हार को बनाया ताकत, 15 से ज्यादा बार फेल होने के बाद बिलाल खान ने पास किया CAPF


एक के बाद एक कई डिफेंस परीक्षाओं में असफल होने के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी और आखिरकार यूपीएससी सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट एग्जामिनेशन 2025 में सफलता हासिल कर ली. बिलाल ने अपने चौथे प्रयास में परीक्षा पास करते हुए ऑल इंडिया रैंक 121 हासिल की. उनकी कहानी लगातार कोशिश और धेर्य की मिसाल मानी जाती है.

आपको बता दें कि बिलाल खान ने 2019 में ग्रेजुएशन पूरा किया था. इसके बाद उन्होंने एनसीसी कैडेट कैप्टन के तौर पर काम किया. इसी दौरान उनके मन में डिफेंस सर्विस में जाने और वर्दी पहन कर देश की सेवा करने का टारगेट मजबूत हुआ. इसके बाद उन्होंने अलग-अलग रक्षा परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी. हालांकि सफर में उन्हें लगातार असफलता का सामना करना पड़ा. सफलता जल्दी नहीं मिली, लेकिन उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी. हर परीक्षा के बाद उन्होंने अपनी तैयारी और रणनीति में सुधार करने की कोशिश की.

आपको बता दें कि बिलाल खान ने 2019 में ग्रेजुएशन पूरा किया था. इसके बाद उन्होंने एनसीसी कैडेट कैप्टन के तौर पर काम किया. इसी दौरान उनके मन में डिफेंस सर्विस में जाने और वर्दी पहन कर देश की सेवा करने का टारगेट मजबूत हुआ. इसके बाद उन्होंने अलग-अलग रक्षा परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी. हालांकि सफर में उन्हें लगातार असफलता का सामना करना पड़ा. सफलता जल्दी नहीं मिली, लेकिन उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी. हर परीक्षा के बाद उन्होंने अपनी तैयारी और रणनीति में सुधार करने की कोशिश की.

बिलाल ने पिछले कुछ वर्षों में 15 से ज्यादा डिफेंस परीक्षाओं में हिस्सा लिया. उन्होंने कंबाइंड डिफेंस सर्विस यानी सीडीएस परीक्षा में करीब 10 बार प्रयास किया, इसके अलावा एयरफोर्स की परीक्षा में भी वह 5 से 6 बार शामिल हुए.

बिलाल ने पिछले कुछ वर्षों में 15 से ज्यादा डिफेंस परीक्षाओं में हिस्सा लिया. उन्होंने कंबाइंड डिफेंस सर्विस यानी सीडीएस परीक्षा में करीब 10 बार प्रयास किया, इसके अलावा एयरफोर्स की परीक्षा में भी वह 5 से 6 बार शामिल हुए.

लगातार प्रयासों के दौरान उन्होंने परीक्षा के पैटर्न, अपनी कमियों और तैयारी के तरीके को बेहतर तरीके से समझा. एक परीक्षा में मिली असफलता को उन्होंने अगली परीक्षा की तैयारी में इस्तेमाल किया. यही वजह है कि उनका सफर एक बार में सफलता हासिल करने के बजाय लगातार सीखने और प्रयास करने का रहा.

लगातार प्रयासों के दौरान उन्होंने परीक्षा के पैटर्न, अपनी कमियों और तैयारी के तरीके को बेहतर तरीके से समझा. एक परीक्षा में मिली असफलता को उन्होंने अगली परीक्षा की तैयारी में इस्तेमाल किया. यही वजह है कि उनका सफर एक बार में सफलता हासिल करने के बजाय लगातार सीखने और प्रयास करने का रहा.

इसी तरह कई परीक्षाओं में कोशिश करने के बाद आखिरकार बिलाल की मेहनत रंग लाई. उन्होंने यूपीएससी सीएपीएफ 2025 परीक्षा अपने चौथे प्रयास में पास की और ऑल इंडिया रैंक 121 हासिल की.

इसी तरह कई परीक्षाओं में कोशिश करने के बाद आखिरकार बिलाल की मेहनत रंग लाई. उन्होंने यूपीएससी सीएपीएफ 2025 परीक्षा अपने चौथे प्रयास में पास की और ऑल इंडिया रैंक 121 हासिल की.

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उनकी यह सफलता इसलिए भी खास रही, क्योंकि इससे पहले वह लंबे समय तक अलग-अलग डिफेंस परीक्षाओं में प्रयास करते रहे थे. कई बार सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने तैयारी छोड़ने के बजाय अपनी रणनीति में बदलाव किया और आगे बढ़ते रहे. बिलाल अपनी सफलता में उनके परिवार का भी बहुत बड़ा योगदान मानते हैं. उनके माता-पिता थाने में एक लॉन्ड्री की दुकान चलाते हैं. आर्थिक समस्याओं के बावजूद उनके परिवार ने उनकी पढ़ाई और तैयारी में उनका साथ दिया.  बिलाल के पिता ने उनकी शिक्षा का समर्थन किया, जबकि उनकी मां और दो बड़ी बहनों ने असफलताओं के दौर में उनका हौसला बनाए रखा. जिसका नतीजा यह रहा कि आज बिलाल सीएपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट बने हैं.

उनकी यह सफलता इसलिए भी खास रही, क्योंकि इससे पहले वह लंबे समय तक अलग-अलग डिफेंस परीक्षाओं में प्रयास करते रहे थे. कई बार सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने तैयारी छोड़ने के बजाय अपनी रणनीति में बदलाव किया और आगे बढ़ते रहे. बिलाल अपनी सफलता में उनके परिवार का भी बहुत बड़ा योगदान मानते हैं. उनके माता-पिता थाने में एक लॉन्ड्री की दुकान चलाते हैं. आर्थिक समस्याओं के बावजूद उनके परिवार ने उनकी पढ़ाई और तैयारी में उनका साथ दिया. बिलाल के पिता ने उनकी शिक्षा का समर्थन किया, जबकि उनकी मां और दो बड़ी बहनों ने असफलताओं के दौर में उनका हौसला बनाए रखा. जिसका नतीजा यह रहा कि आज बिलाल सीएपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट बने हैं.

Published at : 01 Sep 2026 09:45 PM (IST)

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