AI आधारित शिक्षा की ओर बढ़ रहे बिजनेस स्कूल, कैसे बदल रही मैनेजमेंट की पढ़ाई? 


AI in Education: एआई, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन अब केवल बिजनेस को सपोर्ट करने वाले टूल नहीं रह गए हैं, बल्कि आज के दौर में यही तकनीक कंपनियों के काम करने के तरीके, अर्थव्यवस्था की दिशा और करियर की जरूरतों को तय कर रही है. ऐसे में मैनेजमेंट एजुकेशन भी तेजी से बदल रहा है. बिजनेस स्कूल अब पहले की तरह होने वाली पढ़ाई से आगे बढ़ते हुए एआई, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल स्किल पर आधारित कोर्स तैयार कर रहे हैं, ताकि छात्र भविष्य की इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार खुद को तैयार कर सके. 

क्यों बदल रही है मैनेजमेंट एजुकेशन? 

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में शामिल है, देश में एआई अपनाने की रफ्तार बढ़ रही है. स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है और फिनटेक से लेकर लगभग हर सेक्टर में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इसके साथ ही भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स की संख्या भी बढ़ रही है, जहां ऐसे प्रोफेशनल्स की मांग है जो तकनीकी और मैनेजमेंट दोनों की समझ रखते हो.

इसके अलावा EY GCC Pulse Survey 2025 के अनुसार, भारत के 83 प्रतिशत GCCs जेनरेटिव एआई में निवेश कर रहे हैं. इनमें कस्टमर सर्विस, फाइनेंस ऑपरेशंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे प्रमुख क्षेत्र प्रमुख है. वहीं 58 प्रतिशत संस्थान एजेंटिक एआई पर भी काम कर रहे हैं. दूसरी और इंडीड और NASSCOM की रिपोर्ट बताती है कि 32 प्रतिशत कंपनियां भर्ती के दौरान एआई स्किल्स, सर्टिफिकेट और डिग्री को समान महत्व देती है, जबकि 40 प्रतिशत नियोक्ता डिग्री से ज्यादा व्यावहारिक एआई स्किल वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देते हैं. 

See also  IIT Madras Director Demonstrates How Telegram Feature Can Be Misused, X Users Say 'Misleading The Masses' | Education and Career News

ये भी पढ़ें-NEET UG 2026 काउंसलिंग का आगाज, रजिस्ट्रेशन के वक्त इन बातों का रखें ध्यान

अब सिर्फ किताबों की पढ़ाई काफी नहीं 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल क्लासरूम, लेक्चर और किताबों पर आधारित पढ़ाई अब छात्रों को इंडस्ट्री के लिए तैयार नहीं कर सकती. इस वजह से कई यूनिवर्सिटी और बिजनेस स्कूल अपने कोर्स में डिजिटल मार्केटिंग, डेटा एनालिटिक्स और जेनरेटिव एआई जैसे विषयों को शामिल करना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही छात्रों को लाइव इंटर्नशिप, एआई आधारित सिमुलेशन, एक्सपीरियंशियल लर्निंग और स्टार्टअप लैब्स के जरिए वास्तविक कारोबारी चुनौतियों से परिचित कराया जा रहा है, ताकि वह पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी हासिल कर सके. 

एआई के साथ नैतिक जिम्मेदारी भी जरूरी 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एआई का बढ़ता उपयोग केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि इसका असर रोजगार, गोपनीयता और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी पड़ता है. ऐसे में बिजनेस स्कूल के लिए यह जरूरी है कि वह छात्रों को केवल एआई का इस्तेमाल करना न सिखाए, बल्कि उन्हें तकनीक के सामाजिक और नैतिक पहलुओं से भी परीक्षित कराएं.

ये भी पढ़ें-पंजाब में MBBS-BDS एडमिशन नीति लागू, सरकारी कॉलेज के लिए लगेगा 20 लाख का बॉन्ड

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

See also  IIT Delhi introduces tiered industry membership programme with research, innovation and R&D access

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required