मेडिकल कॉलेजों को राहत, सरकार ने बदले नियम; एमबीबीएस सीटें बढ़ाने का रास्ता साफ


देश में डॉक्टरों की कमी की बात अक्सर सुनने को मिलती है. हर साल लाखों छात्र नीट पास करते हैं, लेकिन सीमित सीटों की वजह से बहुत से छात्रों का सपना अधूरा रह जाता है. अब इस तस्वीर में बड़ा बदलाव दिख सकता है. नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), नई दिल्ली ने ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन-2023 में अहम संशोधन की अधिसूचना जारी की है. इस फैसले के बाद देशभर में एमबीबीएस सीटें बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है.

रिपोर्ट्स की मानें तो इन बदलावों से मेडिकल कॉलेजों का विस्तार आसान होगा और नई संस्थाएं खोलने में भी सुविधा मिलेगी. सबसे बड़ी बात यह है कि जो सीमाएं पहले मेडिकल कॉलेजों पर लागू थीं, अब उन्हें काफी हद तक हटा दिया गया है. पहले किसी भी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटें बढ़ाने की अधिकतम सीमा 150 सीटों तक तय थी. यानी चाहे कॉलेज के पास बेहतर भवन हो, अस्पताल हो, स्टाफ हो, फिर भी वह 150 से ज्यादा सीटों के लिए आवेदन नहीं कर सकता था. अब यह सीमा पूरी तरह हटा दी गई है.

इसका मतलब है कि जिन मेडिकल कॉलेजों के पास अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधन हैं, वे अपनी क्षमता के अनुसार ज्यादा सीटों के लिए आवेदन कर सकेंगे. पहले एक और शर्त थी कि 10 लाख की आबादी पर अधिकतम 100 एमबीबीएस सीटों की अनुमति होगी. यह नियम भी अब हटा दिया गया है. यानी अब सीटों की संख्या का किसी क्षेत्र की आबादी से सीधा संबंध नहीं रहेगा. इससे उन इलाकों में भी मेडिकल कॉलेजों के विस्तार का मौका मिलेगा, जहां पहले आबादी के नियम की वजह से सीटें नहीं बढ़ाई जा सकती थीं.

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अस्पताल की दूरी का नियम बदला

पहले मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े अस्पताल के बीच यात्रा का समय 30 मिनट से ज्यादा नहीं होना चाहिए था. इस नियम के कारण कई संस्थान अटक जाते थे, क्योंकि ट्रैफिक या दूरी के कारण यह समय सीमा पूरी करना मुश्किल हो जाता था. अब इस नियम को बदलकर दूरी तय कर दी गई है. नए नियम के अनुसार, कॉलेज और अस्पताल के बीच अधिकतम 10 किलोमीटर की दूरी होनी चाहिए. वहीं पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह सीमा 15 किलोमीटर रखी गई है.

छात्रों के लिए बड़ी राहत

एमबीबीएस सीटें बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा छात्रों को मिलेगा. हर साल बड़ी संख्या में छात्र नीट परीक्षा पास करते हैं, लेकिन सीटें कम होने की वजह से उन्हें दूसरे कोर्स चुनने पड़ते हैं या विदेश जाना पड़ता है. अब सीटें बढ़ने से ज्यादा छात्रों को देश में ही मेडिकल पढ़ाई का मौका मिल सकेगा.

मेडिकल शिक्षा में नई दिशा

NMC का यह फैसला मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा माना जा रहा है. इससे न केवल कॉलेजों को फायदा होगा, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और पूरे स्वास्थ्य तंत्र को भी लाभ मिलेगा.

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