शिक्षा में उत्तराखंड का बड़ा कमाल, ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ बनने से बस एक कदम दूर


शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड ने एक बड़ी कामयाबी की ओर कदम बढ़ा दिया है. राज्य की साक्षरता दर अब 98 प्रतिशत के पार जा चुकी है और केंद्र सरकार के ‘उल्लास’ कार्यक्रम के तहत तय किए गए सभी मानकों को भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड अब देश का छठा ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य बनने की दहलीज पर खड़ा है. राज्य सरकार इस संबंध में जल्द ही होने वाली कैबिनेट बैठक में औपचारिक प्रस्ताव लाने की तैयारी में है.

प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इसे आगे की कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. एक बार केंद्र की स्वीकृति मिल जाने पर उत्तराखंड औपचारिक रूप से देश के उन चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिन्हें पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल है.

मंत्री ने दिए जल्द प्रस्ताव भेजने के निर्देश

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस मामले में विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रस्ताव को बिना देरी किए शासन को भेजा जाए. उन्होंने इस मौके पर कहा कि राज्य अब इस बड़ी उपलब्धि से सिर्फ एक कदम दूर है, और जैसे ही कैबिनेट से इसे हरी झंडी मिलती है, इसे तुरंत केंद्र सरकार के पास भेज दिया जाएगा. मंत्री के इस बयान से साफ है कि सरकार इस लक्ष्य को लेकर कितनी गंभीर और उत्साहित है.

कैसे तय हुआ यह सफर

इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे एक लंबी और सुनियोजित मुहिम रही है. डॉ. रावत के अनुसार, ‘उल्लास’ कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में वयस्कों की शिक्षा को प्राथमिकता के तौर पर लिया गया. इसके तहत न केवल बुनियादी पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दिया गया, बल्कि लोगों को जीवन से जुड़े जरूरी कौशल, रोजगारपरक प्रशिक्षण और निरंतर सीखने के मौके भी उपलब्ध कराए गए.

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इस अभियान को सफल बनाने में सिर्फ सरकारी मशीनरी ही नहीं, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. कई सामाजिक संगठनों, कॉरपोरेट कंपनियों और जागरूक नागरिकों ने इस मुहिम को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दिया. कुछ लोगों ने तो गांव गोद लेकर वहां के निरक्षर लोगों को पढ़ाने-लिखाने की जिम्मेदारी खुद उठाई.

सबसे खास बात यह रही कि इस पूरी मुहिम का सबसे ज्यादा फोकस उन वर्गों पर रखा गया, जो शिक्षा के मामले में पीछे छूट गए थे खासतौर पर महिलाएं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग, और वे समुदाय जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से भी कम थी. इन वंचित तबकों को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश ने ही राज्य को इस बड़ी सफलता के करीब पहुंचाया.

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आखिर ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य का दर्जा मिलता कैसे है?

केंद्र सरकार के ‘उल्लास’ कार्यक्रम के तहत किसी भी राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने के लिए कुछ तय मानक पूरे करना जरूरी होता है. इस योजना का मुख्य लक्ष्य 15 साल से अधिक उम्र के उन लोगों को साक्षर बनाना है, जो किसी वजह से पढ़ाई से वंचित रह गए थे. नियमों के मुताबिक, जब किसी राज्य में वयस्क शिक्षा की दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है और निरक्षर आबादी तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिया जाता है. तभी उस राज्य को आधिकारिक तौर पर ‘पूर्ण साक्षर’ का दर्जा दिया जाता है.

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रिपोर्ट: शुभम सेमवाल

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