IPS Shobha Ohatkar: किस बैच की अधिकारी हैं IPS शोभा ओहटकर, जानें उन्होंने कहां से की है पढ़ाई?


IPS Shobha Ohatkar: बिहार पुलिस की चुनिंदा अधिकारियों में शामिल रही आईपीएस शोभा ओहटकर मंगलवार 30 जून को अपने लंबे प्रशासनिक करियर के बाद रिटायर्ड हो गईं. वह गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा की महानिदेशक सह महासमादेष्टा के पद से रिटायर्ड हुई, शोभा ओहटकर को बिहटा स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित समारोह में विदाई दी गई.

करीब तीन दशक से ज्यादा लंबे पुलिस सेवा के दौरान शोभा ओहटकर ने बिहार के कई जिलों में कानून व्यवस्था संभाली और बाद में फायर सर्विस तथा होमगार्ड के आधुनिकीकरण से जुड़े कई बड़े कामों में भूमिका निभाई. अपने सख्त प्रशासनिक रवैया की वजह से वह लंबे समय तक चर्चा में रही. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि आईपीएस अधिकारी शोभा ओहटकर किस बैच की अधिकारी हैं और उन्हें उन्होंने कहां से पढ़ाई की है. 

1990 बैच की अधिकारी है शोभा ओहटकर

शोभा ओहटकर 1990 बैच की भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं. उनका जन्म महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था. शुरुआती पढ़ाई यहां से पूरी करने के बाद उन्होंने हैदराबाद से पॉलिटिकल साइंस में एमए किया. इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई. उनके पिता बलराम ओहटकर हैदराबाद में एक्साइज कमिश्नर के पद पर रह चुके हैं. शोभा ओहटकर कई मौके पर अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को देती रही हैं. उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी है. 

शोभा ओहटकर 22 साल की उम्र में बनी आईपीएस 

महज 22 साल की उम्र में आईपीएस बनने के बाद शोभा ओहटकर की पहली नियुक्ति 1992 में पटना सिटी में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में हुई. उस समय बिहार में अपराध की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण मानी जाती थी. इसके बाद उन्होंने कई अहम जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाली. अपने करियर के दौरान वह पटना, दरभंगा, हजारीबाग, छपरा, वैशाली और देवघर समेत 6 जिलों की एसपी रही. 2000 में बिहार के विभाजन से पहले यह सभी पोस्टिंग संयुक्त बिहार के दौरान हुई थी. बाद में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर महाराष्ट्र चली गई और 2020 में बिहार लौटने के बाद उन्हें डीजी स्तर की जिम्मेदारी सौंप गई. 

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कई जिलों में संभाली कानून व्यवस्था की कमान 

शोभा ओहटकर के कार्यकाल में हजारीबाग, देवघर और वैशाली की पोस्टिंग सबसे ज्यादा चर्चा में रही है. हजारीबाग में उन्होंने कोयला तस्करी के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया, जिसमें बड़ी मात्रा में अवैध कोयला जब्त किया गया, कई तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की गई. वैशाली जिले में एसपी रहते हुए उन्होंने राघोपुर दियारा क्षेत्र में सक्रिय कई अपराधी गिरोह पर कार्रवाई की. वहीं दरभंगा में अपहरण जैसे गंभीर मामलों की जांच और अपराध नियंत्रण को लेकर भी उनका कार्यकाल चर्चा में रहा. 

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सख्त प्रशासनिक शैली के चलते बनी अलग पहचान 

शोभा ओहटकर को उनकी कड़क कार्यशैली के लिए जाना जाता है. देवघर में तैनाती के दौरान महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों और अभद्र व्यवहार के मामले में उन्होंने सख्त कार्रवाई की. बैद्यनाथ धाम मंदिर क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने कई कदम उठाए. इसके बाद उनकी छवि एक सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में और मजबूत हुई. उनका मानना था कि किसी भी आईपीएस अधिकारी को फील्ड पोस्टिंग के साथ सीआईडी और स्पेशल ब्रांच जैसे विभागों का अनुभव भी होना चाहिए, ताकि कानून व्यवस्था की चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके.

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