Skills Based Hiring: जॉब में डिग्री नहीं, स्किल्स की बढ़ी अहमियत, भारत की 89 प्रतिशत कंपनियां अब ऐसे कर रहीं भर्ती


Skills Based Hiring: भारत में नौकरी देने का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब सिर्फ डिग्री, कॉलेज का नाम या अच्छे मार्क्स ही नौकरी की गारंटी नहीं रही, बल्कि कंपनियां उम्मीदवारों की स्किल्स को ज्यादा महत्व दे रही है. इसी के चलते भारत की 89 प्रतिशत कंपनियां एंट्री लेवल नौकरियों के लिए स्किल बेस्ड हायरिंग को बड़े स्तर पर अपना रही है. यह जानकारी कोर्सेरा की माइक्रो क्रेडेंशियल्स इम्पैक्ट रिपोर्ट 2026 में सामने आई है. यह रिपोर्ट भारत समेत 7 देश के 3500 ज्यादा स्टूडेंट्स एंप्लॉयर और हायर एजुकेशन के प्रतिनिधियों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित है. रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग सभी कंपनियां किसी न किसी रूप में स्किल्स के आधार पर भर्ती कर रही है. यह आंकड़ा वैश्विक औसत 82 प्रतिशत से भी अधिक है. 

डिग्री से ज्यादा नौकरी के लिए जरूरी हुई स्किल्स 

रिपोर्ट के अनुसार कंपनियां अब भर्ती के दौरान पहले की तरह कॉलेज के नाम, जीपीए या केवल डिग्री के आधार पर कम ध्यान दे रही है. इसके बजाय वह ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही है, जिनके पास प्रमाणित और नौकरी के लिए तैयार स्किल्स हो. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि माइक्रो क्रेडेंशियल्स हासिल करने वाले 91 प्रतिशत भारतीय ग्रेजुएट्स को पढ़ाई पूरी करने के 12 महीना के अंदर अपने क्षेत्र से जुड़ी नौकरी मिल गई. वहीं 97 प्रतिशत व्यक्तियों का कहना है कि माइक्रो क्रेडेंशियल्स वाले एंट्री लेवल कर्मचारी अपने पहले साल में बेहतर प्रदर्शन करते हैं. 

क्या है माइक्रो-क्रेडेंशियल्स?

See also  kite.kerala.gov.in Plus Two marksheet link activated now; 6 steps to download scorecard PDF

माइक्रो-क्रेडेंशियल्स ऐसे छोटे अवधि के प्रोफेशनल सर्टिफिकेट या कोर्स होते हैं, जो किसी स्पेशल के लिए इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार तैयार किए जाते हैं. इनका उद्देश्य उम्मीदवारों को नौकरी के लिए जरूरी व्यावहारिक कौशल प्रदान करना होता है. 

भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले सर्टिफिकेट कोर्स

  • Google Data Analytics
  • Google AI
  • Google IT Automation with python
  • Google digital marketing & e-commerce
  • Google Cybersecurity
  • Google UX Design
  • IBM Data Science
  • IBM AI engineering
  • Microsoft Power BI Data Analyst

इंडस्ट्री से जुड़े सर्टिफिकेट पर कंपनियों का भरोसा 

रिपोर्ट बताती है कि भारत के 95 प्रतिशत नियोक्ता ऐसे माइक्रो-क्रेडेंशियल्स को ज्यादा महत्व देते हैं, जिन्हें इंडस्ट्री के सहयोग से तैयार किया गया हो. वहीं 81 प्रतिशत कंपनियों का कहना है कि ऐसे उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में तेजी से आगे बढ़ते हैं. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 73 प्रतिशत है. 

ये भी पढ़ें-DU UG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजी एडमिशन के लिए आज जारी होगी पहली लिस्ट, 18 जुलाई तक करनी होगी सीट एक्सेप्ट

स्टूडेंट क्रेडिट वाले माइक्रो-क्रेडेंशियल को प्राथमिकता 

रिपोर्ट के अनुसार भारत के छात्र उन माइक्रो-क्रेडेंशियल्स को ज्यादा चुन रहे हैं, जिनके साथ औपचारिक एकेडमी क्रेडिट की सुविधा मिलती है. 73 प्रतिशत छात्र ऐसे कोर्स करना चाहते हैं, जिनमें क्रेडिट की व्यवस्था हो, जबकि केवल 21 प्रतिशत छात्र बिना क्रेडिट वाले माइक्रो-क्रेडेंशियल्स में रुचि दिखाते हैं. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट के सामने अभी भी इस व्यवस्था को व्यापक स्तर पर लागू करने की चुनौती बनी हुई है. 71 प्रतिशत हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधियों का मानना है कि बाहरी क्रेडिट रिकग्निशन सिस्टम माइक्रो-क्रेडेंशियल्स को पढ़ाई का हिस्सा बनाने में मदद करते हैं, लेकिन यह आंकड़ा वैश्विक औसत 79 प्रतिशत से कम है. 

See also  Uniforms to be introduced in UP government and aided colleges | Education News

इंस्टीट्यूट्स के लिए भी बढ़ रहा दबाव 

रिपोर्ट के अनुसार भारत के 50 प्रतिशत हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधियों का मानना है कि अगर इंस्टीट्यूट अपने पाठ्यक्रम में माइक्रो-क्रेडेंशियल्स को शामिल नहीं करते हैं, तो उन्हें रणनीतिक स्तर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसकी वजह नियोक्ताओं के बीच कम स्वीकार्यता और समय के साथ पाठ्यक्रम को अपडेट करने में देरी जैसी समस्याएं बताई गई है.

ये भी पढ़ें-ISRO Scientist Job: ISRO में कैसे मिलती है जॉब, कितनी होती है सैलरी और शिफ्ट टाइमिंग; यहां इस्तीफा देने का क्या है नियम?

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required