CBSE आंसर बुक विवाद में कंपनी की सफाई, डेटा लीक और तकनीकी खामी से किया इनकार


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  • CBSE OSM विवाद पर कंपनी ने मानवीय गलती स्वीकारी, तकनीक नहीं.
  • 95% छात्रों को स्कैन प्रतियां मिलीं, धुंधली कॉपी पर समीक्षा जारी.
  • कम गुणवत्ता स्कैनर, हैकर दावों को कंपनी ने नकारा.

CBSE की OSM प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच अब इसको संचालित करने वाली एडटेक कंपनी कोएम्प्ट एजु टेक ने अपनी सफाई पेश की है. कंपनी की ओर से कहा गया है कि हाल ही में सामने आए मामलों के पीछे किसी भी तरह की तकनीक से जुड़ी खामी नहीं थी.

इस कंपनी की तरफ से कहा गया है कि उसकी जांच में पता चला है कि ये मामला सॉफ्टवेयर या तकनीक के कारण नहीं हुआ था. कंपनी के अनुसार आंसर कॉपी की स्कैनिंग प्रक्रिया के वक्त ह्यूमन एरर की वजह से हुआ है. जिस वजह से एक छात्र को दूसरे छात्र की कॉपी दिख रही थी.

कंपनी ने कहा कि उसने इस मामले की जांच पूरी कर ली है और उस स्थान और व्यक्ति की पहचान भी कर ली गई है, जहां स्कैनिंग प्रक्रिया के दौरान ये गलती हुई थी. कंपनी का कहना है कि तकनीकी स्तर पर सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित और सही तरीके से काम कर रहा था.

95 फीसदी को मिली कॉपियां

रिपोर्ट्स के अनुसार जिन छात्रों ने अपनी आंसर कॉपी की स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था, उनमें से लगभग 95 फीसदी को कॉपियां उपलब्ध करा दी गई हैं. केवल कुछ सीमित मामलों में तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से देरी हुई है.

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क्वालिटी को लेकर कही ये बड़ी बात  

वहीं, छात्रों ने स्कैन की गई आंसर कॉपी की क्वालिटी को लेकर भी शिकायत की थी. स्टूडेंट्स ने कहा था कि उन्हें जो डिजिटल कॉपियां मिलीं, उनमें कुछ पेज धुंधले दिखाई दे रहे थे या लिखावट साफ नहीं थी. इस पर कंपनी ने कहा कि ऐसे मामलों की समीक्षा की जा रही है और वह मूल्यांकन अधिकारियों के साथ मिलकर समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रही है.

इसके अलावा कंपनी ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर कम गुणवत्ता वाले स्कैनर इस्तेमाल किए गए हैं. कंपनी की तरफ से कहा गया है कि स्कैनर मानकों के अनुसार ही हैं और देशभर में बड़े लेवल पर इस्तेमाल किए जाते हैं.

टेस्टिंग सर्वर तक बनाई थी पहुंच

सीबीएसई OSM के बीच 19 वर्षीय एथिकल हैकर ने प्लेटफॉर्म में कथित सुरक्षा खामियों की जानकारी उजागर की थी. इस पर भी कंपनी ने कहा है कि केवल एक टेस्टिंग सर्वर तक पहुंच बनाई गई थी, जिसका इस्तेमाल इंटरनल टेस्टिंग के लिए किया जाता था. कंपनी ने कहा है कि इस सर्वर का स्टूडेंट्स के डेटा से लेना देना नहीं है यहां केवल डमी डेटा था.

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