Explained: सरकार ने CBSE के चेयरमैन और सचिव को हटाया, OSM टेंडर की जांच के आदेश, इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?


CBSE ने इस साल पहली बार 12वीं बोर्ड की कॉपियां ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से चेक करवाईं. रिजल्ट आया तो बवाल मच गया. छात्रों ने कॉपियां गायब होने, नंबर कम देने और सिस्टम में हेराफेरी के आरोप लगा दिए. फिर एक के बाद एक ऐसे खुलासे हुए कि सबकी आंखें फटी रह गईं. टेंडर में तीन बार नियम बदले गए, विवादित कंपनी को ठेका दिया गया, पोर्टल हैक हो गया और एक 17 साल के छात्र ने संसद में पूरी चिट्ठी पेश कर दी. तो आइए इस मामले में अब तक घोटाले, हैकिंग और राजनीति तक सफर को जानते हैं…

OSM क्या है और इसकी क्यों हुई शुरुआत?

OSM यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग एक डिजिटल ईवैलुएशन सिस्टम है. इसमें स्टूडेंट की फिजिकल कॉपी को स्कैन किया जाता है, उसे कंप्यूटर स्क्रीन पर अपलोड किया जाता है और फिर टीचर स्क्रीन पर ही चेक करते हैं. सॉफ्टवेयर खुद टोटल निकालता है. कैंब्रिज, IB और पियर्सन जैसे बोर्ड पहले से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. CBSE ने इसे पहले पायलट बेस पर टेस्ट किया था, फिर 2025-26 सेशन में इसे पूरे पैमाने पर लागू कर दिया.

बोर्ड के मुताबिक, यह सिस्टम छात्र-केंद्रित और वैश्विक स्तर पर स्वीकृत है. टीचर्स की थकान और पक्षपात कम करना, पारदर्शिता लाना और रिजल्ट जल्दी लाना इसके मकसद थे.

तो फिर क्या गड़बड़ हुई और स्टूडेंट्स के क्या-क्या आरोप हैं?

13 मई 2026 को CBSE ने 12वीं का रिजल्ट जारी किया. इस बार पासिंग परसेंटेज 85.20% रहा. लेकिन रिजल्ट आते ही छात्रों ने शिकायतें करनी शुरू कर दीं. आरोप थे:

  • स्कैन की हुई कॉपियां धुंधली थीं, जिससे नंबर कटे.
  • कॉपी के पेज गायब थे या जवाब सही होने के बावजूद नंबर नहीं मिले.
  • सबसे बड़ी शिकायत थी कि डिजिटल कॉपी और असल कॉपी में मेल नहीं था.
  • पुराने सिस्टम में टीचर कोशिश के लिए एक्स्ट्रा नंबर दे देते थे. OSM में सख्ती से सिर्फ मार्किंग स्कीम के हिसाब से नंबर मिले, इसलिए नंबर कम लगे.
  • OSM सख्त है, लेकिन पुराने सिस्टम की तुलना में छात्रों को नुकसान हुआ.

टेंडर विवाद: क्या ठेका पहले से तय था?

यहीं से असली आग लगी. हैदराबाद की कंपनी कोएम्प्ट एजुटेक (Coempt EduTeck) को 5 दिसंबर 2025 को यह ठेका मिला था. स्टूडेंट सार्थक सिद्धांत ने चौंकाने वाले दावे किए:

See also  Ragging row at Gujarat medical college: One student suspended for 2 years, five others face action

CBES ने कोएम्प्ट को फेवर करने के लिए टेंडर के नियम तीन बार बदले. आइए समझते हैं कि कैसे:

टेंडर में क्या-क्या बदलाव हुए?

  1. ब्लैकलिस्टिंग क्लॉज हटाया गया: अगस्त 2025 के मूल टेंडर में सख्त प्रावधान था कि अगर वेंडर ने गलती की, तो ब्लैकलिस्ट किया जा सकता था. बाद में यह क्लॉज हटा दिया गया. CBSE का कहना था कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने यह शर्त हटाने का अनुरोध किया था.
  2. एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया बदले गए: आरोप है कि टेंडर की शर्तें कोएम्प्ट के हिसाब से ढाली गईं, ताकि रिलायंस जियो और TCS जैसी बड़ी कंपनियां बाहर हो जाएं.
  3. कोएम्प्ट ने TCS को 60% से अंडरकट किया: TCS ने 951.3 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी, जबकि कोएम्प्ट ने 60% कम यानी लगभग 380 करोड़ रुपए में ठेका ठोंक दिया.
  4. कोएम्प्ट पहले ‘ग्लोबारेना’ के नाम से जानी जाती थी: सबसे बड़ा खुलासा हुआ कि यही कंपनी पहले ग्लोबारेना टेक्नोलॉजीज के नाम से जानी जाती थी, जिसने 2019 और 2023 में तेलंगाना बोर्ड परीक्षाओं में बड़ा घोटाला किया था. अब उसी कंपनी ने नाम बदलकर CBSE का ठेका हासिल कर लिया.
  5. बस 66 दिन में लागू: कंपनी ने 5 दिसंबर को ठेका लिया और सिर्फ 66 दिनों के भीतर 17 फरवरी से बोर्ड परीक्षाओं के लिए OSM को पूरे देश में लागू कर दिया गया. इतनी जल्दबाजी में सिस्टम ठीक से टेस्ट होता, यह मुश्किल है.

‘संसद पहुंचा छात्र’: सार्थक सिद्धांत ने क्या-क्या खोल दिया?

