GATE 1983 से 2027 तक, जानें 40 साल में कितना बदल गया एग्जाम
वहीं आपको बता दें कि GATE 2027 का आयोजन आईआईटी मद्रास की ओर से किया जाएगा. इस बार परीक्षा में कुल 30 टेस्ट पेपर होंगे. उम्मीदवारों को निर्धारित प्रोग्राम के अनुसार एक या दो पेपर चुनने का ऑप्शन मिलेगा. वहीं रोबोटिक्स और ऑटोमेशन को नए टेस्ट पेपर के तौर पर शामिल किया गया है. ऐसे में 1983 की दो पेपर वाली परीक्षा से लेकर 2027 के 30 पेपर वाले कंप्यूटर आधारित एग्जाम तक का सफर बहुत बड़ा बदलाव दिखता है.

दरअसल पहली बार गेट परीक्षा 26 फरवरी 1983 को आयोजित की गई थी. उस समय परीक्षा में दो पेपर होते थे और इसे मुख्य रूप से IITs और IISc में पोस्ट ग्रेजुएट इंजीनियरिंग पढ़ाई के लिए तैयार किया गया था. उस समय परीक्षा को इंजीनियरिंग और साइंस की दो धाराओं में बांटा गया था.

इंजीनियरिंग स्ट्रीम में पेपर 1 जनरल इंजीनियरिंग साइंस का था, जबकि पेपर 2 उम्मीदवार की चुनी हुई इंजीनियरिंग शाखा से संबंधित होता था. पहले पेपर का वेटेज 40 प्रतिशत और दूसरे पेपर का 60 प्रतिशत था. उस समय उम्मीदवार एरोनॉटिकल, एग्रीकल्चर, आर्किटेक्चर, केमिकल, सिविल, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, मैकेनिक, मेटालर्जिकल, माइनिंग, नवल आर्किटेक्चर, प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल इंजीनियरिंग जैसे सब्जेक्ट में पेपर चुन सकते थे.

वहीं 1983 की गेट परीक्षा एक ही दिन में आयोजित की गई थी. पेपर 1 सुबह 9 बजे से 11 बजे तक और पेपर 2 दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक हुआ था. जिसका मतलब है कि परीक्षा का पूरा शेड्यूल एक ही दिन में पूरा हो जाता था. इसके मुकाबले गेट 2027 को कई दिनों में आयोजित किया जाएगा. परीक्षा 6, 7, 13, 14, 20 और 21 फरवरी 2027 को होगी.

इसके अलावा आज गेट का आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किया जाता है, लेकिन 1983 में आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑफलाइन थी. उम्मीदवारों काे आवेदन फाॅर्म प्राप्त करने के लिए 5 रुपये का इंडियन पोस्ट और अपने एड्रेस वाला स्टांप लगा लिफाफा भेजना पड़ता था.

इसके बाद भरा हुआ आवेदन फाॅर्म 45 रुपये के रजिस्ट्रेशन फीस के डिमांड ड्राफ्ट के साथ संबंधित IITs और IISc को डाक के जरिए भेजा जाता था. एडमिट कार्ड भी उम्मीदवारों को डाक से मिलता था. अगर 15 फरवरी 1983 तक किसी उम्मीदवार को एडमिट कार्ड नहीं मिलता था, तो उसे संबंधित गेट अध्यक्ष से कांटेक्ट करने के निर्देश दिए गए थे. वहीं अब प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है. गेट 2027 के लिए उम्मीदवार गेट ऑनलाइन एप्लीकेशन प्रोसेसिंग सिस्टम के माध्यम से आवेदन करेंगे. फोटो, सिग्नेचर भी ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे.

गेट के शुरुआती दौर में उम्मीदवारों को एक ही डिसिप्लिन स्पेसिफिक पेपर टू चुनना होता था. अब परीक्षा में उम्मीदवारों को ज्यादा ऑप्शन दिए गए हैं. गेट 2027 में उम्मीदवार अधिकतम दो टेस्ट पेपर के लिए परीक्षा दे सकते हैं. हालांकि दो पेपर चुनने के लिए निर्धारित पेपर कांबिनेशन का पालन करना होगा. दोनों पेपर आवेदन में शामिल करने होंगे. परीक्षा सेक्शनल पेपर्स में भी समय के साथ बदलाव हुआ. गेट 2027 में इंजीनियरिंग साइंस, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस और लाइफ साइंस के कोड सेक्शन में बदलाव किया गया है.

1983 में गेट की परीक्षा प्रिंटेड प्रश्न पत्र और कागज आधारित प्रक्रिया के जरिए होती थी. उस समय उम्मीदवारों को अपना स्लाइड रूल और इंस्ट्रूमेंट बॉक्स लाने की बात कही गई थी. इलेक्ट्रॉनिक कैलकुलेटर के इस्तेमाल की भी अनुमति थी, वहीं आज गेट पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा है. गेट 2027 के हर एक पेपर के लिए कुल 100 अंक निर्धारित है. इनमें 15 अंक जनरल एप्टीट्यूड के होंगे, जबकि बाकी 85 अंक संबंधित टेस्ट पेपर के सिलेबस से जुड़े होंगे.

वहीं शुरुआत में गेट को मुख्य रूप से IITs और IISc में पोस्ट ग्रेजुएट इंजीनियरिंग प्रोग्राम में एडमिशन के लिए योग्यता परीक्षा के तौर पर देखा गया था. गेट क्वालीफाई करने वाले छात्रों को एडमिशन के बाद स्कॉलरशिप से भी जोड़ा गया था. अब गेट स्कोर का इस्तेमाल कई तरह के हायर एजुकेशनल प्रोग्राम में किया जाता है. वैध गेट स्कोर के जरिए मास्टर डिग्री और डॉक्टोरल प्रोग्राम में एडमिशन लिया जा सकता है. क्वालिफाइड उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता पाने का अवसर भी मिलता है. इसके अलावा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग भर्ती के लिए भी गेट स्कोर का इस्तेमाल करती है.
Published at : 01 Sep 2026 06:17 PM (IST)
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