कौन थे भारत के पहले डिप्टी प्राइम मिनिस्टर? जानें उस समय कितनी मिलती थी सैलरी


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  • पहले डिप्टी पीएम सरदार पटेल को मिलती थी ₹45 प्रतिदिन सैलरी.
  • वे आज़ादी की लड़ाई और रियासतों के विलय में प्रमुख थे.
  • सरदार पटेल ने किसानों के आंदोलनों को सफलतापूर्वक संगठित किया.
  • गृह मंत्री के तौर पर उन्होंने शरणार्थियों की मदद की.

आज के समय में देश में एमपी और एमएलए को शानदार सैलरी के साथ-साथ कई सारी सुविधाएं मिलती हैं. लेकिन क्या आपको पता जब देश आजाद हुआ था तब देश के पहले डिप्टी प्राइम मिनिस्टर को कितनी सैलरी मिलती थी और वह कौन थे? अगर नहीं तो आज हम आपको बताते हैं. देश के पहले डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और कोई नहीं बल्कि सरदार वल्लभभाई पटेल थे. इसके अलावा वह भारत के गृह मंत्री भी थे, आइए जानते हैं उन्हें उस समय कितनी सैलरी मिलती थी.

सरदार पटेल का नाम सुनते ही “आयरन मैन ऑफ इंडिया” की छवि सामने आती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इतने बड़े पद पर रहते हुए भी उनकी सैलरी आज के हिसाब से बेहद मामूली थी. अप्रैल 1948 में उन्हें प्रतिदिन 45 रुपये मिलते थे, जो दो भत्तों को मिलाकर तय किया गया था. खास बात यह थी कि यह राशि आयकर से मुक्त थी.

गांव की मिट्टी से निकला लौह पुरुष

31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में जन्मे वल्लभभाई पटेल साधारण परिवार से थे. बचपन गांव में बीता. पढ़ाई पूरी कर वे एक सफल वकील बने. उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया, जब वे महात्मा गांधी के संपर्क में आए. महात्मा गांधी के साथ जुड़कर उन्होंने किसानों और आम लोगों के लिए आवाज उठानी शुरू की.

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खेड़ा, बोरसद और बारडोली में किसानों के आंदोलनों को उन्होंने संगठित किया. ये आंदोलन अहिंसक थे, लेकिन असरदार थे. बारडोली सत्याग्रह की सफलता के बाद ही लोगों ने उन्हें “सरदार” कहना शुरू किया.

आजादी की लड़ाई में बड़ी भूमिका

सरदार पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बड़े नेता बने. संगठन को मजबूत करने, चुनाव की तैयारी करने और लोगों को जोड़ने में उनकी बड़ी भूमिका रही. 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में दिया गया उनका भाषण लोगों में जोश भर देने वाला माना जाता है.

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देश के पहले डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और गृह मंत्री

1947 में देश आजाद हुआ. हालात आसान नहीं थे. एक तरफ बंटवारे का दर्द, दूसरी तरफ शरणार्थियों की परेशानी और तीसरी तरफ सैकड़ों रियासतों का भारत में विलय. ऐसे समय में सरदार पटेल को देश का पहला डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और गृह मंत्री बनाया गया. उन्होंने पंजाब और दिल्ली में शरणार्थियों के लिए राहत कार्य चलाए. दंगों के बीच शांति कायम करने की कोशिश की.

565 रियासतों को एक सूत्र में पिरोया

आजादी के समय भारत में करीब 565 रियासतें थीं, जो सीधे ब्रिटिश शासन में नहीं थीं. इन रियासतों को भारत में मिलाना आसान काम नहीं था. सरदार पटेल ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और लॉर्ड माउंटबेटन के साथ मिलकर ज्यादातर रियासतों को समझाया और भारत में शामिल कराया. हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसे जटिल मामलों को भी उन्होंने सख्ती और समझदारी से संभाला.

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