जाता है, तो छात्र पहले से चुने गए भाषाएं को जारी रख सकेगा।

बोर्ड ने 15 मई को सर्कुलर जारी किया, पैरेंट्स सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। इसका विरोध शुरू हो गया। स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स के 19 लोगों के एक ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इस पर सुनवाई जारी है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये फैसला CBSE के पहले के फैसले से बिल्कुल उलट है। सीबीएसई ने 9 अप्रैल को साफ कहा था कि तीसरी भाषा वाला नियम (R3) 9वीं क्लास के छात्रों पर 2029-30 सत्र तक लागू नहीं होगा।

34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 लाई गई

नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे पिछली नीति 1986 में बनाई गई थी, जिसे 1992 में अपडेट किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि छात्र व्यावहारिक ज्ञान मिले और वे स्किल सीखें।

नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए केंद्र ने 2030 तक का लक्ष्य रखा है। शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों का अधिकार होता है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि राज्य सरकारें इसे पूरी तरह अप्लाई करें। टकराव होने पर दोनों पक्षों को आम सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया गया है।

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CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में 19 लोगों के एक ग्रुप ने चुनौती दी। इनमें स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स शामिल हैं।

ये याचिका क्लास 9वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू किए जाने के विरोध दायर की गई। इसके खिलाफ SC अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…

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