H-1B Visa Fee Hike : H-1B वीजा की फीस कई गुना बढ़ी, भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाना कितना मुश्किल हुआ?


H-1B Visa Fee Hike : अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए हालात पहले की तुलना में काफी मुश्किल होते दिखाई दे रहे हैं. H-1B वीजा से जुड़े नियमों में हुए बड़े बदलावों का असर अब साफ नजर आने लगा है. वीजा फीस में भारी बढ़ोतरी, आवेदन प्रक्रिया में बदलाव और रिन्यूअल से जुड़ी मुश्किलों ने कई लोगों की चिंता बढ़ा दी है.

इसका सबसे बड़ा संकेत H-1B वीजा के लिए आने वाले आवेदनों में आई बड़ी गिरावट है. कई भारतीय प्रोफेशनल्स को वीजा इंटरव्यू के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कुछ लोगों का वीजा रिन्यू नहीं होने की वजह से नौकरी भी चली गई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि H-1B वीजा की फीस बढ़ने से भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाना कितना मुश्किल हुआ. 

H-1B वीजा की फीस कई गुना बढ़ी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा के नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है. सबसे बड़ा बदलाव वीजा फीस में किया गया है. पहले H-1B वीजा की फीस 1,000 डॉलर (करीब 85 हजार रुपये) थी, जिसे बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर (करीब 85 लाख रुपये) कर दिया गया है. ऐसे में फीस में लगभग 100 गुना बढ़ोतरी की गई है.

फीस बढ़ने के बाद 1.32 लाख कम हुए आवेदन

वीजा फीस बढ़ने का असर सीधे H-1B आवेदन संख्या पर देखने को मिला है. साल 2027 के लिए H-1B वीजा लॉटरी में केवल 2,11,600 भारतीय प्रोफेशनल्स ने आवेदन किया है. जबकि 2026 के लिए यह संख्या 343981 थी, इस बार करीब 1.32 लाख आवेदन कम आए हैं. 

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H-1B वीजा लॉटरी के नियम भी बदले

अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग ने 15 जुलाई को बताया कि अब H-1B वीजा लॉटरी के लिए नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. इसके साथ ही इस साल से लॉटरी प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है. पहले H-1B वीजा के लिए साल में दो बार लॉटरी निकाली जाती थी, लेकिन अब केवल एक बार ही लॉटरी होगी. 

जुलाई में होता है H-1B वीजा का रिन्यूअल

अमेरिका में H-1B वीजा का रिन्यूअल जुलाई महीने में होता है. इस बार कई भारतीय प्रोफेशनल्स अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. वीजा रिन्यूअल में आ रही दिक्कतों की वजह से कई लोगों की नौकरी और करियर पर असर पड़ रहा है. 

भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाना कितना मुश्किल हुआ?

H-1B वीजा नियमों में हुए बदलावों के बाद भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाकर काम करना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है. सबसे बड़ी वजह H-1B वीजा फीस का 1,000 डॉलर (करीब 85 हजार रुपये) से बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर (करीब 85 लाख रुपये) किया जाना है. इसका असर आवेदन संख्या पर भी दिखा है. इसके अलावा अब H-1B वीजा के लिए साल में सिर्फ एक बार लॉटरी होगी, जबकि पहले दो बार मौका मिलता था. कई भारतीय प्रोफेशनल्स को वीजा इंटरव्यू के लिए 10 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं कुछ लोगों का वीजा रिन्यू नहीं होने से उनकी नौकरी भी चली गई है. ऐसे में बढ़ी हुई लागत, सख्त नियम और लंबी प्रक्रिया ने भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में नौकरी हासिल करना और वहां टिके रहना पहले की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना दिया है. 

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H-1B वीजा पाने वालों में सबसे ज्यादा भारतीय

पिछले पांच सालों के आंकड़ों के अनुसार, H-1B वीजा हासिल करने वालों में हर 10 में से करीब 7 लोग भारतीय रहे हैं. साल 2021 में भारतीयों की हिस्सेदारी 74 प्रतिशत थी, जो 2022 और 2023 में 73 प्रतिशत रही. इसके बाद 2024 में यह घटकर 71 प्रतिशत और 2025 में 70 प्रतिशत हो गई. हालांकि प्रतिशत में हल्की गिरावट आई है, लेकिन H-1B वीजा पाने वालों में भारतीय अब भी सबसे बड़ा समूह बने हुए हैं. 

किन कंपनियों ने सबसे ज्यादा H-1B वीजा हासिल किए

आंकड़ों के मुताबिक, H-1B वीजा हासिल करने के मामले में बड़ी टेक कंपनियां सबसे आगे हैं. सबसे ज्यादा 14,532 H-1B वीजा अमेजन के हिस्से आए. इसके बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को 5,293, माइक्रोसॉफ्ट को 4,863, मेटा को 4,740, एपल को 4,610 और गूगल को 4,509 H-1B वीजा मिले.  अमेरिकी और वैश्विक टेक कंपनियां कुशल विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर भारतीय आईटी और टेक टैलेंट, को नियुक्त करने के लिए H-1B वीजा कार्यक्रम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करती हैं. 

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