UPSC के EWS कोटे पर उठे सवाल, क्या जरूरतमंदों का हक छिन रहा है?


UPSC EWS Quota: अभी तक NTA की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही थीं कि अब UPSC पर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि ये सवाल पेपर लीक को लेकर नहीं बल्कि EWS कोटे को लेकर हैं. कई चयनित उम्मीदवारों की आर्थिक स्थिति को लेकर जांच में बड़े खुलासे हुए हैं.  

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग की तरफ से हुई सिविल सेवा परीक्षा 2025 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे जरिए चयनित 104 उम्मीदवारों में से बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की थी, जिन्होंने महंगे कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई की है. साथ ही निजी स्कूलों में शिक्षा हासिल की या फिर जिनके परिवार बिजनेस से जुड़े हुए हैं.

क्या कहती है रिपोर्ट?

रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. EWS कोटे से चयनित उम्मीदवारों में से 67 उम्मीदवार अच्छे कोचिंग संस्थानों में पढ़े हैं. जहां फीस लाखों रुपये तक होती है. जांच में निकल कर आया कि 46 कैंडिडेट्स प्राइवेट स्कूल में पढ़े हैं. जहां महंगी पढ़ाई होती है. इसके अलावा 28 अभ्यर्थी ऐसे परिवारों से आते हैं जिनके परिवार बिजनेस फैमिली से हैं. वहीं, करीब 10 उम्मीदवार ऐसे भी हैं जो पहले से कॉर्पोरेट सेक्टर में काम कर चुके थे.

वहीं, अगर हम इनकी एजुकेशन की बात करें तो कई उम्मीदवार देश के टॉप संस्थानों से पढ़ाई कर चुके हैं. रिपोर्ट के अनुसार लगभग 14 उम्मीदवारों ने IIT, NIT, JNU दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों से ग्रेजुएशन या फिर पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की. वहीं, रिपोर्ट में पता चला है कि कुछ कैंडिडेट्स EWS कोटे में फिट बैठते हैं.

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क्या है EWS?

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटा की शुरुआत वर्ष 2019 में 103वें संविधान संशोधन के जरिए की गई थी. इस व्यवस्था के तहत सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाता है.

EWS आरक्षण उन उम्मीदवारों के लिए है जो SC, ST या OBC जैसी आरक्षित श्रेणियों में शामिल नहीं हैंलेकिन आर्थिक रूप से कमजोर हैं. फिलहाल अगर किसी परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है और वह सरकार द्वारा निर्धारित संपत्ति संबंधी मानदंडों को पूरा करता है, तो वह EWS प्रमाणपत्र बनवाकर इस आरक्षण का लाभ उठा सकता है.

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