IIT की नौकरी छोड़ किया स्टार्टअप, दो छात्राओं ने डेयरी सेक्टर में खड़ी की 565 करोड़ की कंपनी
Published at : 25 Jul 2026 10:10 AM (IST)
नीतू यादव और कीर्ति जांगड़ा की मुलाकात आईआईटी दिल्ली में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान हुई थी. दोनों कॉलेज में रूममेट थी और शुरुआत से ही कुछ अलग करने की सोच रखती थी. पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने कॉरपोरेट सेक्टर में अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन अपना कुछ बनाने का सपना हमेशा बना रहा.

नीतू ने पहले एक कंपनी में टेक्नोलॉजी एनालिस्ट के तौर पर काम किया और बाद में प्रोडक्ट मैनेजर बनी. वहीं कीर्ती ने भी एक दूसरी कंपनी में काम किया अच्छी नौकरी के बावजूद दोनों ने अपनी एक अलग राह चुनने का फैसला किया.

2019 में दोनों ने डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को करीब से समझना शुरू किया. इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि देश में लगभग हर चीज ऑनलाइन खरीदी और बेची जा रही है, लेकिन पशुओं की खरीद-बिक्री अब भी स्थानीय दलालों, पारंपरिक बाजारों और आपसी जान-पहचान पर निर्भर है. किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही खरीदार, विक्रेता तक पहुंचने, पशु की सही कीमत तय करने और भरोसेमंद जानकारी हासिल करने की थी. इसी समस्या को हल करने के लिए दोनों ने डिजिटल प्लेटफार्म बनाने का फैसला लिया

Animall की शुरुआत 2019 में एक छोटे से वीकेंड प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी. इसका उद्देश्य किसानों के लिए ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार करना था जहां वे आसानी से गाय और भैंस खरीद-बेच सके. हालांकि शुरुआत आसान नहीं थी, सबसे बड़ी चुनौती किसानों का भरोसा जीतना था. इसके लिए दोनों छात्राओं ने गांव में जाकर किसानों की जरूरत को समझा और ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया, जिसे पहली बार इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति भी आसानी से चला सके. धीरे-धीरे किसानों का भरोसा बढ़ा और प्लेटफार्म का इस्तेमाल करने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ती गई.

Animall ने केवल पशु की खरीद-बिक्री तक खुद को सीमित नहीं रखा, समय के साथ प्लेटफार्म पर पशु स्वास्थ्य, आर्टिफिशियल इन्सेमिनेशन और डेयरी किसानों से जुड़ी दूसरी सेवाएं भी जोड़ी गई, ताकि किसानों को एक ही जगह कई सुविधा मिल सके.

नीतू और कीर्ति का उद्देश्य तकनीक को केवल शहरों तक सीमित रखने की बजाय ग्रामीण भारत तक पहुंचाना था, जिससे किसान अपनी आजीविका से जुड़े फैसले बेहतर तरीके से ले सकें.

छोटे स्तर पर शुरू हुआ या स्टार्टअप समय के साथ तेजी से बढ़ता गया. वहीं निवेशकों का भरोसा मिलने के बाद कंपनी ने अपने कारोबार का विस्तार किया. सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार फंडिंग के बाद Animall की वैल्यूएशन करीब 565 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. कंपनी के अनुसार प्लेटफार्म पर 1.8 लाख से ज्यादा पशु बिक्री के लिए लिस्टेड है, जबकि 10 लाख से ज्यादा खरीदार और विक्रेता इस ऐप के माध्यम से एक दूसरे से जुड़ चुके हैं.

नीतू यादव और कीर्ति जांगड़ा ने कृषि डेयरी या पशुपालन की पढ़ाई नहीं की थी, उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल की. लेकिन आईआईटी में सीखी गई समस्या को पहचानने और उसके समाधान तैयार करने की क्षमता ने उन्हें बिल्कुल अलग क्षेत्र में सफल बनने में मदद की.
Published at : 25 Jul 2026 10:10 AM (IST)