15 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है इंजीनियर्स डे? जानें एम विश्वेश्वरैया की पूरी कहानी 


विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के मुददेनहल्ली में हुआ था. उनकी जयंती को ही भारत में इंजीनियर डे के तौर पर मनाने का फैसला किया गया. देश में पहली बार इंजीनियर्स डे 1968 में मनाया गया था. इस दिन स्कूल, कॉलेज और तकनीकी संस्थानों में इंजीनियर से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे. इनमें तकनीकी प्रतियोगिताएं, सेमिनार, क्विज, प्रदर्शनियां और प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन जैसी गतिविधियां शामिल रहती है.

विश्वेश्वरैया की शुरुआती पढ़ाई कर्नाटक में हुई. वहींं उच्च शिक्षा के लिए वह चेन्नई गए, जहां उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से बीए की पढ़ाई की. इसके बाद उनका रुझान विज्ञान और इंजीनियरिंग की ओर हुआ और उन्होंने पुणे के कॉलेज ऑफ साइंस से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इंजीनियर बनने के बाद उन्होंने जल प्रबंधन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण जैसी समस्याओं के लिए  तकनीकी समाधान विकसित किए.

विश्वेश्वरैया की शुरुआती पढ़ाई कर्नाटक में हुई. वहींं उच्च शिक्षा के लिए वह चेन्नई गए, जहां उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से बीए की पढ़ाई की. इसके बाद उनका रुझान विज्ञान और इंजीनियरिंग की ओर हुआ और उन्होंने पुणे के कॉलेज ऑफ साइंस से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इंजीनियर बनने के बाद उन्होंने जल प्रबंधन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण जैसी समस्याओं के लिए  तकनीकी समाधान विकसित किए.

विश्वेश्वरैया के काम का एक जरूरी हिस्सा जल प्रबंधन से जुड़ा था. उन्होंने पानी को कंट्रोल करने और बाढ़ से बचाव के लिए कई तकनीकी उपायों पर काम किया. उनके डिजाइन किए गए ऑटोमेटिक स्लूइस गेट पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करते थे.

विश्वेश्वरैया के काम का एक जरूरी हिस्सा जल प्रबंधन से जुड़ा था. उन्होंने पानी को कंट्रोल करने और बाढ़ से बचाव के लिए कई तकनीकी उपायों पर काम किया. उनके डिजाइन किए गए ऑटोमेटिक स्लूइस गेट पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करते थे.

1908 में हैदराबाद में आई मुसी नदी की बाढ़ के बाद उन्होंने बाढ़ नियंत्रण से जुड़े उपायों पर काम किया. इस तरह सिंचाई और जल आपूर्ति के लिए कृष्णा राजा सागर बांध में भी उनका जरूरी योगदान जुड़ा रहा. इस परियोजना ने क्षेत्र सिंचाई और कृषि को बढ़ावा देने में मदद की. उन्होंने विशाखापट्टनम बंदरगाह को समुद्री कटाव से बाचने से जुड़े कामों में भी योगदान दिया था.

1908 में हैदराबाद में आई मुसी नदी की बाढ़ के बाद उन्होंने बाढ़ नियंत्रण से जुड़े उपायों पर काम किया. इस तरह सिंचाई और जल आपूर्ति के लिए कृष्णा राजा सागर बांध में भी उनका जरूरी योगदान जुड़ा रहा. इस परियोजना ने क्षेत्र सिंचाई और कृषि को बढ़ावा देने में मदद की. उन्होंने विशाखापट्टनम बंदरगाह को समुद्री कटाव से बाचने से जुड़े कामों में भी योगदान दिया था.

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विश्वेश्वरैया ने 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान के रूप में काम किया. इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास औद्योगिक गतिविधि और बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने वाली कई योजनाओं पर काम किया. इस वजह से उन्हें आधुनिक मैसूर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है.

विश्वेश्वरैया ने 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान के रूप में काम किया. इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास औद्योगिक गतिविधि और बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने वाली कई योजनाओं पर काम किया. इस वजह से उन्हें आधुनिक मैसूर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है.

तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना में भी योगदान दिया, जो बाद में यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के नाम से जाना गया.

तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना में भी योगदान दिया, जो बाद में यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के नाम से जाना गया.

देश के विकास में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया. इससे पहले उन्हें ब्रिटिश शासन के दौरान नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द इंडियन अंपायर की उपाधि मिली थी. उनकी 100 वीं जयंती के अवसर पर 1960 में इंडिया पोस्ट ने उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया. इसके बाद उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय इंजीनियर्स डे मनाने का निर्णय भी लिया गया.

देश के विकास में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया. इससे पहले उन्हें ब्रिटिश शासन के दौरान नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द इंडियन अंपायर की उपाधि मिली थी. उनकी 100 वीं जयंती के अवसर पर 1960 में इंडिया पोस्ट ने उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया. इसके बाद उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय इंजीनियर्स डे मनाने का निर्णय भी लिया गया.

Published at : 15 Sep 2026 09:11 AM (IST)

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