RPSC: कब और कैसे शुरू हुआ था RPSC? कौन थे पहले अध्यक्ष, जानिए रोचक इतिहास


राजस्थान में सरकारी नौकरियों की बात हो और RPSC का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. हर साल हजारों युवा इस आयोग की परीक्षाओं में बैठते हैं और अपने सपनों को सच करने की कोशिश करते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस आयोग की शुरुआत कब हुई, क्यों हुई और इसके पहले अध्यक्ष कौन थे.

कहानी शुरू होती है साल 1923 से. उस समय ली कमीशन ने भारत में एक संघ लोक सेवा आयोग बनाने की सिफारिश की थी. मकसद था कि सरकारी नियुक्तियां योग्यता के आधार पर हों. हालांकि उस समय प्रांतों के लिए अलग लोक सेवा आयोग बनाने पर कोई खास विचार नहीं किया गया. प्रांतीय सरकारें अपनी जरूरत के अनुसार नियम बनाकर नियुक्तियां करती थीं.

रिपोर्ट्स की मानें तो समय बदला, देश आजाद हुआ और रियासतों का एकीकरण शुरू हुआ. राजस्थान भी कई रियासतों को मिलाकर बना. उस समय कुल 22 रियासतों में से केवल जयपुर, जोधपुर और बीकानेर में ही लोक सेवा आयोग जैसा स्ट्रक्चर मौजूद था. बाकी जगह नियुक्तियों की कोई एक समान व्यवस्था नहीं थी. ऐसे में एक ऐसे आयोग की जरूरत महसूस हुई जो पूरे राज्य में भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संभाल सके.

कब जारी हुआ नोटिफिकेशन

20 अगस्त 1949 को राजस्थान राजपत्र में राजस्थान लोक सेवा आयोग अध्यादेश, 1949 प्रकाशित हुआ. इस अध्यादेश में साफ कहा गया कि आयोग तब प्रभाव में आएगा जब नियुक्ति से जुड़ा नोटिफिकेशन राजपत्र में प्रकाशित होगा. आखिरकार 22 दिसंबर 1949 को यह नोटिफिकेशन जारी हुआ और इसी दिन राजस्थान लोक सेवा आयोग आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया. यानी RPSC की स्थापना 22 दिसंबर 1949 को मानी जाती है.

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आयोग की कमान किसे सौंपी गई?

राजस्थान के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सर एस. के. घोष को RPSC का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया. यह अपने आप में खास बात थी, क्योंकि एक न्यायाधीश को यह जिम्मेदारी दी गई, जिससे आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता साफ दिखाई देती है. उनके साथ दो सदस्य देवीशंकर तिवारी और एन. आर. चन्दोरकर भी नियुक्त किए गए.

शुरुआती समय में आयोग छोटा था एक अध्यक्ष और दो सदस्य. लेकिन जिम्मेदारी बड़ी थी. पूरे राज्य में सरकारी सेवाओं के लिए सही लोगों का चयन करना आसान काम नहीं था. बाद में संघ लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य एस. सी. त्रिपाठी, आईएएस को भी अध्यक्ष बनाया गया, जिससे आयोग के कामकाज को और मजबूती मिली.

साल 1951 में आयोग के काम को नियमित और स्पष्ट बनाने के लिए कुछ अहम नियम बनाए गए. इनमें राजस्थान लोक सेवा आयोग सेवा की शर्तें नियम 1951 और राजस्थान लोक सेवा आयोग कार्यों की सीमा नियम, 1951 शामिल थे.

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