सब पढ़ें, सब बढ़ें! शिक्षा प्राप्‍त करने का अधिकार है ‘RTE’, कैसे इसके तहत मिलता है स्‍कूलों में एडमिशन,जानें पूरा प्रोसेस| Explained – एजुकेशन


Rigth to Education

RTE 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे के लिए शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाता है।

हाइलाइट्स

  • RTE अधिनियम 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे के लिए शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाता है।
  • इसके अंतर्गत सभी निजी स्कूलों को बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करनी होंगी।
  • यह सभी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को निजी स्कूलों में प्रवेश देने से भी रोकता है।

देश का हर बच्‍चा पढ़े, शिक्षा का ज्ञान हर घर का रोशन करे। इसी मकसद के साथ केंद्र सरकार लगातार शिक्षा क्षेत्र को अपग्रेड करने में लगी है। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम या शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 4 अगस्त 2009 को भारतीय संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है। जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21a के अंतर्गत भारत में 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के महत्व के स्वरूप का वर्णन करता है।

1 अप्रैल 2010 को इस अधिनियम के लागू होने के बाद, भारत उन 135 देशों में से एक बन गया, जिन्होंने शिक्षा को प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार बनाया। ये महज अधिकार ही नहीं बल्कि देश के हर बच्‍चे को दिया गया वो हक है। जिससे वे अपने पैरों पर खड़ें हो, आत्‍मनिर्भर बनें और अपना और देश का नाम दुनियाभर में मशहूर करें।

जानिए आखिर क्‍या है आरटीई

righttoeducation.in के अनुसार,यह अधिनियम 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे के लिए शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाता है। प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम मानदंड निर्दिष्ट करता है। इसके अंतर्गत सभी निजी स्कूलों को बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करनी होंगी (जिसकी प्रतिपूर्ति राज्य द्वारा सार्वजनिक-निजी भागीदारी योजना के तहत की जाएगी)। बच्चों को आर्थिक स्थिति या जाति आधारित आरक्षण के आधार पर निजी स्कूलों में प्रवेश दिया जाता है।

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