इस पूरे मामले का टर्निंग पॉइंट रहा 17 साल के सार्थक सिद्धांत का संसद पहुंचना. वह खुद OSM का शिकार हुए थे. यह पहली बार हुआ कि किसी मामले में कोई स्टूडेंट अपनी बात रखने के लिए बुलाया गया. उन्होंने संसद की स्थायी समिति (शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल) के सामने 7 पेज का प्रेजेंटेशन दिया, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह कर रहे थे. 15 बड़ी खामियां गिनाई गईं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनसे मुलाकात की और पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाया.

साइबर सिक्योरिटी ‘खेल’: स्टूडेंट्स ने कैसे हिला दिया CBSE सिस्टम?

जहां टेंडर में घोटाले के आरोप थे, वहीं 19 साल के निसर्ग अधिकारी नाम के एथिकल हैकर ने OSM पोर्टल को नंगा कर दिया. निसर्ग ने दावा किया कि सिर्फ बेसिक टेक्निकल जानकारी से वह OTP वेरिफिकेशन बायपास कर सकता था, एक्जामिनर बन सकता था और स्टूडेंट्स के नंबर बदल सकता था.

See also  No More American Dream? Why Europe Is Becoming India’s New Favourite Study Destination | Education and Career News

CBSE से जुड़ा AWS बकेट (क्लाउड स्टोरेज) ठीक से कॉन्फिगर नहीं था, जिससे कोई भी इंटरनेट पर बैठा व्यक्ति स्कैन की गई कॉपियां डाउनलोड कर सकता था. इस बकेट में कई संस्थाओं का डाटा भी स्टोर था. निसर्ग ने कहा, ‘यह एक बच्चे का खेल था.’

इस हैकिंग क्लेम के बाद जब CBSE ने ‘री-इवैल्यूएशन पोर्टल’ लॉन्च किया, तो उसी दिन यानी 2 जून 2026 को उस पर साइबर अटैक हो गया. CBSE के मुताबिक, 2 मिनट में 15 लाख हिट्स आईं और 1 लाख से ज्यादा बार बिना इजाजत सिस्टम फाइलों तक पहुंचने की कोशिश की गई. यह डिनायल-ऑफ-सर्विस (DDoS) अटैक था.

विपक्ष का हमला: ‘ढकोसला है, शिक्षा मंत्री को हटाओ’

विपक्ष (खासकर कांग्रेस) इस मामले में जमकर मोर्चा खोले हुए है…

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि CBSE चेयरमैन-सचिव का ट्रांसफर महज ढकोसला है.
  • राहुल गांधी ने कहा, ’17 साल के बच्चे ने पोल खोल दी कि पूरा तंत्र कैसे सो रहा था.’ उन्होंने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत हटाया जाए और स्वतंत्र जांच कराई जाए.
  • कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तें बदलकर वेंडर को प्रोटेक्ट किया गया.
  • कपिल सिब्बल ने मांग की कि इस मामले में CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराई जाए. उन्होंने कहा, ‘छोटी मछली को दोष दो, बड़ी मछली को बचाओ.’
  • विपक्षी दलों का आरोप है कि यह ‘कवर-अप’ ऑपरेशन है.

अब तक सरकार ने क्या किया?

सरकार ने आखिरकार बड़ा कदम उठाया:

  • CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया.
  • इनकी जगह सीनियर IAS लोखंडे प्रशांत सीताराम को नया चेयरमैन और वरुण भारद्वाज को सचिव बनाया गया.
  • OSM सर्विस के टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई.
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी जिम्मेदारी लेते हुए कहा, ‘मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं… किसी भी स्टूडेंट की शिकायत अनसुलझी नहीं छोड़ेंगे.’
  • सरकार ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी.
See also  NEET PG 2026 on August 30; check revised paper pattern

स्टूडेंट्स की परेशानी और री-इवैल्यूएशन पोर्टल

  • रिजल्ट के बाद स्टूडेंट्स ने शिकायत की कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर पेमेंट फेल हो रहा था और पुष्टि में देरी हो रही थी.
  • बोर्ड ने कहा कि स्कैन की गई कॉपियों या मार्किंग से जुड़ी सभी असली शिकायतों की समीक्षा करेंगे.
  • इसी पोर्टल पर साइबर अटैक ने समस्या को बढ़ा दिया.

इस पूरे मामले में आगे क्या होगा?

  • जांच समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी. देखना यह है कि आरोप सही साबित होते हैं या नहीं.
  • कोएम्प्ट एजुटेक कंपनी पर कार्रवाई हो सकती है. बोर्ड ने संकेत दिए हैं कि इस वेंडर के खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है.
  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर विपक्ष का दबाव बढ़ता जा रहा है. आगामी चुनावों को देखते हुए यह सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है.
  • पूरे मामले की CBI जांच की मांग तेज हो गई है.

क्या यह NEET जैसा बड़ा घोटाला है?

CBSE OSM विवाद NEET-UG पेपर लीक मामले की याद दिला रहा है. वहां भी लाखों स्टूडेंट्स प्रभावित हुए थे. लेकिन इस मामले में दो नए मोड़ हैं:

  • ऑन-स्क्रीन मार्किंग के नाम पर कथित तौर पर कॉपियां गायब करना, नंबर कम देना और सिस्टम में हेराफेरी करना.
  • टेंडर में बड़ी-बड़ी कंपनियों को हटाकर उस कंपनी को ठेका देना जिस पर पहले से घोटाले के आरोप थे.
  • सरकार ने शीर्ष अधिकारियों को हटाकर जांच के आदेश तो दे दिए, लेकिन विपक्ष और छात्र इसे बड़ी मछली बचाने की कोशिश करार दे रहे हैं.

अब देखना यह है कि जांच समिति क्या निकालती है और क्या CBSE जैसी शैक्षणिक संस्था में पारदर्शिता बहाल हो पाती है या नहीं.

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required