US Students Visa Rules: अमेरिका में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बड़ा अपडेट, 15 सितंबर से बदलेंगे स्टूडेंट वीजा नियम


US Students Visa Rules: अमेरिका में जाकर पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे हजारों भारतीय छात्रों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अमेरिकी सरकार 15 सितंबर 2026 से स्टूडेंट और एक्सचेंज वीजा से जुड़े नियमों में अहम बदलाव लागू करने जा रही है. इसके तहत वर्षों से लागू ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस व्यवस्था को खत्म कर फिक्स टाइम पीरियड ऑफ एडमिशन सिस्टम लागू किया जाएगा. इस बदलाव को देखते हुए अमेरिका की कई यूनिवर्सिटीज ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को सलाह दी है कि वह 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौट जाएं, ताकि नए नियम लागू होने के बाद किसी तरह की प्रशासनिक या इमीग्रेशन संबंधी परेशानी का सामना न करने पड़े. यह बदलाव अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग की नई नीति के तहत किया जा रहा है. इसका असर एफ-1 स्टूडेंट वीजा, जे-1 एक्सचेंज विजिटर और दूसरे कैटेगरी के वीजा धारकों पर पड़ेगा. खासतौर पर भारत जैसे देशों के हजारों छात्र जो हर साल अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाते हैं, उन्हें अब अपने वीजा और अधिकृत रहने की अवधि पर पहले से ज्यादा नजर रखनी होगी. 

क्या बदलाव होने जा रहा है? 

अब तक अमेरिका में एफ-1 वीजा पर पढ़ने वाले छात्रों को ड्यूरेशन ऑफ स्टेट्स के तहत प्रवेश दिया जाता था. यानी जब तक छात्र अपने कोर्स की शर्तों का पालन करता था, फुल टाइम पढ़ाई जारी रखता था और वीजा नियमों का पालन करता था, तब तक वह अमेरिका में रह सकता था. उसके रहने की अवधि किसी तारीख से नहीं जुड़ी होती थी. लेकिन 15 सितंबर 2026 से यह व्यवस्था बदल जाएगी. नए नियम के तहत अमेरिका में प्रवेश करते समय छात्रों को एक निर्धारित अवधि दी जाएगी, जिसकी समाप्ति की तारीख पहले से तय होगी. अगर किसी छात्र का कोर्स उस अवधि से ज्यादा लंबा चलता है तो उसे समय रहते अपने स्टेट को बढ़ाने के लिए आवेदन करना होगा या फिर दोबारा प्रवेश की प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी. 

See also  Muharram Holiday Confusion: Will You Get A 3-Day Weekend Or Will Friday Ruin The Fun?

4 साल तक सीमित हो सकती है अनुमति 

नई व्यवस्था के अनुसार ज्यादातर एफ-1 छात्रों को उनके एकेडमी कार्यक्रम की अवधि के अनुसार अधिकतम 4 साल तक रहने की अनुमति मिलेगी. कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें 30 दिन की ग्रेस पीरियड भी मिलेगी. अभी तक छात्र की पढ़ाई पूरी होने के बाद आमतौर पर 60 दिन की ग्रेस पीरियड मिलती थी. इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ सकता है, जो पीएचडी, रिसर्च इंटीग्रेटेड डिग्री जैसे लंबे कोर्स कर रहे हैं. ऐसे मामलों में अगर पढ़ाई 4 साल से ज्यादा चलती है, तो छात्रों को समय रहते यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज से स्टे एक्सटेंशन के लिए आवेदन करना होगा. इसके लिए अपडेटेड फोरम आई-120, अतिरिक्त समय की आवश्यकता से जुड़े डॉक्यूमेंट और कई मामलों में वित्तीय संसाधनों का प्रमाण भी देना होगा. 

ये भी पढ़ें-Naresh Pal Gangwar: कौन हैं उच्च शिक्षा विभाग के नए सचिव नरेश पाल गंगवार? पढ़ाई से लेकर सैलरी तक जानिए सबकुछ 

ओवरस्टे पर सख्त होंगे नियम 

नई व्यवस्था के तहत अवधि खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रुकने वाले छात्रों के लिए नियम पहले से ज्यादा सख्त होंगे. अधिकृत अवधि समाप्त होने के बाद अगर कोई छात्र बिना परमिशन अमेरिका में रहता है, तो उसके खिलाफ Unlawful Presence की गिनती शुरू हो जाएगी. अगर कोई व्यक्ति 180 दिन से ज्यादा समय तक अवैध रूप से रहता है, तो उस पर 3 साल तक दोबारा अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगा सकती है. वहीं एक साल या उससे ज्यादा समय तक ओवर स्टे करने पर 10 साल तक का री एंट्री बैन लगाया जा सकता है. 

See also  UPSC CSE Prelims 2026 LIVE Updates: Exam Date, Timing, Dress Code, Important Guidelines and Instructions for Prohibited Items, Things to Carry

कोर्स और यूनिवर्सिटी बदलना भी होगा मुश्किल? 

नई नीति के तहत पढ़ाई के दौरान कोर्स, मेजर या संस्थान बदलने के नियम भी पहले से सख्त किए जा रहे हैं. अंडर ग्रेजुएट स्तर के एफ-1 छात्रों को पहले वर्ष के दौरान सामान्य परिस्थितियों में अपना कोर्स या मेजर बदलने की अनुमति नहीं होगी. केवल विशेष परिस्थितियों में ही स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम इसकी अनुमति दे सकता है. वहीं ग्रेजुएट छात्रों के लिए भी प्रोग्राम बदलने दूसरे संस्थान में ट्रांसफर लेने की प्रक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा सीमित होगी.

ये भी पढ़ें-आंदोलन से झुकी सरकार? NTA में सुधारों को लेकर रात 8 बजे बड़ा एलान संभव

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required