Bihar Education News: बिहार विधानसभा में प्राइवेट यूनिवर्सिटी संशोधन विधेयक पास, अब क्या बदलेगा और इसका विराेध क्यों?


Bihar Education News: बिहार विधानसभा में प्राइवेट यूनिवर्सिटी संशोधन विधेयक 2026 पारित हो गया है. सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य राज्य में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाना, निजी निवेश को प्रोत्साहन देना और बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों में पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों का पलायन कम करना है. वहीं विपक्ष का आरोप है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी की संख्या बढ़ने से उच्च शिक्षा महंगी हो सकती है और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि बिहार विधानसभा के प्राइवेट यूनिवर्सिटी संशोधन विधेयक का मकसद क्या है, इससे क्या बदलाव होंगे और इसे लेकर विवाद क्यों हो रहा है.
 
बिहार प्राइवेट यूनिवर्सिटी विधेयक का उद्देश्य 

सरकार के अनुसार राज्य में हर साल बड़ी संख्या में छात्र बेहतर उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में कहा कि केवल एमिटी यूनिवर्सिटी में ही बिहार के 30 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं, जबकि लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में करीब 11 हजार छात्र अध्ययन कर रहे हैं. इसके अलावा लाखों छात्र देशभर के प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए बिहार से बाहर जाते हैं. सरकार का कहना है कि अगर राज्य में ज्यादा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज स्थापित होंगे, तो छात्रों को गुणवत्तापूर्ण हायर एजुकेशन अपने ही राज्य में मिल सकेगी. इससे परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा, समय की बचत होगी और प्रतिभाओं का दूसरे राज्यों में पलायन भी घटेगा. 

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प्राइवेट यूनिवर्सिटी संशोधन विधेयक से क्या बदलेगा? 

उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नया कानून नहीं है, बल्कि 2013 के बिहार प्राइवेट यूनिवर्सिटी अधिनियम में संशोधन किया गया है. सरकार के अनुसार इन बदलाव का उद्देश्य राज्य के कानून को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों के अनुरूप बनाना और नए प्राइवेट यूनिवर्सिटी को अधिनियम के तहत शामिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है. मंत्री ने बताया कि वर्तमान में राज्य में 11 प्राइवेट यूनिवर्सिटी को मान्यता मिल चुकी है, वहीं भविष्य में यूजीसी के निर्धारित मांगों को पूरा करने वाले संस्थानों को मान्यता दी जाएगी. सरकार का दावा है कि इससे आधुनिक शैक्षिणिक ढांचा, रिसर्च की बेहतर सुविधाएं, रोजगार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दायरा राज्य के अंदर बढ़ेगा. 

इस विधेयक का क्यों हो रहा है विरोध?

इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने कई सवाल उठाए हैं. एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी के विस्तार से शिक्षा महंगी हो सकती है, जिससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए हायर एजुकेशन हासिल करना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने सरकार से ऐसे छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट प्रावधान करने की मांग की है. विधानसभा के बाहर भी संशोधन का विरोध देखने को मिला पटना विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और छात्र संगठनों ने सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया. उनका आरोप है कि प्रस्तावित बदलावों से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और प्रशासनिक अधिकारों में बदलाव से उच्च शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है. विरोध कर रहे संगठनों ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी भी दी. 

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बिहार से कितने छात्र दूसरे राज्यों में पढ़ाई के लिए जाते हैं? 

सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि बिहार से हर साल बड़ी संख्या में छात्र दूसरे राज्यों का रूख करते हैं. सीएम ने बताया कि केवल एमिटी यूनिवर्सिटी में 30 हजार से ज्यादा और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में करीब 11 हजार छात्र बिहार से पढ़ रहे हैं. सरकार का कहना है कि देशभर के प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बिहार के लाखों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, इसलिए राज्य में बेहतर उच्च शिक्षण संस्थानों की आवश्यकता महसूस की जा रही है. हालांकि श्रम संसाधन विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार बिहार से बाहर रहने वाले करीब 57 लाख लोगों में लगभग 5 लाख छात्र उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में रह रहे हैं, जबकि बाकि लोग रोजगार के लिए बाहर रह रहे हैं. 

सबसे ज्यादा छात्र किस राज्य से बाहर पढ़ने जाते हैं? 

अगर विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनसंख्या के अनुपात के आधार पर चंडीगढ़ देश में सबसे आगे हैं.  यहां प्रति 1 लाख आबादी पर सबसे ज्यादा छात्र विदेश में पढ़ाई के लिए जाते हैं. इसके बाद पंजाब, दिल्ली, आंध्र प्रदेश और केरल का स्थान आता है. वहीं कुल संख्या के आधार पर आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और गुजरात जैसे राज्य से सबसे ज्यादा छात्र विदेश पढ़ने जाते हैं. दूसरी और बिहार से बड़ी संख्या में छात्र फिलहाल देश के अंदर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक, महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालय का रुख करते हैं.

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