Vd Satheesan Salary: 2001 से विधायक हैं केरल के नए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, जानें उन्हें कितनी मिलती होगी सैलरी?
- विधायकों को निधि, मुफ्त आवास, चिकित्सा व यात्रा सुविधाएं मिलती हैं.
Vd Satheesan Salary: केरल की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है. कांग्रेस आलाकमान ने अनुभवी नेता वीडी सतीशन को राज्य की कमान सौंपने का औपचारिक ऐलान कर दिया है. 2001 से लगातार विधायक के रूप में जनता की सेवा कर रहे सतीशन अब केरल के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे. चुनाव नतीजों के बाद हुए इस फैसले ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. यह सिर्फ एक पद का हस्तांतरण नहीं है, बल्कि सतीशन के 25 वर्षों के संसदीय अनुभव पर आलाकमान के भरोसे की मुहर है. आइए जानें कि 2001 से विधायक रहे सतीशन की सैलरी कितनी होगी.
लगातार 25 वर्षों का विधायी सफर
वीडी सतीशन का राजनीतिक कद उनकी निरंतरता और जनता के बीच उनकी पकड़ से मापा जा सकता है. वह साल 2001 से लगातार विधानसभा के सदस्य चुने जाते रहे हैं. एक चौथाई सदी तक विधायक रहने का रिकॉर्ड बनाना किसी भी राजनेता के लिए बड़ी उपलब्धि है. इन 25 वर्षों के दौरान उन्होंने केरल की विधानसभा में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी धारदार आवाज उठाई है. उनके इसी अनुभव और विधायकों के बीच उनकी स्वीकार्यता को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा माना है.
मुख्यमंत्री पद की आकर्षक सैलरी
केरल के मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीशन की सैलरी और भत्तों को लेकर भी लोगों में काफी उत्सुकता है. आधिकारिक आंकड़ों और वर्तमान संरचना के अनुसार, केरल के मुख्यमंत्री का कुल मासिक वेतन लगभग 1,85,000 रुपये होता है. इस राशि में मूल वेतन के साथ-साथ निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और अन्य विशेष सरकारी भत्ते भी शामिल किए गए हैं. अगर इस मासिक आय को सालाना आधार पर देखा जाए, तो मुख्यमंत्री की कुल वार्षिक आय लगभग 22.20 लाख रुपये बैठती है.
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करोड़ों की निजी संपत्ति का ब्यौरा
राजनीतिक जीवन के साथ-साथ सतीशन की आर्थिक स्थिति भी चर्चा का विषय रही है. 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग को सौंपे गए हलफनामे के मुताबिक, वीडी सतीशन की कुल संपत्ति 6 करोड़ रुपये से अधिक है. इस संपत्ति में उनकी चल और अचल संपत्तियां शामिल हैं.
विधायक काल की वेतन वृद्धि
जब सतीशन ने 2001 में पहली बार विधायक के रूप में शपथ ली थी, तब विधायकों का वेतन बेहद सीमित हुआ करता था. उस दौर में मूल वेतन मात्र 5,000 से 10,000 रुपये के बीच हुआ करता था. हालांकि, बीते 25 वर्षों में विधायी वेतन में समय-समय पर भारी संशोधन हुए हैं. आज 2026 में भारत के विभिन्न राज्यों में एक विधायक का वेतन और भत्ते मिलाकर 1 लाख रुपये से लेकर 3.5 लाख रुपये तक पहुंच गए हैं. सतीशन ने वेतन के इस पूरे क्रमिक विकास को करीब से देखा है.
राज्यों के बीच वेतन का बड़ा अंतर
भारत में विधायकों का वेतन हर राज्य में अलग-अलग होता है. उच्च वेतन वाले राज्यों की सूची में तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्य शामिल हैं, जहां विधायकों को 2 लाख रुपये से 3.5 लाख रुपये के बीच भुगतान किया जाता है. वहीं, मध्यम वेतन वाले राज्यों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में यह आंकड़ा 1 लाख रुपये से 1.5 लाख रुपये के आसपास रहता है. केरल के मुख्यमंत्री और विधायकों का वेतन भी इसी संरचना के तहत निर्धारित किया गया है.
सरकारी भत्ते और सुविधाएं
सिर्फ सैलरी ही नहीं, बल्कि एक जनप्रतिनिधि को कई अन्य वित्तीय शक्तियां और सुविधाएं भी मिलती हैं. विधायकों को प्रति वर्ष 2 करोड़ रुपये से 4 करोड़ रुपये तक का विधायक निधि फंड मिलता है, जिसे वे अपने क्षेत्र के विकास कार्यों में खर्च कर सकते हैं. इसके अलावा मुख्यमंत्री और विधायकों को मुफ्त आवास, उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं, टेलीफोन खर्च, मुफ्त यात्रा भत्ते और वाहन खरीदने के लिए सरकारी सब्सिडी जैसी विशेष सुविधाएं भी दी जाती हैं.
सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन
सतीशन जैसे दिग्गज नेता, जिन्होंने 25 साल तक सदन की सेवा की है, उनके लिए पेंशन के भी विशेष प्रावधान हैं. लगातार पांच कार्यकाल पूरे करने वाले विधायक को सेवानिवृत्ति के बाद आजीवन भारी पेंशन दी जाती है. कई राज्यों में यह पेंशन राशि 50,000 से 75,000 रुपये प्रति माह से भी अधिक होती है. मुख्यमंत्री के पद से हटने के बाद भी उनके पास ये वित्तीय लाभ और प्रोटोकॉल सुरक्षित रहते हैं, जो उनके दीर्घकालिक राजनीतिक करियर का प्रतिफल है.
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