झारखंड में 22 परीक्षाएं रद्द, 2394 की नौकरी पर तलवार, अब क्या है आगे का रास्ता? 


Jharkhand Exam Controversy: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है. झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से 22 भर्ती परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है. सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर इन परीक्षाओं को रद्द करने के साथ ही 6 परीक्षाओं की जांच पूरी होने तक रोकने और 17 पुरानी भर्तियों को सीआईडी जांच के दायरे में रखने का फैसला किया था.

इस फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों के सामने भी नौकरी को लेकर संकट खड़ा हो गया था, जो इन परीक्षाओं में सफल होकर सरकारी सेवा में नियुक्त हो चुके थे. इसके बाद अब हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है. हालांकि मामले की आगे की सुनवाई में सरकार को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा.

क्या था पूरा मामला?

दरअसल, झारखंड सरकार ने परीक्षाओं में गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच के बीच JPSC-JSSC और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी की कई भर्ती परीक्षाओं पर कार्रवाई की थी. इसमें 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया, 6 पर जांच लंबित रहने तक रोक लगा दी और 17 पुरानी जेपीएससी भर्तियों पर सीआईडी जांच के आदेश दिए गए. सरकार के इस फैसले से सबसे बड़ा सवाल उन उम्मीदवारों को लेकर उठा था, जिन्हें परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति मिल चुकी थी. वहीं, चार रद्द की गई भर्तियां ऐसी थी जो नियुक्ति के चरण तक पहुंच चुकी थी. इनमें 11वीं-13वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से 342 पदों पर नियुक्तियां, JSSC-CGL से 1932 नियुक्तियां, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के 64 पद और फूड सेफ्टी ऑफिसर के 56 पद शामिल थे.

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चयनित अभ्यर्थियों के सामने आया था संकट 

परीक्षा रद्द होने के बाद पहले से सरकारी सेवा में काम कर रहे उम्मीदवारों को अपने भविष्य को लेकर कोई स्पष्टता नहीं थी. कई अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की, नियुक्ति हासिल की और इसके बाद सरकारी सेवा में योगदान दिया. ऐसे में बिना उनकी व्यक्तिगत भूमिका की जांच किए नियुक्ति पर सवाल उठाना उनके लिए बड़ी समस्या हो सकती है‌. इनमें से कुछ चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें सरकार की ओर से यह जानकारी नहीं मिली कि अब उनकी नियुक्ति का क्या होगा. इसके बाद इन चयनित अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का रुख करने का फैसला लिया था. 

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अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में क्या दलील दी?

याचिकार्ताओं का कहना है कि सरकार ने उनका पक्ष सुने बिना परीक्षा और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द कर दिया. उनके अनुसार अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है, तो जांच के आधार पर दोषी उम्मीदवार या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए. अभ्यर्थियों का सवाल है कि बिना व्यक्तिगत जांच के और किसी उम्मीदवार के खिलाफ बिना सबूत के पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करके उन लोगों को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है, जिन्होंने सामान्य प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास दी और नियुक्ति पाई. अभ्यर्थियों की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि उनके मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया. उनके वकील के अनुसार, सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि किस आधार पर पूरी परीक्षा और उससे हुई नियुक्तियों को रद्द किया गया है. 

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अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रद्द की गई परीक्षाओं और उनसे हुई नियुक्तियों का अंतिम भविष्य क्या होगा. वहीं हाईकोर्ट की रोक से उन अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है, जिनकी नौकरी या चयन प्रक्रिया सरकार के फैसले से प्रभावित हो रही थी. माना जा रहा है कि आगे की स्थिति अदालत के अंतिम आदेश पर निर्भर करेगी. सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए कई कदमों का ऐलान किया है. JPSC और JSSC से जुड़ी अनियमत्ताओं के मामले की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रेक कोड बनाने का अनुरोध किया जाएगा. दोनों आयोग में आंतरिक मॉनिटरिंग या विजिलेंस सेल बनाने के बात भी कही गई है.

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