खास दुकान से किताबें-यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव नहीं डाल पाएंगे स्कूल, शिकायत पर तुरंत होगा एक्शन


हर साल जब भी नया अकैडमिक सेशन शुरू होता है तो अभिभावकों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं. स्कूल की भारी-भरकम फीस के अलावा सबसे बड़ा सिरदर्द होता है किताबें, कॉपियां और स्कूल यूनिफॉर्म खरीदना. अक्सर देखा गया है कि कई स्कूल पैरेंट्स पर दबाव बनाते हैं कि वे स्कूल से संबंधित सामान किसी तय दुकान से ही खरीदें, जबकि उस दुकान पर सामान बाजार से कहीं ज्यादा महंगा मिलता है. अब महाराष्ट्र में पैरेंट्स को इस लूट और मानसिक परेशानी से राहत मिलने वाली है. दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने मनमानी करने वाले ऐसे स्कूलों के खिलाफ एक्शन लेने का मन बना लिया है.

विधान परिषद में उठा अभिभावकों का दर्द

यह मुद्दा हाल ही में महाराष्ट्र विधान परिषद में गूंजा. विधान परिषद के सदस्य सुधाकर अडबाले ने पैरेंट्स की इस परेशानी को सदन के सामने रखा. उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसे कई स्कूल हैं, जो शिक्षा के नाम पर कारोबार कर रहे हैं. अडबाले ने बताया कि ये स्कूल अभिभावकों को सीधे तौर पर मजबूर करते हैं कि वे स्कूल की ड्रेस, किताबें, जूते और अन्य जरूरी सामान किसी खास दुकान से ही खरीदें. अगर कोई अभिभावक बाहर से सामान खरीदता है तो स्कूल मैनेजमेंट उसे स्वीकार नहीं करता. इन खास दुकानों पर किताबों और यूनिफॉर्म के दाम आम बाजार से दोगुने या उससे भी ज्यादा होते हैं, जिससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों का बजट पूरी तरह से बिगड़ जाता है.

सरकार ने अपनाया सख्त रुख

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इस गंभीर मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार की तरफ से राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की व्यावसायिक जबरदस्ती को सरकार कतई बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने बताया कि यह नियम केवल स्टेट बोर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राइवेट, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा. कोई भी स्कूल पैरेंट्स को किसी खास दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार पहले भी ऐसे मामलों को गंभीरता से ले चुकी है और नियमों का उल्लंघन करने वाले कुछ स्कूलों पर कार्रवाई भी की गई है.

कैसे रुकेगी स्कूलों की यह मनमानी?

  • नोडल अधिकारियों की नियुक्ति: राज्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक विभागीय उपनिदेशक कार्यालय के अंतर्गत नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे.
  • निरंतर निगरानी: ये नोडल अधिकारी सहायक निदेशक के नियंत्रण में काम करेंगे. इनका मुख्य काम स्कूलों में शैक्षणिक सामग्री की खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रखना होगा.
  • तत्काल कार्रवाई: अगर निगरानी के दौरान यह पाया जाता है कि कोई स्कूल पैरेंट्स पर किसी खास दुकान से खरीदारी का दबाव बना रहा है तो ये अधिकारी तुरंत उस स्कूल के खिलाफ एक्शन लेंगे.

बनेगी ब्लैकलिस्ट, होगी दंडात्मक कार्रवाई

डॉ. पंकज भोयर ने बताया कि जनप्रतिनिधियों (विधायकों, पार्षदों आदि) के पास स्कूलों के खिलाफ जो भी शिकायतें आती हैं, उनका डेटाबेस तैयार किया जाएगा. जिन स्कूलों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें मिलेंगी, उनकी अलग लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. इस लिस्ट के आधार पर शिक्षा विभाग के अधिकारी संबंधित स्कूलों की जांच करेंगे. अगर जांच में स्कूल दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. इसमें भारी जुर्माना लगाने से लेकर स्कूल की मान्यता रद्द करने तक की प्रक्रिया शामिल हो सकती है.

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