20 लाख की नौकरी ठुकराकर बने IPS, पढ़ें शरण कांबले की कहानी
Published at : 29 Sep 2026 08:25 AM (IST)
शरण कांबले का बचपन सीमित संसाधनों के बीच बीता, उनके पिता गोपीनाथ कांबले और मां परिवार चलाने के लिए दिहाड़ी मजदूरी करने के साथ सब्जियां बेचते थे. दोनों के औपचारिक शिक्षा ज्यादा नहीं हुई, लेकिन वह अपने बेटे की पढ़ाई को लेकर हमेशा गंभीर रहे. कांबले ने गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाई की. 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए उन्हें रोज करीब 12 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था. उनके घर में 11वीं कक्षा तक बिजली भी नहीं थी. ऐसे में रात के समय पढ़ाई के लिए उन्हें केरोसिन की लालटेन पर निर्भर रहना पड़ता था.

मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद कांबले ने पढ़ाई जारी रखी. महाराष्ट्र सीईटी पास करने के बाद उन्होंने सांगली के एक कॉलेज में बीटेक में एडमिशन मिला. इसके बाद उन्होंने बेंगलुरू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम इंजीनियरिंग में एमटेक किया. एमटेक पूरा करने के बाद उनके सामने प्राइवेट क्षेत्र में करियर का मौका था. उन्हें करीब 20 लाख रुपये सालाना सैलरी वाली नौकरी का ऑफर मिला. हालांकि उन्होंने इस नौकरी को एक्सेप्ट नहीं किया और सिविल सेवा में जाने का फैसला किया.

एमटेक सिविल सेवा में जाने के टारगेट के साथ कांबले दिल्ली पहुंचे और यूपीएससी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की. इस दौरान उन्हें महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी आर्थिक मदद मिली. उन्हें 8 महीने तक हर महीने 12000 की स्कॉलरशिप मिली. उनकी मेहनत का नतीजा अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में देखने को मिला.

2019 में उन्होंने यूपीएससी सीएपीएफ परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल की. इसके बाद 2020 में यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन में उनकी ऑल इंडिया रैंक 542 रही. इस दौरान उन्होंने इंडियन फॉरेस्ट सर्विस परीक्षा में भी रैंक 127 हासिल की. कई परीक्षाओं में सफलता मिलने के बावजूद उन्होंने आईपीएस को अपना करियर चुना और 2021 बैच के राजस्थान कैडर के अधिकारी बने

आईपीएस बनने के बाद कांबले ने राजस्थान के जालौर जिले के सांचौर में एसीपी के तौर पर काम किया. गुजरात से सटे इस इलाके में उन्होंने नशे की तस्करी और नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की.

उनके काम में संगठित ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ सामाजिक स्तर पर जागरूकता अभियान भी शामिल रहे. शादी और स्थानीय आयोजनों में अफीम और डोडा पोस्त जैसी परंपराओं को हतोत्साहित करने के लिए भी उन्होंने अभियान चलाया. उनके कार्यों के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस पर डीजीपी डिस्क से सम्मानित किया गया.
Published at : 29 Sep 2026 08:25 AM (IST)