लद्दाख के लोअर डिग्री वाले कर्मचारियों को मिलेगा करियर प्रमोशन, रद्द हुआ पुराना आदेश


लद्दाख के सैकड़ों निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि अब उन्हें ऊंचे पदों पर करियर प्रमोशन के लिए योग्य घोषित कर दिया गया है. लद्दाख प्रशासन ने उस आदेश को तत्काल रद्द करने का निर्देश दिया है, जो उच्च डिग्री वाले सरकारी कर्मचारियों को स्नातक स्तर के पदों के लिए आवेदन करने से रोकता था.

उपराज्यपाल ने ट्वीट करके दी जानकारी

लद्दाख के युवाओं के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस फैसले की घोषणा की. इस फैसले से सैकड़ों लद्दाखी लोगों को सीधा फायदा होगा, क्योंकि अब स्नातक डिग्री वाले उन सरकारी कर्मचारियों पर लगी पाबंदी हटा दी गई है, जिन्हें 10वीं या 12वीं के आधार पर नियुक्त किया गया था. अब वे स्नातक स्तर की नौकरियों के लिए आवेदन कर सकेंगे. सिन्हा ने ‘X’ पर लिखा, “एक ऐतिहासिक सुधार के तहत, मैंने उन पाबंदियों को हटाने का आदेश दिया है, जो उच्च डिग्री वाले सरकारी कर्मचारियों को, जिन्हें कम योग्यता वाले पदों पर नियुक्त किया गया था, भविष्य में स्नातक स्तर के पदों के लिए आवेदन करने से रोकती थीं.

इस आदेश को किया गया रद्द

जानकारी के मुताबिक, यह आदेश 25.03.2026 के कार्यालय ज्ञापन (OM) के पैरा 3 को रद्द करता है. इसके तहत सेवारत सभी उम्मीदवार, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने पहले हलफनामा दिया था. अब अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करने पर ऊंचे पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे. इससे पहले स्नातक की योग्यता रखने वाले जिन उम्मीदवारों को कम योग्यता वाली सरकारी नौकरियां मिली थीं, उन्हें एक वचनपत्र/हलफनामा जमा करना पड़ता था. इसमें उन्हें यह घोषित करना होता था कि उनके पास कोई उच्च योग्यता नहीं है और वे केवल 10वीं या 12वीं पास हैं.

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इन लोगों को होगा फायदा

ऐसे में उन उम्मीदवारों को फायदा होगा, जो स्नातक नहीं होने के आधार पर भविष्य में स्नातक स्तर के कई पदों पर भर्ती के लिए अयोग्य मान लिए जाते थे. अब सरकारी सेवा में पहले से कार्यरत सभी उम्मीदवार, जिनमें ऐसे हलफनामों/वचनपत्रों के आधार पर नियुक्त लोग भी शामिल हैं, भविष्य में स्नातक स्तर की परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगे और ऊंचे पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे, बशर्ते वे अन्य निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हों.

उपराज्यपाल ने दिया यह आदेश

उपराज्यपाल सक्सेना ने आदेश दिया, “यह छूट उन सभी मौजूदा कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगी, जो भविष्य में स्नातक स्तर के सरकारी पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं. उच्च योग्यता न होने के संबंध में पहले दिए गए हलफनामों के आधार पर उन्हें आवेदन करने से नहीं रोका जाएगा. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा.” सरकारी विभागों में काम करते हुए भी लोगों को ऊंचे पदों के लिए आवेदन करने से रोकने वाली पाबंदी को ‘अनुचित और प्रतिबंधात्मक’ बताते हुए उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि यह नया आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होता है. यह अनुचित और प्रतिबंधात्मक पाबंदी, जिसने उम्मीदवारों को खुद को केवल 10वीं या 12वीं पास घोषित करने के लिए मजबूर किया था, उन्हें उनके हकदार करियर विकास से वंचित करती थी. इस तरह की पाबंदियां, सही रोज़गार पाने के मौलिक अधिकार के खिलाफ थीं.

फैसले से क्या होगा बदलाव?

इस फैसले से हज़ारों लद्दाखी युवा, जो पहले से ही ऑर्डरली/MTS और इसी तरह के पदों पर काम कर रहे हैं, अब ग्रेजुएट-लेवल के पदों के लिए मुकाबला करने के काबिल हो जाएंगे. इससे सभी को बराबर मौके मिलेंगे, प्रशासन ज़्यादा जवाबदेह होगा और लद्दाख में उनका भविष्य सुरक्षित होगा. प्रशासन ने एंट्री-लेवल के पदों के लिए भर्ती के नियमों में भी बदलाव किया है, जिसमें अब सिर्फ़ कम से कम पढ़ाई की शर्त (जैसे, मैट्रिकुलेशन) रखी गई है और ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ाई की ऊपरी सीमा को हटा दिया गया है. UT प्रशासन ने कहा है कि वह ऐसे सुधारों के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, जो युवाओं के हितों की रक्षा करें और साथ ही उनके करियर में आगे बढ़ने के निष्पक्ष मौकों की गारंटी दें.

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