Degree vs Skill : डिग्री से ज्यादा स्किल की बढ़ती मांग, आखिर नौकरी की दुनिया में क्या बदल रहा है?


Degree vs Skill : पहले जहां अच्छी नौकरी पाने का मतलब किसी बड़े कॉलेज की डिग्री हासिल करना माना जाता था, वहीं अब नौकरी की दुनिया तेजी से बदल रही है. नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बदलती इंडस्ट्री की जरूरतों ने कंपनियों के भर्ती करने के तरीके को भी बदल दिया है. अब सिर्फ यह नहीं देखा जा रहा कि उम्मीदवार ने किस कॉलेज से पढ़ाई की है, बल्कि यह ज्यादा जरूरी हो गया है कि वह सच काम कितना अच्छे से काम कर सकता है. यही वजह है कि आज कंपनियां डिग्री के साथ-साथ उम्मीदवार की स्किल, प्रोजेक्ट एक्सपीरियंस और प्रैक्टिकल नॉलेज को ज्यादा महत्व देने लगी हैं. हाल के सर्वे और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स भी इसी बदलाव की ओर इशारा करते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि नौकरी की दुनिया में क्या बदल रहा है. 

नौकरी की दुनिया में क्या बदल रहा है?

हायरिंग प्लेटफॉर्म और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में लगभग 80 प्रतिशत नियोक्ता अब स्किल-फर्स्ट हायरिंग मॉडल अपना रहे हैं. इसका मतलब है कि भर्ती के दौरान उम्मीदवार की तकनीकी क्षमता, प्रैक्टिकल स्किल और एक्सपीरियंस को पहले देखा जा रहा है, जबकि डिग्री को पहले जैसी प्राथमिकता नहीं मिल रही.  वहीं एक अन्य सर्वे में 82 प्रतिशत भारतीय प्रोफेशनल्स ने माना कि अब कंपनियां सही स्किल रखने वाले उम्मीदवारों को डिग्री से ज्यादा महत्व दे रही हैं. अब नौकरी पाने के लिए सिर्फ पढ़ाई पूरी करना काफी नहीं है, बल्कि जरूरी स्किल सीखना भी उतना ही जरूरी हो गया है. 2026 में भारत की कई कंपनियां भर्ती के लिए हाइब्रिड इवैल्यूएशन मॉडल अपना रही हैं. इस मॉडल में डिग्री और स्किल दोनों को महत्व दिया जाता है, लेकिन दोनों का रोल अलग-अलग होता है

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डिग्री क्या साबित करती है?

डिग्री यह दिखाती है कि उम्मीदवार ने किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से पढ़ाई पूरी की है. यह उसकी बेसिक नॉलेज, पढ़ाई के प्रति अनुशासन और लंबे समय तक सीखने की क्षमता का प्रमाण मानी जाती है. कई कंपनियों में डिग्री अभी भी शुरुआती स्क्रीनिंग का हिस्सा होती है. 

स्किल क्यों बन रही है ज्यादा जरूरी?

भर्ती के लास्ट स्टेप में कंपनियां यह देखती हैं कि उम्मीदवार सच में काम कितनी अच्छी तरह कर सकता है. उसके पास ऐसी स्किल हो जिससे वह पहले दिन से ही काम संभाल सके. इसलिए अब तकनीकी क्षमता, प्रोजेक्ट एक्सपीरियंस और प्रैक्टिकल नॉलेज का महत्व लगातार बढ़ रहा है. 

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रिपोर्ट में क्या सामने आया?

2026 इंडिया एम्प्लॉयबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार भारत के करीब 68 प्रतिशत स्टार्टअप्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) ने भर्ती के दौरान न्यूनतम CGPA की शर्त को हटा दिया है. इसकी जगह अब स्किल आधारित असेसमेंट और टेस्ट को प्राथमिकता दी जा रही है. इसका मतलब है कि अब सिर्फ अच्छे नंबर ही नौकरी की गारंटी नहीं हैं. कंपनियां उम्मीदवार की स्किल्स को परखने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. 

किन स्किल्स की सबसे ज्यादा मांग बढ़ रही है?

आज के समय में कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल मार्केटिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजाइन जैसी तकनीकी स्किल्स हों. इसके साथ ही सस्टेनेबिलिटी (ESG) से जुड़ी जानकारी और कम्युनिकेशन, समस्या समाधान, टीमवर्क साथ ही सही निर्णय लेने जैसी सॉफ्ट स्किल्स की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. बदलते जॉब मार्केट में तकनीकी जानकारी के साथ प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस और मजबूत सॉफ्ट स्किल्स रखने वाले उम्मीदवारों के लिए रोजगार के अवसर ज्यादा हैं. 

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