Education Report 2025-26: अब एक टीचर पर होंगे कम बच्चे, जानें UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट की सबसे बड़ी बातें


केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देशभर के स्कूलों से जुड़ी UDISE+ (Unified District Information System for Education Plus) 2025-26 रिपोर्ट जारी कर दी है. यह रिपोर्ट देश के सरकारी और निजी स्कूलों की स्थिति की सबसे बड़ी आधिकारिक तस्वीर पेश करती है. इसमें छात्रों की संख्या, शिक्षकों की उपलब्धता, स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं, डिजिटल शिक्षा, ड्रॉपआउट, छात्र-शिक्षक अनुपात और लड़कियों की भागीदारी जैसे कई अहम पहलुओं का आकलन किया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में स्कूल शिक्षा के कई क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है. हालांकि कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां अभी और काम करने की जरूरत है.

स्कूलों में बढ़े शिक्षक, बच्चों को मिलेगा ज्यादा समय

रिपोर्ट के अनुसार, देश में शिक्षकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2022-23 में 94.83 लाख शिक्षक थे, जो बढ़कर 2025-26 में 1.02 करोड़ (1,02,73,020) से ज्यादा हो गए हैं. इसका मतलब यह है कि तीन साल में शिक्षकों की संख्या में करीब 8.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. आसान भाषा में समझें तो अब एक शिक्षक पर पहले की तुलना में कम बच्चों की जिम्मेदारी होगी, जिससे बच्चों को पढ़ाई में ज्यादा ध्यान मिल पाएगा.

एक शिक्षक पर कम बच्चे, पढ़ाई होगी बेहतर

रिपोर्ट के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात (Pupil Teacher Ratio) में भी सुधार हुआ है. शुरुआती कक्षाओं (Foundational) में अब एक शिक्षक पर औसतन 10 बच्चे हैं.

  • Preparatory स्तर पर 12 बच्चे
  • Middle स्तर पर 17 बच्चे
  • Secondary स्तर पर 21 बच्चे

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में एक शिक्षक पर अधिकतम 30 छात्रों की सिफारिश की गई है. मौजूदा आंकड़े इस लक्ष्य से बेहतर हैं.

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स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या घटी

रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल बीच में छोड़ने वाले बच्चों (Dropout) की संख्या में भी कमी आई है. Preparatory स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2.3% से घटकर 1.8% हो गई. Secondary स्तर पर यह 8.2% से घटकर 7% रह गई. हालांकि, Middle स्तर पर मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई है. यह दर 3.5% से बढ़कर 3.6% हो गई. इससे संकेत मिलता है कि पहले की तुलना में ज्यादा बच्चे अपनी पढ़ाई जारी रख रहे हैं. 

अब ज्यादा बच्चे पूरी कर रहे पढ़ाई

रिपोर्ट बताती है कि बच्चों के स्कूल में टिके रहने (Retention Rate) में भी सुधार हुआ है. Middle स्तर पर यह 82.8% से बढ़कर 83.7% हो गया. Secondary स्तर पर सबसे बड़ा सुधार देखने को मिला. यहां रिटेंशन 47.2% से बढ़कर 51.9% पहुंच गया. सरकार का कहना है कि माध्यमिक स्तर के स्कूलों की संख्या बढ़ने से ज्यादा बच्चों को आगे पढ़ने का मौका मिला है.

माध्यमिक कक्षाओं में बढ़े दाखिला

Secondary स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio-GER) भी बढ़ा है. यह 68.5% से बढ़कर 71.7% हो गया है. इसका मतलब है कि अब पहले की तुलना में ज्यादा बच्चे माध्यमिक स्तर तक पहुंच रहे हैं और पढ़ाई जारी रख रहे हैं. एक कक्षा से दूसरी कक्षा में पहुंचने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है. रिपोर्ट के अनुसार, अब पहले से ज्यादा बच्चे बिना पढ़ाई छोड़े अगली कक्षा में पहुंच रहे हैं.

  • Foundational से Preparatory स्तर पर जाने की दर 98.6% से बढ़कर 99.2% हो गई
  • Preparatory से Middle स्तर पर 92.2% से बढ़कर 93.8%
  • Middle से Secondary स्तर पर 86.6% से बढ़कर 88.3% 
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सिंगल टीचर और खाली स्कूलों की संख्या घटी

  • देश में ऐसे स्कूलों की संख्या भी कम हुई है, जहां सिर्फ एक ही शिक्षक है.
  • Single Teacher Schools की संख्या 1,04,125 से घटकर 1,00,843 रह गई.
  • जिन स्कूलों में एक भी छात्र नहीं है (Zero Enrolment Schools), उनकी संख्या 7993 से घटकर 5663 हो गई.

स्कूलों में बढ़ीं डिजिटल सुविधाएं

  • 69.9% स्कूलों में अब कंप्यूटर उपलब्ध, पिछले साल यह आंकड़ा 64.7% था.
  • 67.4% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा है, जो पिछले साल 63.5% थी.
  • इससे ऑनलाइन पढ़ाई, स्मार्ट क्लास और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

बिजली, पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं भी हुईं बेहतर

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश स्कूलों में अब बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं

  • 95% स्कूलों में बिजली है
  • 99.5% स्कूलों में पीने का पानी उपलब्ध
  • 98.5% स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय
  • 97.2% स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय
  • 96.9% स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा मौजूद
  • 90.5% स्कूलों में लाइब्रेरी

हालांकि, प्लेग्राउंड वाले स्कूलों का प्रतिशत 83% से घटकर 81.9% हो गया है, जो चिंता का विषय माना जा सकता है.

दिव्यांग छात्रों के लिए सुविधाएं बढ़ीं

दिव्यांग छात्रों की सुविधा के लिए रैंप और हैंडरेल वाले स्कूलों की संख्या भी बढ़ी है. अब 58.2% स्कूलों में रैंप और हैंडरेल उपलब्ध हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 54.9% था. महिला शिक्षकों और छात्राओं की भागीदारी बढ़ी. रिपोर्ट के अनुसार, स्कूलों में महिला शिक्षकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. अब 54.9% शिक्षक महिलाएं हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 54.2% था. वहीं, छात्राओं का नामांकन भी थोड़ा बढ़ा है. 48.4% छात्राएं अब स्कूलों में पढ़ रही हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 48.3% था.

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क्या कहती है पूरी रिपोर्ट?

UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में स्कूल शिक्षा की तस्वीर कई मामलों में बेहतर हुई है. शिक्षकों की संख्या बढ़ी है, एक शिक्षक पर छात्रों का बोझ कम हुआ है, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या घटी है और डिजिटल और बुनियादी सुविधाओं में सुधार हुआ है. हालांकि, खेल मैदान जैसी कुछ सुविधाओं और कुछ levels पर बच्चों को स्कूल में बनाए रखने जैसे क्षेत्रों में अभी और काम करने की जरूरत है. कुल मिलाकर रिपोर्ट शिक्षा व्यवस्था में सुधार की पॉजिटिव तस्वीर पेश करती है.

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