DUSU चुनाव जीतने वाले यश डबास के पास कितनी पावर, कौन-कौन से काम करा सकते हैं?


दिल्ली यूनिवर्सिटी यानी DU में हर साल दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के चुनाव होते हैं, जिसमें छात्र अलग-अलग पदों के लिए अपने उम्मीदवार चुनते हैं. इस साल भी 18 सितंबर को DUSU चुनाव के लिए वोटिंग हुई और 19 सितंबर को नतीजे घोषित किए गए. अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने 24,576 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. उन्होंने NSUI के विजय शंकर मीना को 2,053 वोटों से हराया. अब यश डबास DUSU के नए अध्यक्ष हैं और ऐसे में छात्रों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर DUSU प्रेसिडेंट के पास कितनी पावर होती है और वह छात्रों के लिए कौन-कौन से काम करा सकते हैं.

कौन हैं यश डबास?

यश डबास दिल्ली के कंझावला इलाके से आते हैं. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है और कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई भी की है. फिलहाल वह DU के बौद्ध अध्ययन विभाग से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं. पढ़ाई के साथ-साथ यश डबास का टेनिस से भी जुड़ाव रहा है और उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में हिस्सा लिया है. उनकी प्रोफाइल के मुताबिक वह पिछले करीब छह साल से छात्र राजनीति और ABVP से जुड़े रहे हैं. इस बार उन्होंने ABVP के उम्मीदवार के तौर पर DUSU President का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.

DUSU प्रेसिडेंट की असली पावर क्या होती है?

DUSU प्रेसिडेंट की सबसे बड़ी भूमिका छात्रों का प्रतिनिधित्व करना होती है. यानी अगर छात्रों को हॉस्टल, फीस, सुरक्षा, कॉलेज की सुविधाओं, परीक्षा या दूसरी किसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो DUSU अध्यक्ष उस मुद्दे को यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने उठा सकते हैं. DUSU के संविधान के मुताबिक President यूनियन की बैठकों की अध्यक्षता करता है और यूनियन के कामकाज में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन इसकी पावर किसी DU अधिकारी जैसी नहीं होती. President अकेले किसी नियम को बदलने या प्रशासन को आदेश देने का अधिकार नहीं रखता.

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हॉस्टल और PG की सुरक्षा पर उठा सकते हैं मुद्दा

यश डबास ने चुनाव जीतने के बाद छात्र सुरक्षा और रहने की व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही है. उन्होंने हर कॉलेज के हॉस्टल और PG की सेफ्टी ऑडिट कराने की बात कही है, ताकि वहां मौजूद सुरक्षा से जुड़ी कमियों का पता लगाया जा सके. इसके अलावा नए हॉस्टल और छात्राओं के लिए हॉस्टल की जरूरत का मुद्दा भी उन्होंने उठाया है. हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि DUSU प्रेसिडेंट खुद किसी हॉस्टल का निर्माण कराने का आदेश नहीं दे सकते. वह यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने मांग रख सकते है इन मुद्दों की मांग रख सकते हैं.

फीस, परीक्षा और एडमिशन के मामलों में क्या कर सकते हैं?

अगर छात्रों को फीस बढ़ने, परीक्षा की तारीख, रिजल्ट, एडमिशन या किसी दूसरी शैक्षणिक समस्या को लेकर परेशानी है, तो DUSU प्रेसिडेंट इन मुद्दों को प्रशासन के सामने रख सकते हैं. वह छात्रों की ओर से अधिकारियों से बातचीत, ज्ञापन और प्रतिनिधित्व कर सकते हैं और किसी बड़े मुद्दे पर छात्रों की आवाज को एक साथ सामने ला सकते हैं. लेकिन फीस कम करने, परीक्षा की तारीख बदलने या एडमिशन के नियमों में बदलाव करने का अंतिम अधिकार DUSU प्रेसिडेंट के पास नहीं होता.

छात्रों के लिए सुविधाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दे भी उठा सकते हैं

DUSU सिर्फ फीस या परीक्षा जैसे मुद्दों तक सीमित नहीं है. छात्र सुरक्षा, कैंपस की सुविधाएं, रहने की व्यवस्था, रोजगार और इंटर्नशिप जैसे मुद्दों को भी छात्र संघ के जरिए उठाया जा सकता है. इस चुनाव में भी छात्रों की सुरक्षा, आवास और कैंपस सुविधाएं प्रमुख मुद्दों में रही हैं. यश डबास ने भी सुरक्षित और सस्ते आवास को लेकर बात की है. ऐसे मुद्दों पर DUSU प्रशासन के साथ बातचीत कर सकता है और छात्रों की मांगों को सामने रख सकता है.

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