Jean Dreze Detained at Delhi Protest


  • Hindi News
  • Career
  • Jean Dreze Detained At Delhi Protest | Election Commissioner Controversy

37 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

दिल्ली में इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर हे विरोध प्रदर्शन चल रहा है। हाल ही में इस विरोध प्रदर्शन में एक व्यक्ति को डिटेन करने का वीडियो सामने आया। इस वीडियो में उनके हाथ में एक स्लोगन बोर्ड है और न ही पुलिस और न ही मीडिया उस व्यक्ति को पहचान रही है। उससे पूछ रही है ‘आप कहां से आए हैं।’

दरअसल इस वीडियो में नजर आ रहे शख्स भारतीय अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज हैं। बेल्जियम में जन्मे द्रेज 1979 से भारत में रह रहे हैं जो 2002 से भारत के नागरिक हैं।

भारतीय अर्थशास्त्री हैं ज्यां द्रेज

मनरेगा, मिड डे मील जैसी पॉलिसीज को साकार बनाया

1990 के दशक से, उन्होंने कई सामाजिक कल्याण पहलों पर काम किया है और सरकारी कार्यक्रमों पर चर्चाओं में योगदान दिया है।

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (NREGA), सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम यानी मिड डे मील उनके कामों में शामिल हैं।

इसके साथ ही भारत में भूख, कुपोषण और गरीब परिवारों तक खाना पहुंचाने की सरकारी व्यवस्था पर रिसर्च की। खाद्य सुरक्षा से जुड़े कानूनों और नीतियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

ज्यां ने सरकारी स्कूलों, प्राथमिक शिक्षा, बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर काम किया। वे इस बात पर जोर देते रहे हैं कि बच्चों को स्कूल, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना सामाजिक विकास के लिए जरूरी है।

MANREGA शुरू किया, रोजगार कानून लाए

ज्यां द्रेज मनरेगा के प्रमुख समर्थकों और इसके मूल विचार को आकार देने वाले अर्थशास्त्रियों में शामिल हैं। उनका तर्क है कि ग्रामीण लोगों के लिए रोजगार केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि कानून से मिला अधिकार होना चाहिए।

See also  RRB NTPC 2024: Registration extended for UG posts; apply at rrbapply.gov.in | Jobs News

मनरेगा में पात्र ग्रामीण परिवारों को काम मांगने पर एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन तक अकुशल मजदूरी वाले काम की गारंटी देने का प्रावधान था।

द्रेज का मानना रहा है कि इस व्यवस्था ने मजदूरों को रोजगार मांगने की ताकत दी, विशेष रूप से महिलाओं और कमजोर वर्गों को।

द्रेज की सूचना के अधिकार (RTI), सामाजिक ऑडिट और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े विमर्श में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनका जोर इस बात पर रहा है कि लोगों को सिर्फ योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि अपने अधिकारों का दावा करने वाला नागरिक माना जाए।

VB-G RAM G बिल का विरोध किया

द्रेज ने 2025 में पारित VB-G RAM G कानून को लेकर उन्होंने चिंता जताई कि तय बजट और केंद्र सरकार के अधिक नियंत्रण से रोजगार की मांग पर आधारित पुरानी व्यवस्था कमजोर हो सकती है।

ग्लोबल इनइक्वालिटी रिसर्च अवार्ड मिला

ज्यां द्रेज बेल्जियम में जन्मे हैं। उनका प्रमुख काम भारत में गरीबी, भूख, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर रहा है। वे ग्रामीण और गरीब परिवारों के जीवन पर सरकारी नीतियों के असर का अध्ययन करते हैं।

5 जून, 2026 को, पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में आयोजित ‘वर्ल्ड इनइक्वालिटी कॉन्फ्रेंस’ में द्रेज को ‘ग्लोबल इनइक्वालिटी रिसर्च अवार्ड’ (GiRA) से सम्मानित किया गया।

वे अर्थशास्त्र विभाग में योजना और विकास इकाई में मानद चेयर प्रोफेसर थे। यह भारत सरकार के योजना आयोग द्वारा दिए गए फंड (एंडोमेंट) से स्थापित की गई थी।

