कहां से लीक हुआ नीट का पेपर, कैसे पूरे देश में फैला? समझ लें नेटवर्क


NEET UG 2026 Exam Leaked: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा 3 मई को आयोजित की गई NEET 2026 परीक्षा के रद्द होने के बाद अब पूरे देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इतनी सुरक्षित मानी जाने वाली परीक्षा में सेंध लगी कैसे. पेपर लीक की खबरों ने न केवल लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है. बल्कि एग्जाम सिस्टम की खामियों को भी उजागर किया है. शुरुआत में पेपर लीक की बात को सिरे से खारिज करने वाले सिस्टम को अब जांच के घेरे में आना पड़ा है.

छात्र और अभिभावक यह जानना चाहते हैं कि इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड कौन है और यह जाल नासिक से लेकर हरियाणा और फिर देशभर में कैसे फैल गया. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है. पेपर लीक के नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं. जो बताती हैं कि यह कोई छोटी-मोटी घटना नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी. जान लीजिए पूरी खबर.

नासिक से सीकर तक ऐसे फैला नेटवर्क

इस बार पेपर लीक का जो रूट सामने आया है. उसने जांच एजेंसियों को भी चकित कर दिया है. जांच के मुताबिक पेपर सबसे पहले नासिक से लीक होकर हरियाणा पहुंचा. इसके बाद इस सिंडिकेट ने इसे हरियाणा से जयपुर और फिर जयपुर से जमवारामगढ़ भेजा. यहां से पेपर को सीकर ले जाया गया. जो इस पूरे खेल का मेन सेंटर बनकर उभरा.

राजस्थान का सीकर जो अपनी कोचिंग इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है. इस बार पेपर बांटने का सबसे बड़ा अड्डा बना. यहां से पेपर को केवल राजस्थान ही नहीं. बल्कि जम्मू-कश्मीर, बिहार, केरल और उत्तराखंड जैसे दूर-दराज के राज्यों में भी फैला दिया गया. डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर इस नेटवर्क ने देखते ही देखते पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया.

See also  CBSE’s 3-Language Formula For Class 9: What Is R1, R2, R3? What Has Changed? What Hasn’t? | Explainers News

यह भी पढ़ें: NEET Paper Leak: नीट एग्जाम में कब-कब हो चुका पेपर लीक? जानें हर बार की पूरी जानकारी

गेस पेपर के नाम पर हुई बड़ी साजिश

SOG की जांच के अनुसार जालसाजों ने छात्रों और एजेंसियों को गुमराह करने के लिए गेस पेपर(Guess Paper) शब्द का इस्तेमाल एक ढाल की तरह किया. नेटवर्क से जुड़े लोगों ने यह दावा किया कि उनके पास आने वाला पेपर केवल संभावित प्रश्न हैं. लेकिन असल में वह हूबहू मुख्य परीक्षा का असली प्रश्नपत्र था.

यह फंडा दरअसल जांच एजेंसियों से बचने और कानूनी कार्रवाई को चकमा देने की एक शातिर चाल थी. इसके बदले में छात्रों और उनके परिवारों से लाखों की मोटी रकम वसूली गई. इस झांसे का शिकार कई मासूम छात्र भी हुए और कुछ लालची लोग भी इस दलदल में फंस गए.

संगठित सिंडिकेट ने सिस्टम में लगाई सेंध

SOG की पड़ताल में यह साफ हो गया है कि इस पूरे खेल के पीछे कोई एक व्यक्ति नहीं. बल्कि एक पूरा संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था. इस नेटवर्क में छोटे कोचिंग सेंटर्स के संचालक और कंप्यूटर लैब के कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं. जो एक कड़ी की तरह जुड़े हुए थे. यह नेटवर्क इतना मजबूत था कि परीक्षा से कुछ घंटे पहले ही सटीक जानकारी सिलेक्टेड कैंडिडेट्स तक पहुँचा दी गई थी.

फिलहाल राजस्थान पुलिस और अन्य एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही हैं. डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाले जा रहे हैं जिससे उस मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके. जिसने लाखों मेहनती छात्रों के सपनों को दांव पर लगा दिया है.

See also  IP University introduces seven new paramedical programmes; applications open till May 31 | Education News

यह भी पढ़ें: NEET UG 2026 Cancelled: NEET 2026 रद्द हो गई है छात्रों की फीस कैसे वापस होगी और इसमें कितना लगेगा वक्त? जान नें पूरी प्रक्रिया

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required