NEET UG Cutoff 2026: इस बार कितनी रहेगी नीट 2026 की कट ऑफ? चौंकाकर रख देगी एक्सपर्ट्स की यह बात


NEET UG Cutoff 2026: देश का सबसे बड़ा मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम नीट यूजी 2026 इस बार 3 मई को रिकॉर्ड स्तर पर आयोजित हुआ है, जिसमें लाखों छात्रों ने हिस्सा लिया है. इस बार करीब 22.80 लाख रजिस्टर्ड उम्मीदवारों में से 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने नीट यूजी 2026 की परीक्षा दी. यानी लगभग 96 प्रतिशत से ज्यादा उपस्थिति दर्ज की. इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के शामिल होने से कंपटीशन पहले से ज्यादा बढ़ गया है. परीक्षा के स्तर की बात करें तो छात्रों ने आसान और स्कोरिंग बताया. वहीं अब परीक्षा खत्म होते ही सबसे बड़ा सवाल कट ऑफ लेकर उठ रहा है.

छात्रों और पेरेंट्स के बीच यह जानने को लेकर उत्सुकता है कि आखिर इस बार सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए कितने अंक जरूरी होंगे. एक्सपर्ट्स की राय के आधार पर मिल रहे उत्तरों के अनुसार इस साल कट ऑफ पिछले सालों के मुकाबले हाई रह सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि इस बार नीट 2026 की कट ऑफ कितनी रह सकती है?

कैसा था इस बार का नीट 2026 का पेपर?

परीक्षा देकर निकले ज्यादातर छात्रों ने पेपर को इस बार आसान और मीडियम लेवल का बताया. बायोलॉजी सेक्शन को ज्यादा स्कोरिंग माना गया, क्योंकि ज्यादातर सवाल एनसीईआरटी आधारित है. हालांकि इसमें मल्टीपल स्टेटमेंट और मैच द कॉलम जैसे सवालों के कारण पेपर थोड़ा लंबा जरूर रहा. वहीं फिजिक्स को सबसे टफ माना गया, जहां गणना वाले सवाल ज्यादा थे और टाइम मैनेजमेंट में दिक्कत आई. केमिस्ट्री का स्तर आसान से मीडियम के बीच रहा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेपर संतुलित था और अच्छी तैयारी करने वालों छात्रों के लिए इसे हल करना आसान था.

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एक्सपर्ट ने बताई अनुमानित कट ऑफ

परीक्षा के स्तर और छात्रों की संख्या को देखते हुए इस बार कट ऑफ बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार जनरल कैटेगरी के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट पाने के लिए लगभग 620 से 650 अंक की जरूरत पड़ सकती है. कुछ एक्सपर्ट्स ने इसे 620 से 635 के बीच बताया, जिसे सुरक्षित स्कोर माना जा रहा है. वहीं ओबीसी कैटेगरी के लिए कट ऑफ 590 से 630 अंक के आसपास रहने का अंदाजा लगाया जा रहा है. एससी वर्ग के लिए 400 से 520 और एसटी के लिए 420 से 500 अंकों के बीच रहने का अनुमान लगाया जा रहा है. वहीं क्वालीफाइंग कट ऑफ की बात करें तो जनरल और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए 50 परसेंटाइल यानी करीब 686 से 144 अंक के बीच रहने की संभावना है. ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लिए यह 40 परसेंटाइल यानी लगभग 143 से 113 के अंक के बीच रह सकती है.

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क्यों बढ़ सकती है कट ऑफ?

इस साल कट ऑफ बढ़ने की मुख्य वजहों में पेपर का अपेक्षाकृत आसान होना और बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी शामिल है. 22 लाख से ज्यादा छात्रों के शामिल होने से प्रतियोगिता पहले से ज्यादा हो गई है. इसके अलावा बेहतर तैयारी और कोचिंग सपोर्ट के कारण भी छात्रों की कुल स्कोरिंग बढ़ने की उम्मीद है.

काउंसलिंग और आगे की प्रक्रिया

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नीट यूजी के स्कोर के आधार पर ही ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग में शामिल होने की पात्रता तय होगी, जिसे मेडिकल काउंसलिंग कमेटी आयोजित करती है. इसके अलावा राज्यों की अलग-अलग काउंसलिंग प्रक्रिया भी होती है, इसी के जरिए एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस और दूसरे मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन मिलता है. वहीं इस बार परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष बनाने के लिए तकनीक का व्यापक इस्तेमाल भी किया गया. कई सेंसिटिव केंद्रों पर लाइव मॉनिटरिंग की गई और सीसीटीवी के जरिए हर एक्टिविटी पर नजर रखी गई. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी गई और फर्जी पेपर बेचने वाले कई चैनलों को बंद किया गया.

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