नोबेल विजेता अमृत्य सेन के साथ मिलकर किताबें लिखीं

द्रेज ने नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के साथ मिलकर अकाल पर अमर्त्य हंगर एंड पब्लिक एक्शन (1989), इंडिया: डेवलपमेंट एंड पार्टीसिपेशन (2002), एन अनसर्टन ग्लोरी; इंडिया एंड इट्स कंट्राडिक्शन (2013) किताबें लिखीं।

एन अनसर्टन ग्लोरी; इंडिया एंड इट्स कंट्राडिक्शन (2013) किताब के बुक लॉन्च प्रोग्राम में ज्यां द्रेज (बाएं) अमर्त्य सेन ( दाएं) ।

एन अनसर्टन ग्लोरी; इंडिया एंड इट्स कंट्राडिक्शन (2013) किताब के बुक लॉन्च प्रोग्राम में ज्यां द्रेज (बाएं) अमर्त्य सेन ( दाएं) ।

See also  CISF Admit Card 2024: Constable fireman call letters out at cisfrectt.in | Jobs News

ब्रिटिश अर्थशास्त्री निकोलस स्टर्न के साथ बाजारों में नीतिगत सुधारों पर और नोबेल पुरस्कार विजेता एंगस डीटन के साथ मिलकर किताबें लिखी हैं। द्रेज ने सेंस एंड सॉलिडेरिटी झोलवाला इकोनॉमिक्स फॉर एवरीवन (2019) लिखी।

बेघरों के साथ रहे, गल्फ वॉर का विश्लेषण किया

अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई के दौरान, द्रेज लंदन में बेघर लोगों के साथ रहे और 1988 में उन्हें एक आंदोलन शुरू करने में मदद की। बाद में उन्होंने अपने अनुभवों को ‘नंबर 1 क्लैफम रोड: द डायरी ऑफ अ स्क्वैट’ नाम से किताब छपवाई थी।

उनका काम भूख, जेंडर असमानता, बच्चों की सेहत और शिक्षा जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा है, जिससे पब्लिक पॉलिसी पर चर्चा में गरीबी और सामाजिक कल्याण के सवाल भी शामिल हुए हैं।

द्रेज शांति के लिए काम करने वाले अभियानों में भी शामिल रहे हैं। 1990-91 के इराक युद्ध के दौरान वे इराक-कुवैत बॉर्डर पर एक शांति कैंप में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने ‘हंगर एंड पॉवटी इन इराक , 1991 लिखी, जिसमें गल्फ वॉर के बाद देश की आर्थिक स्थितियों का विश्लेषण किया गया था।

झारखंड में रहने वाले द्रेज उन चार लोगों में शामिल थे जो जंतर-मंतर के पास केरल हाउस के पास जमा हुए थे। बाकी लोगों में फिल्ममेकर अबान रजा, स्कॉलर और रिसर्चर परन अमितावा और स्कॉलर और आर्टिस्ट अंजलि एस. शामिल थे।

द्रेज ने आदर्श नगर पुलिस स्टेशन से फोन पर बताया, ‘हम वहां पोस्टर लेकर खड़े थे और मीडिया से बात कर रहे थे, तभी पुलिस ने बिना कुछ कहे हमें उठा लिया।’ उन्हें इसी स्टेशन पर रखा गया था।

See also  RRB NTPC एग्जाम डेट का इंतजार कब होगा खत्म? रेलवे भर्ती परीक्षा को लेकर आया अपडेट, यहां चेक करें डिटेल

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे कई लोगों को भी हिरासत में लिया गया जो विरोध प्रदर्शन से संबंधित किसी कारण से दिल्ली नहीं आए थे। उन्होंने कहा, ‘ऐसे करीब 30 से 35 लोगों को हिरासत में लिया गया था, और वे मजदूर वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों से थे। उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया और मारपीट की गई।’

———————

ये खबर भी पढ़ें..

135 साल पुरानी लाइब्रेरी क्यों तोड़ना चाहती है सरकार:प्रस्ताव- 2 कमरों में शिफ्ट कर लें 8.9 लाख किताबें

सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी देश की सबसे पुरानी और दूसरी सबसे बड़ी सरकारी लाइब्रेरी है। 1969 में शास्त्री भवन में स्थापित की गई ये लाइब्रेरी अब तक 5500 स्क्वायर मीटर में 4 मंजिल में संचालित की जा रही है। पूरी खबर पढ़ें..

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required